लोन छिपाने के लिए PMC बैंक ने खोले 21 हजार फर्जी खाते, सरकार ने शुरू की HDIL के खिलाफ जांच
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पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक ने लोन को छुपाने के लिए 21 हजार से अधिक फर्जी खातों को खोला था। इससे बैंक को करीब 4355 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक बैंक प्रबंधन ने यह इसलिए किया था ताकि किसी को भी एनपीए के बारे में पता न चले और वो एचडीआईएल को लोन देता रहे। अब केंद्र सरकार ने भी कंपनी के खिलाफ अपनी जांच को शुरू कर दिया है
बैंक ने खोले थे डमी खाते
मुंबई पुलिस के सूत्रों ने बताया कि, पिछले 10 सालों से हाउसिंग कंपनी एचडीआईएल को पैसे दिलाने के लिए बैंक ने कईं डमी खाते खोले थे। पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व एमडी जॉय थॉमस ने गलत तरीके से एचडीआईएल की मदद की थी। बैंक ने कुल कर्ज का 73 फीसदी यानी 6,226 करोड़ रुपये एचडीआईएल को दिए थे। बता दें कि रियल एस्टेट सेक्टर की प्रमुख कंपनी एचडीआईएल अब दिवालिया हो गई है।
सरकार ने शुरू की जांच
रॉयटर्स के मुताबिक एक सरकारी अफसर ने मंगलवार को बताया कि कॉर्पोरेट मंत्रालय के आधीन सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) पीएमसी मामले में एचडीआईएल की भूमिका की जांच करेगा। अगले दो महीने में जांच पूरी होने की उम्मीद है।
कुल कर्ज का दो-तिहाई हिस्सा एचडीआईएल को
मामले में एक सूत्र ने बताया कि, 'यह आश्चर्य की बात है कि बैंक की तरफ से बांटे गए कुल कर्ज का दो-तिहाई हिस्सा सिर्फ एक ही कंपनी को दिया गया। उसने कहा कि हो सकता है कि बैंक साल 2008 से ही फर्जीवाड़ा कर रहा है। बैंक के चेयरमैन वरयाम सिंह एचडीआईएल के बोर्ड में शामिल थे। बैंक द्वारा एचडीआईएल को रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन के तौर पर कितना कर्ज दिया गया, इसका खुलासा नहीं किया गया था,जो नियमों के विरुद्ध है।
एफआईआर के मुताबिक एक रिएलिटी ग्रुप और इसकी कंपनियों को पीएमसी ने 44 कर्ज दिए। बैंक प्रबंधन वित्तीय स्थिति अच्छी बताता रहा लेकिन, हकीकत कुछ और थी। एफआईआर में पीएमसी के चेयरमैन वरयम सिंह और निलंबित एमडी जॉय थॉमस समेत अन्य अधिकारियों के नाम हैं। इसमें दिवालिया कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) और इसके पूर्व अफसरों सारंग वाधवान और राकेश वाधवान के भी नाम हैं।
एक महीने पहले दिया लोन
बैंक ने एक माह पहले ही एचडीआईएल के मालिक सारंग वधावन को यह पर्सनल लोन दिया था ताकि वो बैंक ऑफ इंडिया से लिए गए लोन की भरपाई कर सकें। बैंक ऑफ इंडिया ने लोन की किश्त जमा नहीं करने पर एचडीआईएल के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में याचिका दायर की थी। बैंक ऑफ इंडिया से कंपनी ने 520 करोड़ रुपये का लोन ले रखा था।
आरबीआई ने कार्रवाई बैंकिग रेलुगेशन एक्ट, 1949 के सेक्शन 35ए के तहत की है। प्रतिबंध सेक्शन 35 A के तहत लगाया गया है।