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नोटबंदी की वजह से ATM हुए बेमानी, बैंकों और कंपनियों को हो रहा है लॉस

Wed, 16 Aug 2017 12:11 PM IST
amarujala.com- Presented by: अनंत पालीवाल
amarujala.com- Presented by: अनंत पालीवाल Updated Wed, 16 Aug 2017 12:11 PM IST
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atm losing importance as number of cashless transactions see a rise
एटीएम

नोटबंदी और डिजिटाईजेशन की वजह से एटीएम पर होने वाले कैश ट्रांजेक्शन में बड़ी कमी आई है। नोटबंदी के बाद पिछले 6 महीने के आंकड़े इसी की ओर इशारा करते हैं। ऐसे में उन कंपनियों और बैंकों को एटीएम चलाने में काफी घाटा हो रहा है, क्योंकि ट्रांजेक्शन कम होने से इनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है। 

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बैंकों के अलावा 8 कंपनियों के भी लगें हैं एटीएम
बैंकों के अलावा देश में 8 ऐसी कंपनियां हैं, जिनको RBI ने व्हाइट लेबल एटीएम लगाने की अनुमति दी थी। बैंकों ने 2012 से 2015 के बीच पूरे देश में एक लाख के करीब एटीएम लगाए थे, जिसके पास देश भर में एटीएम की कुल संख्या 2 लाख के पार हो गई थी। लेकिन पिछले 6 महीनों में इनकी संख्या में किसी प्रकार का कोई इजाफा नहीं हुआ है। 

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डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजेक्शन में भी आई कमी

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कैशलेस पेमेंट

देश भर में सबसे ज्यादा एटीएम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के लगे हुए हैं। लेकिन नोटबंदी के बाद से इनमें काफी कमी आ गई हैं। जहां नवंबर 2016 से पहले एटीएम पर 75 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए थे, लेकिन उसके बाद यह जुलाई  2017 में यह घटकर 75 करोड़ रह गए। 8 व्हाइट लेबल एटीएम कंपनियों में से केवल तीन कंपनियों ने पूरे देश में कुल 10 हजार एटीएम लगाएं हुए हैं, जिनमें भी किसी प्रकार का कोई इजाफा नहीं हुआ है। इन कंपनियों को भी एटीएम पर घाटा हो रहा है। 

कैशलेस, डिजिटाईजेशन बना बड़ी वजह
नोटबंदी के बाद सरकार का कैशलेस इकोनॉमी पर जोर और ज्यादातर ट्रांजेक्शन मोबाइल वॉलेट, ऐप के जरिए करने पर मिल रही सरकार की पहल का लोगों ने काफी स्वागत किया है। अब लोग छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन पीओएस मशीन या फिर अपने वॉलेट से कर रहे हैं। 

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, पिछले  6 महीने में पीओएस मशीनों की संख्या 15 लाख थी, वो जून 2017 में बढ़कर 27 लाख हो गए हैं। वहीं मोबाइल बैंकिंग से 2012-13  में केवल 5.3 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए थे, जो की 2015-16 में बढ़कर 39 करोड़ के पार हो गए। 

जनधन योजना से बढ़ी डेबिट कार्ड की संख्या
पीएम मोदी द्वारा जनधन योजना को शुरू करने से देश भर में डेबिट कार्ड धारक लोगों की संख्या में इजाफा देखने को मिला, जहां प्रत्येक व्यक्ति को बैंक में अकाउंट और रूपे डेबिट कार्ड दिया गया। इससे डेबिट कार्ड की संख्या 33.1 करोड़ के पार पहुंच गई। बैंक अधिकारियों के मुताबिक आगे आने वाले साल में एटीएम से होने वाले ट्रांजेक्शन काफी कम हो जाएंगे। 

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