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20 तारीख तक निपटा लें बैंकिंग काम, 21 से पांच दिन के लिए बंद रहेंगे बैंक

Mon, 17 Dec 2018 11:06 AM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Mon, 17 Dec 2018 11:06 AM IST
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banks strike for two days and holiday during christmas festival

क्रिसमस के त्योहार के वक्त देश के ज्यादातर सरकारी बैंक पांच दिन बंद रहेंगे। बैंकों में इस बीच दो दिन हड़ताल है और बाकी तीन दिन बैंकों में छुट्टी रहेगी। इसलिए इस दौरान क्रिसमस की छुट्टियों के बीच कैश की मारा मारी हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि बैंक पांच दिन बंद रहेंगे। हालांकि दोनों दिन अलग-अलग बैंक यूनियनों ने हड़ताल का आह्वान किया है। इससे लोगों को काफी परेशानी हो सकती है। 

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इन दो दिन रहेगी हड़ताल

महीने के आखिर में एक हड़ताल क्रिसमस से पहले और दूसरी इसके अगले दिन होगी। पहली हड़ताल 21 दिसंबर और दूसरी 26 दिसंबर को होगी। पहली हड़ताल का आयोजन ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कंफेडेरेशन करने जा रही है। 
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ऐसे रहेंगे पांच दिन बंद

21 तारीख को शुक्रवार है। 22 तारीख को महीने का चौथा शनिवार है। 23 तारीख को रविवार के कारण बैंक बंद रहेंगे। सोमवार 24 दिसंबर को बैंक खुलेंगे। फिर 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी सभी बैंकों में रहेगी। इसके बाद बुधवार को भी बैंक में हड़ताल के कारण छुट्टी रहेगी। 
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केंद्र सरकार द्वारा तीन बड़े सरकारी बैंकों का विलय करने का फैसला और बैंक कर्मियों के वेतनमान में केवल 8 फीसदी वृद्धि करने के विरोध में बैंक यूनियन ने 21 और 26 दिसंबर को हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के अश्विनी राणा ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को मान नहीं रही है, जिसकी वजह से यह फैसला लिया है। 

25 फीसदी की मांग

banks strike for two days and holiday during christmas festival

राणा ने amarujala.com से बात करते हुए कहा कि बैंक यूनियन 25 फीसदी वेतन वृद्धि की मांग सरकार से कर रहे हैं। सरकार की ज्यादातर योजनाओं को बैंक द्वारा ही लागू किया जाता है। जहां केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में सरकार ने अच्छा इजाफा किया है, वहीं बैंक कर्मचारियों के वेतनमान में मामूली वृद्धि की गई है। देश भर में करीब 10 लाख सरकारी बैंक कर्मचारी हैं। 

विलय करना गलत

राणा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक का विलय करना भी गलत निर्णय है। विलय के प्रस्ताव से बैंकों की समस्या सुलझ नहीं सकती। बैंकों की सबसे बड़ी समस्या नॉन परफार्मिंग एसेट (एनपीए) की है।

इन तीनों ही बैंकों में एनपीए का 80 हजार करोड़ रुपया फंसा हुआ है। एकीकरण के बाद एनपीए की रकम वसूलने में काफी परेशानी होगी। एकीकरण के बाद बैंक शाखाओं का विलय किया जाएगा, इससे सभी तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा। विलय से बैंकों की काम करने की क्षमता पर असर नही पड़ेगा, बल्कि इससे आम ग्राहकों की परेशानी और बढ़ जाएगी।

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