सस्ते ऋण की उम्मीद को झटका, ब्याजदरों में कोई बदलाव नहीं
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भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। रिजर्व बैंक ने उम्मीदों के अनुरूप रेपो रेट को 6.75 फीसदी और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को 4 फीसदी पर बरकरार रखा है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराज राजन ने नीतिगत ब्याज दरों की घोषणा करते हुए बताया कि महंगाई बढ़ने के दबाव के साथ-साथ 29 फरवरी को पेश होने वाले बजट पर उनकी नजर है।
ब्याज दरों में कटौती का कोई भी फैसला महंगाई दर के अनुसार ही लिया जाएगा। दिसंबर में थोक महंगाई की दर 0.73 फीसदी और खुदरा महंगाई की दर 5.51 फीसदी रही ह्रै।
रिजर्व बैंक की बजट पर रहेगी नजर
चालू वित्त वर्ष की छठी और अंतिम मौद्रिक नीति की समीक्षा स्रदौरान राजन ने कहा कि जनवरी 2016 में महंगाई की दर के छह प्रतिशत का लक्ष्य हासिल हो जाना चाहिए।
यदि इस साल मानसून सामान्य रहा और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल तथा विनिमय दर की यही स्थिति बनी रही तो वित्त वर्ष 2016-17 के अंत तक खुदरा महंगाई की दर पांच फीसदी की सीमा के भीतर रखने का लक्ष्य भी हासिल हो जाना चाहिए।
राजन ने कहा कि हालांकि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने से महंगाई की दर में एक या दो साल के लिए बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि वर्तमान अनुमान में इसकी गणना नहीं की गयी है।
उन्होंने कहा कि जब सिफारिशें लागू करने के समय के बारे में स्थिति स्पष्ट होगी, तब रिजर्व बैंक अपने महंगाई के अनुमान में सुधार करेगा।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि मानसून सामान्य नहीं रहता है या वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक स्थितियां बदलने से कमोडिटी मूल्यों में बदलाव होता है तो इससे भी महंगाई दर अनुमान से अलग रह सकता है।
विश्व बैंक के अनुमान से तेज रहेगी विकास दर: रिजर्व बैंक
रिजर्व बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ग्रोथ के अनुमान को 7.4 फीसदी पर बरकरार रखा है। यह विश्व बैंक के अनुमान 7.3 फीसदी से थोड़ा अधिक है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन द्वारा घोषित की गई द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा बयान में राजन ने अगले वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर बढ़ कर 7.6 फीसदी पहुंच जाने का अनुमान जताया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था को मौजूदा समय में स्थिरता के प्रकाशपुंज के तौर पर देखा जा रहा है। इसका कारण महंगाई में कमी, चालू खाते के घाटे के मोर्चे पर बेहतर स्थिति और राजकोषीय मजबूती के लिए प्रतिबद्धता है।
राजन ने मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि ग्रोथ की मौजूदा गति तार्किक, लेकिन मध्यम अवधि में उम्मीद से कम है। आरबीआई ने इस बात पर जोर दिया है कि आर्थिक विकास को तेज करने वाले कारकों को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। इससे अर्थव्यवस्था ऊंची विकास दर के हासिल कर सकेगी।