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सरकारी कर्मचारियों को सरकार का बड़ा तोहफा ,नेशनल पेंशन स्कीम में 4% ज्यादा का फायदा
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 09 Dec 2018 06:24 PM IST
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सरकारी कर्मचारियों के लिए नया साल कई सारी खुशियां लेकर आने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की बैठक में सरकारी कर्मचारियों को यह तोहफा दिया गया जिसके अंतगर्त सरकार अब कुल कोष में से 60 फीसदी ट्रांसफर करने को मंजूरी दी है जो अभी तक 40 फीसदी है।
सरकार नए साल से पहले ही सरकारी कर्मचारियों को तोहफा दे दिया है। सरकार ने नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) में अपना योगदान 10 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया है। इसमें कर्मचारियों का न्यूनतम योगदान 10 फीसदी बरकरार रहेगा।
क्या है नेशनल पेंशन स्कीम
नेशनल पेंशन स्कीम या एनपीएस एक रिटायरमेंट सेविंग अकाउंट है, जिसे भारत सरकार ने 1 जनवरी 2004 को लांच किया था। 2004 में इस तारीख के बाद ज्वाइन करने वाले सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए इस योजना में निवेश करना अनिवार्य कर दिया गया था। यही नहीं सरकार ने इस योजना को 2009 के बाद निजी सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए खोल दिया था। इस योजना के तहत निजी कंपनियों में काम करने वाला कोई भी कर्मचारी जिसकी उम्र 18 से 60 साल के बीच है इस योजना का लाभ उठा सकता है।
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सरकार नए साल से पहले ही सरकारी कर्मचारियों को तोहफा दे दिया है। सरकार ने नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) में अपना योगदान 10 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया है। इसमें कर्मचारियों का न्यूनतम योगदान 10 फीसदी बरकरार रहेगा।
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क्या है नेशनल पेंशन स्कीम
नेशनल पेंशन स्कीम या एनपीएस एक रिटायरमेंट सेविंग अकाउंट है, जिसे भारत सरकार ने 1 जनवरी 2004 को लांच किया था। 2004 में इस तारीख के बाद ज्वाइन करने वाले सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए इस योजना में निवेश करना अनिवार्य कर दिया गया था। यही नहीं सरकार ने इस योजना को 2009 के बाद निजी सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए खोल दिया था। इस योजना के तहत निजी कंपनियों में काम करने वाला कोई भी कर्मचारी जिसकी उम्र 18 से 60 साल के बीच है इस योजना का लाभ उठा सकता है।
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एनपीएस के लिए निजी बैंकों को बनाया पीओपी
सरकार एनपीएस का फायदा अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे इसके लिए देशभर में पॉइंट ऑफ प्रजेंस बनाए हैं। यही नहीं इस एकाउंट को देश के लगभग सभी सरकारी और निजी बैंकों को पीओपी बनाया है, इसलिए किसी भी बैंक की नजदीकी ब्रांच में अकाउंट खुलवाया जा सकता है। इस योजना में दो तरह के अकाउंट होते हैं। टियर एक और दो और दोनों ही एकाउंट के लिए ग्राहकों को 12 अंकों का परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर दिया जाता है।
क्या है टियर एक और दो एकाउंट
टियर 1 अकाउंट
इस अकाउंट को खुलवाना अनिवार्य है। इस अकाउंट में जो भी रकम जमा की जाती है उसे रिटायरमेंट से पहले नहीं निकाला जा सकता है। यह सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है।
टियर 2 अकाउंट
इस अकाउंट में कोई भी अपना पैसा जमा कर सकता है यहां, कोई भी टियर एक अकाउंट होल्डर अपनी इच्छा से इसमें पैसा जमा कर सकता है और निकाल भी सकता है। इससे पैसे निकालने का एक समय पहले से ही निर्धारित है। यह सभी के लिए अनिवार्य नहीं है।
सरकार एनपीएस का फायदा अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे इसके लिए देशभर में पॉइंट ऑफ प्रजेंस बनाए हैं। यही नहीं इस एकाउंट को देश के लगभग सभी सरकारी और निजी बैंकों को पीओपी बनाया है, इसलिए किसी भी बैंक की नजदीकी ब्रांच में अकाउंट खुलवाया जा सकता है। इस योजना में दो तरह के अकाउंट होते हैं। टियर एक और दो और दोनों ही एकाउंट के लिए ग्राहकों को 12 अंकों का परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर दिया जाता है।
क्या है टियर एक और दो एकाउंट
टियर 1 अकाउंट
इस अकाउंट को खुलवाना अनिवार्य है। इस अकाउंट में जो भी रकम जमा की जाती है उसे रिटायरमेंट से पहले नहीं निकाला जा सकता है। यह सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है।
टियर 2 अकाउंट
इस अकाउंट में कोई भी अपना पैसा जमा कर सकता है यहां, कोई भी टियर एक अकाउंट होल्डर अपनी इच्छा से इसमें पैसा जमा कर सकता है और निकाल भी सकता है। इससे पैसे निकालने का एक समय पहले से ही निर्धारित है। यह सभी के लिए अनिवार्य नहीं है।
कितने पैसे से खुलवा सकते हैं अकाउंट
अकाउंट खुलवाते वक्त टियर एक अकाउंट में कम-से-कम 500 रुपये और टियर 2 में कम-से-कम 1000 रुपये जमा कराने होते हैं इसमें अधिकतम रकम की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। इसी तरह टियर एक अकाउंट में पूरे साल में कम से कम 6000 रुपये जमा कराना जरूरी होता है जबिक टियर 2 अकाउंट में 2000 रुपये।
आपके फंड को मैनेज करते हैं फंड मैनेजर
एनपीएस फंड में जो भी पैसा जमा होता है उस फंड को मैनेज करने के लिए फंड मैनेजर नियुक्त किया जाता है। यह ठीक वैसे की काम करता है जैसे प्राइवेट बीमा कंपनियां अपने ग्राहकों के लिए काम करती हैं। इनमें प्रमुख फंड मैनेजर हैं, आईसीआईआई प्रू पेंशन फंड, एलआईसी पेंशन फंड, एसबीआई पेंशन फंड और रिलायंस कैपिटल पेंशन फंड। इस फंड की सबसे खास बात यह कि आप अपना फंड मैनेजर अपनी इच्छा से चुन सकते हैं और उसे बदल भी सकते हैं।
इनकम टैक्स में मिलता है फायदा
एनपीएस पहले तो सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाई गई अनिवार्य योजना थी इसलिए आज भी इस योजना के अंतर्गत सरकारी कर्मचारी इसमें कितनी भी राशि जमा कर सकते हैं। लेकिन इस योजना के अंतर्गत जमा राशि में सिर्फ 10फीसदी पर ही टैक्स का फायदा मिलता है। अगर कोई निजी सेक्टर में काम करने वाला व्यक्ति एनपीएस का फायदा लेना चाहता है तो वह रकम तो कितनी भी जमा कर सकते हैं, लेकिन टैक्स फायदा कुल आय के 10 फीसदी पर ही मिलेगा। कुल आय का मतलब है, वर्ष में सभी स्रोतों से होने वाली कुल आमदनी 10 फीसदी रकम पर एक और लिमिट है। इस रकम को
फंड मैनेजर यहां करते हैं निवेश-
1. ई क्लास : हाई रिटर्न, हाई रिस्क। इसमें रकम इक्विटी में लगाई जाती है।
2. सी क्लास : इसमें पैसा फिक्स्ड इनकम देने वाले इंस्ट्रूमेंट में लगता है।
3. जी क्लास : मीडियम रिस्क, मीडियम रिटर्न। इसमें रकम गवर्नमेंट सिक्युरिटी जैसे जीओआई बॉन्ड और राज्य सरकारों के बॉन्ड में लगाया जाता है।
इसमें एक्टिव चॉयस की मदद से आप खुद तय कर सकते हैं कि आपका कितना पैसा किस क्लास में लगाना चाहते हैं।
अकाउंट खुलवाते वक्त टियर एक अकाउंट में कम-से-कम 500 रुपये और टियर 2 में कम-से-कम 1000 रुपये जमा कराने होते हैं इसमें अधिकतम रकम की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। इसी तरह टियर एक अकाउंट में पूरे साल में कम से कम 6000 रुपये जमा कराना जरूरी होता है जबिक टियर 2 अकाउंट में 2000 रुपये।
आपके फंड को मैनेज करते हैं फंड मैनेजर
एनपीएस फंड में जो भी पैसा जमा होता है उस फंड को मैनेज करने के लिए फंड मैनेजर नियुक्त किया जाता है। यह ठीक वैसे की काम करता है जैसे प्राइवेट बीमा कंपनियां अपने ग्राहकों के लिए काम करती हैं। इनमें प्रमुख फंड मैनेजर हैं, आईसीआईआई प्रू पेंशन फंड, एलआईसी पेंशन फंड, एसबीआई पेंशन फंड और रिलायंस कैपिटल पेंशन फंड। इस फंड की सबसे खास बात यह कि आप अपना फंड मैनेजर अपनी इच्छा से चुन सकते हैं और उसे बदल भी सकते हैं।
इनकम टैक्स में मिलता है फायदा
एनपीएस पहले तो सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाई गई अनिवार्य योजना थी इसलिए आज भी इस योजना के अंतर्गत सरकारी कर्मचारी इसमें कितनी भी राशि जमा कर सकते हैं। लेकिन इस योजना के अंतर्गत जमा राशि में सिर्फ 10फीसदी पर ही टैक्स का फायदा मिलता है। अगर कोई निजी सेक्टर में काम करने वाला व्यक्ति एनपीएस का फायदा लेना चाहता है तो वह रकम तो कितनी भी जमा कर सकते हैं, लेकिन टैक्स फायदा कुल आय के 10 फीसदी पर ही मिलेगा। कुल आय का मतलब है, वर्ष में सभी स्रोतों से होने वाली कुल आमदनी 10 फीसदी रकम पर एक और लिमिट है। इस रकम को
फंड मैनेजर यहां करते हैं निवेश-
1. ई क्लास : हाई रिटर्न, हाई रिस्क। इसमें रकम इक्विटी में लगाई जाती है।
2. सी क्लास : इसमें पैसा फिक्स्ड इनकम देने वाले इंस्ट्रूमेंट में लगता है।
3. जी क्लास : मीडियम रिस्क, मीडियम रिटर्न। इसमें रकम गवर्नमेंट सिक्युरिटी जैसे जीओआई बॉन्ड और राज्य सरकारों के बॉन्ड में लगाया जाता है।
इसमें एक्टिव चॉयस की मदद से आप खुद तय कर सकते हैं कि आपका कितना पैसा किस क्लास में लगाना चाहते हैं।