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NPA: सुप्रीम कोर्ट ने किया सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई से इनकार, कहा- यह नीतिगत मामला है

Thu, 07 Oct 2021 12:14 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Thu, 07 Oct 2021 12:14 PM IST
सार

बैंकों के डूबे हुए कर्ज (NPA) के मसले पर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है।

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NPA Supreme Court refuses to hear Subramanian Swamy petition said it is a policy matter
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है जिसमें बैंकों के डूबे हुए कर्ज यानी NPA संबंधित मुद्दे को हल करने के लिए लोन दिए जाने के मामले पर दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई थी। मामले में कोर्ट ने कहा है कि, 'यह नीतिगत विषय है। याचिकाकर्ता भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को ज्ञापन दे।'

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सुब्रमण्यम स्वामी ने याचिका में गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) पर लगाम लगाने के लिए विशेषज्ञ समिति बना दिशानिर्देश बनाने की मांग की थी, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने विचार करने से इनकार किया और आरबीआई के समक्ष अपनी बात रखने के लिए कहा है।
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मालूम हो कि 2015 में बैंकों की संपत्ति का आकलन किया गया था जिसमें बैंकों के भारी-भरकम एनपीए राशि के बारे में खुलासा हुआ था। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों की हालत लगातार सुधर रही है। 2018 में 21 में से सिर्फ दो सरकारी बैंक ही फायदे में थे, लेकिन 2021 में सिर्फ दो बैंकों को घाटा हुआ है। 
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'बैड बैंक' बनाने का फैसला
वित्त मंत्री ने बैंकों को एनपीए से उबारने के लिए 'बैड बैंक' बनाने का फैसला किया है। इस बैंक की स्थापना का मुख्य उद्देश्य बैंकों को डूबे कर्ज से बाहर निकालना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में इसके लिए 20 हजार करोड़ रुपये की घोषणा की थी। बैड बैंक ऐसे वित्तीय संस्थान को कहते हैं, जो कर्जदाताओं यानी बैंकों की खराब या फंसी परिसंपत्ति को लेकर उनकी मदद करता है। यह बैंकों के एनपीए की वसूली का समाधान निकालता है। 


इससे देश की बैंकों की बैलेंस शीट सुधर जाएगी और उन्हें नए कर्ज देने में सुविधा होगी। सारे बैंकों का एनपीए इसमें समाहित हो जाएगा और वे फंसे कर्ज से मुक्त हो जाएंगे। इससे सरकार को भी फायदा होगा। यदि वह किसी सरकारी बैंक का निजीकरण करना चाहेगी तो उसमें आसानी होगी। वहीं बैड बैंक के जरिए एनपीए यानि डूबते कर्ज को वसूल किया जा सकेगा। इसका लक्ष्य कई जटिल मुद्दों को सुलझाकर बैंकों को बिजनेस पर फोकस करने के लिए स्वतंत्र रखना है।

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