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बैंक धोखाधड़ी: पिछले वित्त वर्ष में 12 सरकारी बैंकों को लगी 40,295 करोड़ की चपत

Mon, 16 May 2022 06:45 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली। 
एजेंसी, नई दिल्ली।  Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 16 May 2022 06:45 AM IST
सार

सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दी गई जानकारी में केंद्रीय बैंक ने कहा कि एक साल के दौरान इन बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों में 20.06 फीसदी की गिरावट आई है।

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40295 crore loss to 12 public sector banks in the last financial year
बैंक धोखाधड़ी - फोटो : pixabay

विस्तार

देश के सरकारी बैंकों को धोखाधड़ी से होने वाले वित्तीय नुकसान में भले ही गिरावट आई है, लेकिन संख्या के लिहाज से ऐसे मामले तेजी से नहीं घट रहे हैं। आरबीआई ने कहा कि 2021-22 में सार्वजनिक क्षेत्र के 12 सरकारी बैंकों (पीएसबी) को धोखाधड़ी से होने वाला पूंजीगत नुकसान 51 फीसदी कम होकर 40,295.25 करोड़ रुपये रह गया है। इससे पिछले वित्त वर्ष यानी 2020-21 में इस बैंकों को धोखाधड़ी से 81,921.54 करोड़ रुपये की चपत लगी थी।

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सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दी गई जानकारी में केंद्रीय बैंक ने कहा कि एक साल के दौरान इन बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों में 20.06 फीसदी की गिरावट आई है। 2020-21 के दौरान बैंक धोखाधड़ी के कुल 9,933 मामले सामने आए थे, जो 2021-22 में घटकर 7,940 रह गए। 
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पीएनबी को सबसे ज्यादा झटका एसबीआई दूसरे स्थान पर
धोखाधड़ी के इन मामलों में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को सबसे ज्यादा 9,528.95 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और 431 मामले सामने आए हैं। एसबीआई 6,932.37 करोड़ रुपये के नुकसान के साथ दूसरे स्थान पर है। इसमें धोखाधड़ी के कुल 4,192 मामले सामने आए हैं।
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क्रिप्टोकरेंसी से अर्थव्यवस्था को खतरा  प्रभावित होगी वित्तीय प्रणाली : आरबीआई
आरबीआई के शीर्ष अधिकारियों ने पूर्व वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा की अगुवाई वाली संसदीय समिति से कहा कि लगभग सभी क्रिप्टोकरेंसी डॉलर पर आधारित हैं। इन्हें विदेशी निजी संस्थान जारी करते हैं। ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी से अर्थव्यवस्था केएक हिस्से का ‘डॉलरीकरण’ हो सकता है। यह न सिर्फ भारत के संप्रभु हितों के खिलाफ होगा बल्कि वित्तीय प्रणाली के लिए खतरा पैदा कर सकता है।


आतंकी फंडिंग में हो सकता है इस्तेमाल  
अधिकारियों ने आगाह किया कि आतंकी फंडिंग, धनशोधन और मादक पदार्थों की तस्करी में भी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जा सकता है। आकर्षक परिसंपत्तियां होने के कारण लोग अपनी मेहनत की कमाई क्रिप्टोकरेंसी में लगा सकते हैं। इससे बैंकिंग प्रणाली पर भी नकारात्मक असर होगा क्योंकि उनके पास देने के लिए संसाधनों की कमी हो जाएगी। अनुमान के मुताबिक, देश में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने वाले लोगों की संख्या 1.5-2 करोड़ है। इन्होंने करीब 5.34 अरब डॉलर का निवेश किया है।

इन 10 बैंकों को भी लगी चपत
बैंक मामले नुकसान

बैंक ऑफ इंडिया 209 5,923.99
बैंक ऑफ बड़ौदा 280 3,989.36
यूनियन बैंक 627 3,939
केनरा बैंक 90 3,230.18
इंडियन बैंक 211 2,038.28
इंडियन ओवरसीज बैंक 312 1,733.80
बैंक ऑफ महाराष्ट्र 72 1,139.36
सेंट्रल बैंक - 773.37
यूको बैंक 114 611.54
पंजाब एंड सिंध बैंक 159 455.04
नोट : नुकसान करोड़ रुपये में है।

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