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RBI Monetary Policy Today: आरबीआई: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, आम लोगों को सस्ती ईएमआई के लिए करना होगा इंतजार

Wed, 07 Apr 2021 11:10 AM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Wed, 07 Apr 2021 11:10 AM IST
सार

  • भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक आज समाप्त हो गई है। 
  • गवर्नर शक्तिकांत दास ने समिति द्वारा लिए गए फैसलों की घोषणा की।
  • यह वित्त वर्ष 2021-22 की पहली एमपीसी की बैठक थी।
  • रिजर्व बैंक ने आखिरी बार 22 मई 2020 में नीतिगत दरों संशोधन किया था।

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RBI Governor Shaktikanta Das Press Conference First Monetary Policy Committee MPC of FY22 new financial year
RBI Monetary Policy: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास - फोटो : YouTube: @ Reserve Bank of India

विस्तार

पांच अप्रैल को शुरू हुई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति की बैठक आज समाप्त हो गई है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समिति द्वारा लिए गए फैसलों की घोषणा की। कोरोना वायरस महामारी के चलते देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। ऐसे में केंद्रीय बैंक द्वारा किए जा रहे एलान अहम हैं। यह वित्त वर्ष 2021-22 की पहली एमपीसी की बैठक थी। एमपीसी ने ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है। मालूम हो कि रिजर्व बैंक ने आखिरी बार 22 मई 2020 में नीतिगत दरों संशोधन किया था।

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प्रमुख बातें:

  • आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। यह चार फीसदी पर बरकरार है। एमपीसी ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है।
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  • यानी ग्राहकों को ईएमआई या लोन की ब्याज दरों पर नई राहत नहीं मिली है।
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फसिलिटी (MSF) रेट भी 4.25 फीसदी पर है।
  • दास ने आगे कहा कि रिवर्स रेपो रेट को भी 3.35 फीसदी पर स्थिर रखा गया है।
  • इसके साथ ही बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया गया है। यह 4.25 फीसदी पर है।
  • इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक रुख को 'उदार' बनाए रखा है।
  • दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक प्रणाली में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करेगा, ताकि उत्पादक क्षेत्रों को ऋण आसानी से मिले।
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  • वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार है, लेकिन अनिश्चितता अब भी बरकरार है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2021-22 में देश की जीडीपी में 10.5 फीसदी की तेजी का अनुमान लगाया है। पिछली बैठक में भी जीडीपी में 10.5 फीसदी की तेजी का ही अनुमान लगाया गया था।
  • इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 26.2 फीसदी होगी, दूसरी तिमाही में 8.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 5.4 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.2 फीसदी।
  • उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे टीकाकरण तेज हो रहा है, वैसे-वैसे विश्वभर की अर्थव्यवस्था में सुधार आएगी। अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सभी संभव प्रयास किए जाएंगे।
  • शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के बावजूद अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है।
  • लेकिन हाल ही में जिस तरह से कोरोना के मामले बढ़े हैं, उससे थोड़ी अनिश्चितता बढ़ी है। लेकिन भारत चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है।
  • मुद्रास्फीति पर दास ने कहा कि, वित्त वर्ष 2022 में सीपीआई 5.1 फीसदी रह सकती है। पहली और दूसरी तिमाही में खुदरा महंगाई दर 5.20 फीसदी रह सकती है। चौथी तिमाही में यह पांच फीसदी हो सकती है।
  • वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में सीपीआई पांच फीसदी रह सकती है।
  • शक्तिकांत दास ने कहा कि खाने-पीने वाले के सामानों की मंहगाई दक्षिण-पश्चिम मानसून और पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स पर निर्भर करेगी।
  • उन्होंने कहा कि, बाजार में तरलता बढ़ने पर जोर रहेगा। वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में केंद्रीय बैंक एक लाख करोड़ रुपये का बॉन्ड खरीदेगा। सरकारी सिक्योरिटीज प्रोग्राम के तहत 25,000 करोड़ रुपये का बॉन्ड खरीदे जाएंगे।
  • टीएलटीआरओ ऑन टैप योजना को बढ़ाने का एलान किया गया। टीएलटीआरओ ऑन टैप योजना को बढ़ाकर 30 सितंबर 2021 कर दिया गया है। 
  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को राज्यों के लिए 51,560 करोड़ रुपये की अंतरिम अर्थोपाय अग्रिमों (डब्ल्यूएमए) की सीमा को सितंबर तक बढ़ा दिया, ताकि उन्हें कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से पैदा हुए वित्तीय तनाव से निपटने में मदद मिल सके।
  • साथ ही नाबार्ड, राष्ट्रीय आवास बोर्ड (एनएचबी) और सिडबी को 50,000 करोड़ रुपये की सहायता देने का एलाना भी किया गया है। 
  • केंद्रीय बैंक ने फुल केवाईसी पीपीआई में आउटस्टेंडिंग डिपॉजिट की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव रखा है।
  • पेमेंट कंपनियां भी नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) और रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) के जरिए पैसे ट्रांसफर कर सकेंगी। अभी तक यह सुविधा केवल बैंकों को ही मिलती है।
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