फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Banking Beema ›   privatization of psu banks is not a answer for scam and fraud

PSU बैंकों का निजीकरण नहीं है समस्या का हल, बैंक ब्यूरो बोर्ड को सक्षम बनाने की जरूरत

Mon, 26 Mar 2018 05:13 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 26 Mar 2018 05:13 PM IST
विज्ञापन
privatization of psu banks is not a answer for scam and fraud
बैंक ऑफ महाराष्ट्र

सरकारी बैंकों की मौजूदा समस्याओं हल इन बैंकों का निजीकरण नहीं है। बल्कि कुछ कारोबारी विशेषज्ञों के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बोर्ड को सक्षम बनाने की जरूरत है जो राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त माहौल में पूरी क्षमता से काम करने के लिए आजाद हो।

विज्ञापन


सरकारी बैंकों की फिलहाल है जरूरत
इन्फोसिस के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) वी बालाकृष्णन ने सरकारी बैंकों की कार्यप्रणाली और उनके निजीकरण की जरूरत पर चल रही बहस के बीच कहा कि ग्लोबल ट्रस्ट बैंक जब असफल हुआ था, तब वह एक निजी बैंक था।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि इसके साथ ही एक ऐसे देश में जहां बैंकिंग सुविधा से वंचित लोगों की एक विशाल आबादी है, आपको बैंकों की पहुंच बढ़ाने तथा सामाजिक लक्ष्य पूरा करने दोनों ही वजहों से सरकारी बैंकों की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बालाकृष्णन ने कहा कि भारत में बचत की दर बहुत ऊंची है और सरकारी बैंक बचत कर्ताओं को जरूरी सुरक्षा तंत्र तथा सुविधा उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने कहा कि बैंक्स ब्यूरो बोर्ड को सीईओ का चुनाव करने में, उन्हें दिए जाने वाल वेतन और भत्तों को तय करने में, उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में और बोर्ड के स्वतंत्र सदस्यों को नियुक्त करने में प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

बालाकृष्णन ने खास तौर से कहा कि बैंकों को राजनीतिक हस्तक्षेप से पूरी तरह मुक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतत: समुचित संस्थागत प्रणाली, सख्त नियामकीय व्यवस्था और नियामकीय निगरानी से सरकारी बैंकों की सफलता तय होगी।

निजीकरण के भी हैं समर्थक

privatization of psu banks is not a answer for scam and fraud
Bank of Baroda, South African

इन्फोसिस के ही एक अन्य पूर्व सीएफओ टीवी मोहनदास पई ने हालांकि नीति आयोग के पूर्व वाइस चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया से सहमति जताई, जिन्होंने एसबीआई को छोड़कर अन्य सरकारी बैंकों के निजीकरण की वकालत की है। पई ने कहा कि हां, मैं पनगढ़िया के साथ सहमत हूं। सरकारी बैंकों को संचालन की आजादी चाहिए। अभी की समस्या है मालिक, जो उन्हें पूरी क्षमता से काम नहीं करने देता।

दक्ष और फुर्तीली संरचना की जरूरत
एक बड़े सरकारी बैंक के एक सेवानिवृत्त चेयरमैन तथा एमडी ने सुझाव दिया कि सरकारी बैंकों के बोर्डों की ताकत बढ़ाई जानी चाहिए और उन्हें इस सेक्टर की कार्यप्रणाली में बड़ा सुधार करने के लिए नेतृत्व का चयन करने तथा अच्छे मानव संसाधन को नियुक्त करने की आजादी मिलनी चहिए।

उन्होंने कहा कि तेजी से बदल रही दुनिया में सरकारी बैंकों को अनेक तकनीक अपनाने होंगे और उन्हें अपनी संरचना को तेज और फुर्तीला बनाना होगा। उन्होंने कहा कि बोर्ड को सशक्त करने की जरूरत है, क्योंकि उसका समय बैंक के साथ अधिक गुजरता है। उन्हें नेतृत्व और रणनीति पर फैसला करने की आजादी दी जानी चाहिए।

मंत्रालय द्वारा लिया जाने वाला साक्षात्कार काफी नहीं
उन्होंने कहा कि बोर्ड को सशक्त करने, सही परंपरा, आपदा प्रबंधन प्रक्रिया, निगरानी और सही समाधान अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बोर्ड को नेतृत्व (चेयरमैन, कार्यकारी निदेशक) तय करना चाहिए, उसे यह तय करना चाहिए कि कैसे नियुक्ति हो, कौन-कौन से लोग वहां होने चाहिएं। फैसला उन्हें लेने चाहिए, न कि मंत्रालय आपको हर वक्त निर्देश दे।

पूर्व अधिकारी ने कहा कि आज वित्त मंत्रालय अगले तीन साल तक बैंक के प्रमुख को नियुक्त करने के लिए 45 मिनट का साक्षात्कार लेता है। कुछ लोग बात करने में कुशल होते हैं और संभव है कि वे काम करने में कुशल न हों। आप यह एक छोटे से साक्षात्कार में तय नहीं कर सकते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Budget 2022 से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed