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बीमा: नियमों में हो सकता है बड़ा बदलाव, 'यूज एंड फाइल' प्रणाली को अपनाने पर विचार कर रहा IRDA

Thu, 11 Mar 2021 10:35 AM IST
‌डिंपल अलावाधी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Thu, 11 Mar 2021 10:35 AM IST
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insurance policy Irdai may move to use and file system where insurance companies in india can market products without obtaining an approval from the regulator
इंश्योरेंस पॉलिसी - फोटो : pixabay

बीमा क्षेत्र नियामक इरडा बीमा क्षेत्र में नए उत्पादों को मंजूरी देने के मामले में 'फाइल करो और इस्तेमाल करो' से हटकर अब 'इस्तेमाल करो और फाइल करो' प्रणाली को अपनाने पर विचार कर रहा है। इसमें बीमा कंपनियां बिना मंजूरी लिए बाजार में नए उत्पाद पेश कर सकेंगी। भारतीय एक्चुअरीज संस्थान द्वारा आयोजित एक वचुअर्ल सम्मेलन को संबोधित करते इरडा के चेयरमैन सुभाष सी खुंटिया ने  इसकी जानकारी दी।

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अभी ये है नियम
फाइल करो और इस्तेमाल करो प्रणाली के तहत किसी भी बीमा कंपनी को अपने नए उत्पाद को बाजार में पेश करने के लिए उस उत्पाद को लेकर भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) में आवेदन करना होता है। नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद से वह उस उत्पाद को बाजार में बेच सकता है।
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क्या है नया नियम?
लेकिन नई प्रणाली इस्तेमाल करो और फाइल करो में बीमा कंपनियों को बिना नियामक की अनुमति के ही नए उत्पादों को बाजार में बेचने की अनुमति होगी। उन्होंने कहा की एक्चुअरी यानी बीमा पॉलिसी का आकलन करने वाले बीमांककों की इस मामले में बड़ी जवाबदेही है। उन्हें बीमा पॉलिसी तैयार करते हुए एक तरफ पॉलिसी धारकों की सुरक्षा और दूसरी तरफ बीमा कंपनियों के परिचालन को ध्यान में रखना होता है और इसके बीच संतुलन बनाना होता है।
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नई पॉलिसी तैयार करते हुए इन बातों का रखना होगा ध्यान
खुंटिया ने जोर देते हुए कहा कि बीमांककों को कोई भी नई पॉलिसी तैयार करते हुए जलवायु परिवर्तन और भविष्य की महामारी जैसी अनिश्चितताओं और खतरों को भी ध्यान में रखना चाहिए। यह सब कुछ इस तरह होना चाहिए की जनता को उनकी जरूरत के समय व्यापक सुरक्षा उपलब्ध हो। इरडा चेयरमैन ने कहा कि बीमांकक (एक्चुअरी) बीमा नियामक की आंख और कान हैं। यह बीमा कंपनियों की विभिन्न गतिविधियों के लिए नियुक्त बीमांककों के प्रमाण पर निर्भर करता है। 

नियुक्त किए गए विभिन्न बीमांककों की बड़ी भूमिका है, यदि वह अपना काम प्रभावी ढंग से करते हैं तो उसके बाद हमें नियामकीय देखरेख की ज्यादा जरूरत नहीं होती है। वह इस मामले में नियामक की मदद कर सकतीं हैं कि कि नियमनों का क्रियान्वयन उपयुक्त ढंग से हो। इरडा चेयरमैन ने बीमांककों को सेवानिवृत्ति के क्षेत्र में बेहतर और नवोनमेषी उत्पाद तैयार करने को कहा। इस क्षेत्र में काफी मांग है। लोग अपने बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा के लिए ऐसे उत्पादों को चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि बीमांककों ने एक समिति प्रणाली के जरिए सेवानिवृति उत्पादों के मामले में एक मानक उत्पाद तैयार करने में नियामक की मदद की है। उन्होंने यह भी कहा कि बीमा उद्योग को अपने आप को डिजिटल दुनिया के लिए तैयार करना चाहिए और सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी संबद्ध आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में बीमांकक पेशेवरों को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नियामक जोखिम आधारित सक्षमता की शुरुआत करने की प्रक्रिया में है जिसमें कि बीमांकक स्टाफ के लिए बड़ी भूमिका होगी।


खुंटिया ने यह भी कहा कि भारत के आकार को देखते हुए देश में बीमांककों की संख्या काफी नहीं है और यह संख्या काफी बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2019 में यह संख्या 439 थी जो कि 2020 में मामूली बढ़कर 458 तक पहुंची। पिछले साल हमारे पास 165 बीमांकक सहायक और 7,500 के करीब छात्र सदस्य थे।

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