देश में 61 फीसदी की दर से बढ़ रही है डिजिटल लेनदेन की संख्या
केंद्र सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। नवंबर 2016 में देश में नोटबंदी हुई थी। लेकिन उसके बाद भी लोगों में कैश के बजाय डिजिटल लेनदेन प्रचालन में लाने की कोशिश ज्यादा कामयाब नहीं हो पाई है।
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डिजिटल लेनदेन की संख्या 61 फीसदी बढ़ी है। जबकि मूल्य के हिसाब से यह 19 फीसदी की दर से आगे बढ़ी है। लेकिन इसके बावजूद डिजिटल लेनदेन नकदी के चलन को कम नहीं कर पाया है।
आरबीआई के आंतरिक अध्ययन से सामने आई ये बात
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक आंतरिक अध्ययन से सामने आया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में नकदी का चलन नोटबंदी से पूर्व के वित्त वर्ष के आंकड़े 12.1 के करीब पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार, नोटबंदी के वक्त यानी वित्त वर्ष 2016-17 में नकदी का इस्तेमाल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का सिर्फ 8.7 फीसदी था।
वहीं वित्त वर्ष 2018-19 में यह आंकड़ा बढ़कर 11.2 फीसदी हो गया है, जो कि नोटबंदी से पहले वित्त वर्ष यानी साल 2015-16 के आंकड़े से सिर्फ 0.9 फीसदी ही कम है। यानी जीडीपी में इतना ज्यादा कैश का चलन होना लोगों में नकद के प्रति लगाव बताता है।
चीन में होता है सबसे ज्यादा नोट का इस्तेमाल
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अभी नकद ही राजा है। लेकिन डिजिटल करेंसी के पक्ष में भी लोगों में सकारात्मक बदलाव देखा गया है। बता दें कि विश्व में सबसे ज्यादा नोट का इस्तेमाल चीन में होता है और दूसरे स्थान पर भारत है। भारत में जीडीपी का 17 फीसदी नकद निकासी है, दो स्थिर है। हालांकि, नकद निकासी की मात्रा में नौ फीसदी और वैल्यू में 10 फीसदी के हिसाब से वार्षिक इजाफा हो रहा है।
इस संदर्भ में केयर रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा है कि लोगों ने नकदी इकट्ठा करने की आदत अपना ली है। नकदी के रूप में ही लोग आभूषण की खरीदारी करते हैं। वहीं फोनपे के प्रवक्ता ने कहा है कि डिजिटल लेनदेन में तेजी से इजाफा हो रहा है। हम 300 शहरों में 20 करोड़ की ग्राहकों की संख्या पार कर चुके हैं। टीयर 2 और 3 शहरों में 69 फीसदी से अधिक की वृद्धि है।