फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Banking Beema ›   corporates written off 1 lakh crore rupees bad loans

बैंकों ने माफ किया कॉरपोरेट जगत का 1 लाख करोड़ का लोन

Tue, 17 Nov 2015 05:01 PM IST
Updated Tue, 17 Nov 2015 05:01 PM IST
विज्ञापन
corporates written off 1 lakh crore rupees bad loans

रिजर्व बैंक की तरफ से कारोबार जगत के एनपीए को लेकर ऐसे आंकड़े जारी किए गए हैं, जो किसी को भी चौंकाने के लिए काफी हैं। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर केसी चक्रबर्ती ने बैंकों की होने वाली सालाना कॉन्फ्रेंस में बताया कि पिछले 13 सालों में बैंकों ने कॉरपोरेट को दिया करीब 1 लाख करोड़ रुपए का लोन माफ किया है।

विज्ञापन


यहां पर यह आंकड़ा और भी चौंकाना वाला इसलिए है, क्योंकि 2008 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम किसानों का जितना लोन माफ किया था, कॉरपोरेट का ये लोन उससे कहीं ज्यादा है।
विज्ञापन


2008 में सरकार की तरफ से किसानों का करीब 60 हजार करोड़ रुपए का लोन (एनपीए) माफ किया गया था। वहीं दूसरी ओर, पिछले 13 सालों में बैंकों की तरफ से कॉरपोरेट का 1 लाख करोड़ रुपए का लोन (एनपीए) माफ कर दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


आपको बता दें कि यहां एनपीए से तात्पर्य उन लोन या कर्जों से है, जो कर्ज लेने वाला व्यक्ति चुका नहीं पाता है। इस तरह के कर्जों को एनपीए या बैड लोन कहा जाता है।

टेक्निकल राइट ऑफ से नुकसान

corporates written off 1 lakh crore rupees bad loans

चक्रबर्ती ने कहा कि बैंक अपने एनपीए को कम करने के लिए टेक्निकल राइट ऑफ का सहारा लेते हैं, जिसकी वजह से एनपीए और अधिक बढ़ रहा है। आपको बता दें कि टेक्निकल राइट ऑफ वह प्रक्रिया है जिसके जरिए बैंक अपने अकाउंट में उन कर्जों को शामिल नहीं करते हैं, जो एनपीए में जा चुके होते हैं।

ऐसा करने से बैंक अपने अकाउंट में यह दिखा सकते हैं कि उन पर कोई भी एनपीए नहीं है। इस नुकसान की भरपाई बैंक के अकाउंट्स में बैंक के फायदे से की जाती है। वहीं दूसरी ओर, ऐसा करने से बैंकों को टैक्स में कुछ फायदा मिलता है।

चक्रबर्ती ने एनपीए बढ़ने के एक बड़ा कारण लोन रीस्ट्रक्चरिंग को भी बताया। लोन रीस्ट्रक्चरिंग में कर्ज अदा करने वाले व्यक्ति या कंपनी को और अधिक वक्त दिया जाता है। इस स्थिति में वह व्यक्ति बिना डिफॉल्टर कहलाए ही अपने कर्ज का भुगतान करता रहता है।

निपटने का ये है तरीका

corporates written off 1 lakh crore rupees bad loans

चक्रबर्ती ने कहा कि बैंकों को टेक्निकल राइट ऑफ और लोन रीस्ट्रक्चरिंग जैसे प्रक्रियाओं को छोड़ना होगा, तभी एनपीए के झंझट से मुक्ति मिल सकती है।

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार बैंकों ने 2007 से 2013 के बीच में कुल एनपीए में 4,94,836 करोड़ रुपए का बैड लोन या एनपीए और जोड़ा। वहीं इस पूरे समय में बैंकों ने 3,50,332 करोड़ रुपए तक एनपीए कम किया।

ऐसा इसलिए हो सका क्योंकि इस पूरे समय में बैंकों ने 1,41,295 करोड़ रुपए का एनपीए टेक्निकल राइट ऑफ किया और करीब 90,887 करोड़ के लोन को रीस्ट्रक्चर किया। साथ ही 1,18,149 करोड़ रुपए का लोन डिफॉल्टर्स से रिकवर किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Budget 2022 से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed