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अभी केवल 40 फीसदी एटीएम में मिल रहा कैश, लगी हैं लाइनें
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 30 Dec 2016 03:45 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
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नकदी को लेकर सरकार द्वारा मांगे गए 50 दिनों के बाद भी कैश की किल्लत बनी हुई है। एटीएम और अन्य मशीनों में कैश भरने वाली बड़ी संस्थाओं के अनुसार, 2.2 लाख मशीनों में से सिर्फ 35-40 फीसदी एटीएम ही नकदी दे पा रहे हैं।
बैंकिंग और टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर कंपनी एसआईएस के अधिकारी रामास्वामी वेंकटचलम का कहना है, 'चौबीसों घंटों के लिए जरूरी कैश की मांग के अनुरूप बैंक नकदी नहीं दे पा रहे हैं।'
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, वेंकटरमन का कहना है, 'एसआईएस के 12 हजार एटीएम में से करीब 37 फीसदी ही कैश दे पा रहे हैं। देश के कुल एटीएम के मामलों में भी यह आंकड़ा 35-40 फीसदी के बीच ही है। एटीएम के साइज के हिसाब से सही साइज के करेंसी की उपलब्धता के कारण भी कैश का संकट दिख रहा है।'
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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के फैसले के बाद हुई मु्श्किल को 50 दिन की अवधि के भीतर दूर करने का ऐलान किया था। 50 दिन के बाद भी कई एटीएम बंद हैं, जबकि जिन एटीएम मशीनों में पैसा है उनके सामने लोगों की लंबी कतारें लगी हैं। हालांकि, ये कतारें नोटबंदी के शुरुआती दिनों की तुलना में छोटी हैं। लोगों की शिकायत है कि कई बैंक प्रति व्यक्ति 4,000 रुपये से ज्यााद नहीं दे रहे हैं जबकि आधिकारिक रूप से सप्ताह में यह सीमा 24,000 रुपये है। इस पर बैंकों का कहना है कि उनके पास पर्याप्त नकदी नहीं है।
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बैंकिंग और टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर कंपनी एसआईएस के अधिकारी रामास्वामी वेंकटचलम का कहना है, 'चौबीसों घंटों के लिए जरूरी कैश की मांग के अनुरूप बैंक नकदी नहीं दे पा रहे हैं।'
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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, वेंकटरमन का कहना है, 'एसआईएस के 12 हजार एटीएम में से करीब 37 फीसदी ही कैश दे पा रहे हैं। देश के कुल एटीएम के मामलों में भी यह आंकड़ा 35-40 फीसदी के बीच ही है। एटीएम के साइज के हिसाब से सही साइज के करेंसी की उपलब्धता के कारण भी कैश का संकट दिख रहा है।'
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गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के फैसले के बाद हुई मु्श्किल को 50 दिन की अवधि के भीतर दूर करने का ऐलान किया था। 50 दिन के बाद भी कई एटीएम बंद हैं, जबकि जिन एटीएम मशीनों में पैसा है उनके सामने लोगों की लंबी कतारें लगी हैं। हालांकि, ये कतारें नोटबंदी के शुरुआती दिनों की तुलना में छोटी हैं। लोगों की शिकायत है कि कई बैंक प्रति व्यक्ति 4,000 रुपये से ज्यााद नहीं दे रहे हैं जबकि आधिकारिक रूप से सप्ताह में यह सीमा 24,000 रुपये है। इस पर बैंकों का कहना है कि उनके पास पर्याप्त नकदी नहीं है।