बाजार में नहीं है पूंजी की कमी, ग्राहकों को मिलेगा ब्याज कटौती का लाभः शक्तिकांत दास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि आम बजट में हुए प्रावधानों से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का असर फिलहाल महंगाई पर नहीं पड़ेगा। साथ ही कहा कि विदेश से पूंजी जुटाने के लिए सॉवरेन बॉन्ड जारी करने से पहले सरकार से बातचीत की जाएगी।
महंगाई पर नहीं पड़ेगा असर
बजट पेश होने के बाद आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड के सदस्यों के साथ बैठक करने के बाद दास ने बताया कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होने का असर महंगाई दर पर पड़ने में समय लगता है। ऐसा नहीं है कि इसका असर अगले ही दिन से पड़ने लगे। उन्होंने बताया कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों का महंगाई पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा अगस्त के पहले सप्ताह में होने वाली केंद्रीय बैंक की मौद्रिक समिति की बैठक में होगी। आरबीआई की आंतरिक टीम इसका मूल्यांकन करेगी।
बाजार में नहीं है नकदी की कमी
बाजार में नकदी की कमी और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में संकट के सवाल पर दास ने कहा कि बाजार में नकदी की कमी नहीं है। एक जून, 2019 के बाद बाजार में पर्याप्त तरलता है। रहीं बात एनबीएफसी की तो आरबीआई उसकी निगरानी कर रहा है। एनबीएफसी के कामकाज पर नजर रखी जा रही है। उनका यह बयान सरकार की ओर से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 70000 करोड़ रुपये की पूंजी डालने की घोषणा के बाद आया है। इस सिलसिले में उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला काफी सकारात्मक घटनाक्रम है।
तेजी से पहुंचेगा ग्राहकों तक लाभ
आरबीआई की ओर से नीतिगत ब्याज दरों में कटौती के बाद भी इसका प्रभाव बैंकों के ब्याज दर पर नहीं दिखने के सवाल पर उन्होंने कहा कि नीतिगत ब्याज दरों में कटौती के लाभ का प्रसार होने में पहले से भी कम समय लगेगा। आगामी सप्ताहों में ब्याज दरों में कटौती का लाभ अधिक तेजी से ग्राहकों तक पहुंचेगा। आरबीआई इस साल रेपो रेट में तीन बार 0.25-0.25 फीसदी की कटौती कर चुका है।
सीतारमण ने आरबीआई बोर्ड को किया संबोधित
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल को संबोधित किया। बजट के बाद होने वाली परंपरागत बैठक में उन्होंने बजट में राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए उठाए गए कदमों और अन्य प्रमुख बिंदुओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि फरवरी में पेश अंतरिम बजट अनुमान की तुलना में पूर्ण बजट में 6,000 करोड़ रुपये अधिक राजस्व प्राप्ति का अनुमान रखा गया है। इससे राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.3 फीसदी पर सीमित रखने का अनुमान है। अंतरिम बजट में इसे 3.4 फीसदी पर सीमित करने का लक्ष्य था।