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मुख्य आर्थिक सलाहकार की नसीहत : बैंक दोस्ती में न बांटे कर्ज, यही है वित्तीय क्षेत्र की बेहतरी का मंत्र

Tue, 09 Mar 2021 02:56 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Tue, 09 Mar 2021 02:56 PM IST
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chief Economic Advisor Dr KV Subramanian on bank credit and finance sector
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) केवी सुब्रमणियन - फोटो : ANI

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) केवी सुब्रमणियन ने मंगलवार को वित्तीय संस्थानों को नसीहत देते हुए कहा कि वह यारी-दोस्ती में कर्ज बांटने से बचें और कर्ज देते हुए उच्च गुणवत्ता मानकों पर ध्यान दें ताकि देश को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिल सके। उन्होंने माना कि 1990 के शुरुआती वर्षों में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र को कमजोर गुणवत्ता के कर्ज देने की समस्या से जूझना पड़ा। खासतौर से बड़ी राशि के कर्ज उच्च गुणवत्ता मानकों का पालन किए बिना दिए गए। ये कर्ज पूंजीवादी मित्रों को दिए गए जिससे कि बैंकिंग क्षेत्र में समस्या बढ़ गई।

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फिक्की द्वारा आयोजित कार्यक्रम को किया संबोधित
वाणिज्य एवं उद्योग मंडल फिक्की द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि, 'जब कभी वित्तीय क्षेत्र ऐसे किसी खास व्यक्ति को कर्ज देने का फैसला करता है जो कि कर्ज देने योग्य नहीं है लेकिन आपसे अधिक जुड़ा हुआ है, तो इसका सीधा मतलब है कि पूंजी उपलब्ध नहीं कराई जा रही। जब पूंजी अधिक पात्र कर्जदार को नहीं जाती है तो उस अवसर की एक लागत वहन करनी पड़ती है।'
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उन्होंने कहा कि वत्तीय क्षेत्र की यह ड्यूटी है कि अर्थव्यवस्था में पूंजी का उचित आवंटन हो। यह देखने की बात है कि बैंकिंग क्षेत्र में फंसे कर्ज की समस्या की बड़ी वजह यह रही कि बैंकों ने अवसंरचना क्षेत्र को अधिक कर्ज दिया। इस क्षेत्र में कई बातों को लेकर समस्या खड़ी हो रही थी।

वित्तीय क्षेत्र की बेहतरी का यही एकमात्र मंत्र- सुब्रमणियन 
उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र की बेहतरी की वकालत करते हुए कहा, 'मेरा मानना है कि यह अब काफी महत्वपूर्ण है कि वित्तीय क्षेत्र ने उच्च गुणवत्ता मानकों पर कर्ज देने की जिम्मेदारी उठाई है। खासतौर से ढांचागत परियोजनाओं के मामले में वह इसका ध्यान रख रहा है और घनिष्ठ मित्रों को कर्ज देने से बच रहा है। मेरा मानना है कि वित्तीय क्षेत्र की बेहतरी का यही एकमात्र मंत्र है।'

सुब्रमणियन ने वित्तीय क्षेत्र में अच्छी गुणवत्ता का कर्ज दिए जाने को सुनिश्चित करने के वास्ते कार्पोरेट गवर्नेस को मजबूत बनाने का भी सुझाव दिया। इसके साथ ही उन्होंने उच्च गुणवत्ता के कर्ज वितरण को वरिष्ठ प्रबंधकों के प्रोत्साहन के साथ जोड़े जाने का भी सुझाव दिया। सुब्रमणियन ने कहा कि विकास वित्तीय संस्थान ढांचागत परियोजनाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि ऐसी परियोजनाओं के लिए खास तरह की विशेषज्ञता की जरूरत होती है।


कार्यक्रम के दौरान दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता बोर्ड के चेयरमैन एम एस साहू ने कहा की दिवाला प्रक्रिया के तहत दर्ज 4,000 कंपनियों में से 2,000 की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उनहोंने कहा कि खराब फंसी संपत्तियों का परिसमापन करने के बजाय उनके समाधान से अधिक मूल्य प्राप्त हो रहा है। कुछ कंपनियों के मामले में तो यह उनके परिसमापन मूल्य की तुलना में 300 फीसदी तक अधिक प्राप्त हुआ है।

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