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RBI: ब्याज दरों पर बड़ा फैसला, लगातार सातवीं बार रेपो रेट में नहीं हुआ कोई बदलाव

Fri, 06 Aug 2021 02:08 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Fri, 06 Aug 2021 02:08 PM IST
सार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो रेट को चार फीसदी पर स्थिर रखा है। रिवर्स रेपो रेट भी 3.35 फीसदी पर स्थिर है।

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Rbi Governor Shaktikanta Das No Change In Repo Rate And Reverse Repo Rate
आरबीआई - फोटो : pixabay

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और इसे रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर बरकरार रखा है। यह लगातार सातवीं बार है जब रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इससे पहले, 22 मई 2020 को नीतिगत दर में बदलाव किया गया था और यह रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर आ गई थी।

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चार फीसदी पर स्थिर रेपो रेट
रेपो रेट चार फीसदी पर बरकरार है। यानी आज ग्राहकों को ईएमआई या लोन की ब्याज दरों पर नई राहत नहीं मिली है।  मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट भी 4.25 फीसदी पर स्थिर है। रिवर्स रेपो रेट को भी 3.35 फीसदी पर स्थिर रखा गया है। इसके साथ ही बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया गया है। यह 4.25 फीसदी पर है। 
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तीसरी लहर और मुद्रास्फीति को ध्यान में रखकर लिया फैसला
कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर की आशंका के बीच आरबीआई ने यह निर्णय ऐसे समय में लिया जब मुद्रास्फीति पिछले दो महीनों में लक्ष्य के तहत निर्धारित सीमा से ऊपर पहुंच गई। आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने और वृद्धि को गति देने के लिए आरबीआई ने यह कदम उठाया है। 
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क्या है रेपो रेट?
मालूम हो कि रेपो रेट वह रेट होता है, जिस पर आरबीआई वाणिज्यक बैंकों और दूसरे बैंकों को लोन देता है। इसे रिप्रोडक्शन रेट या रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट के कम होने का अर्थ है कि बैंक से मिलने वाले सभी तरह के लोन ग्राहकों के लिए सस्ते हो जाएंगे और यदि यह दर बढ़ती है तो सभी तरह के लोन- होम लोन, व्हीकल लोन, पर्सनल लोन, आदि महंगे हो जाते हैं। 


क्या है रिवर्स रेपो रेट?
दरअसल बैंकों के पास जो अतिरिक्त नकदी होती है, वे उसे केंद्रीय बैंक के पास जमा करा देते हैं। इस जमा राशि पर बैंकों को ब्याज का लाभ मिलता है और जिस दर पर बैंकों को आरबीआई में उनके धन पर ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं। यह बाजारों में नकदी को नियंत्रित करने में काम आता है। 

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