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हवाई यात्रा के शौकीन लोगों के लिए बुरी खबर, किराया सस्ता होने की सोच रहे हैं तो भूल जाइये
amarujala.com- Presented By: अनंत पालीवाल
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:07 PM IST
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airport
दिवाली के बाद अगर आप हवाई किराया सस्ता होने की सोच रहे हैं, तो इस मुगालते में नहीं रहे। घरेलू एयरलाइंस कंपनियां फेस्टिव सीजन के बाद भी किराये में किसी तरह की कटौती नहीं करेंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि उन पर जीएसटी के चलते 4750 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना है।
देश की तीन बड़ी लिस्टेड एयरलाइंस कंपनियां इंडिगो, जेट एयरवेज और स्पाइसजेट ने कुल मिलाकर इस साल मार्च तक 2479 करोड़ का प्रॉफिट कमाया था। नॉन लिस्टेड कंपनियों में केवल गो एयर ने लाभ कमाया है, जबकि एयर इंडिया, विस्तारा और एयर एशिया इंडिया भी नॉन लिस्टेड कंपनियों में शामिल हैं।
पढे़ं- फेस्टिव सीजन में एयरलाइंस कंपनियों में प्राइस वॉर, Air Asia और इंडिगो दे रहे हैं ये ऑफर
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इंजन की सर्विस पर लगाया है जीएसटी
जीएसटी लागू होने के बाद एयरक्राफ्ट इंजन के बाहर से रिपेयर और सर्विस कराने पर टैक्स काफी बढ़ गया है। भारत में कहीं भी एयरलाइंस के इंजन को रिपेयर करने की शॉप नहीं है, जिसकी वजह से कंपनियों को अपना एयरक्राफ्ट विदेश भेजना पड़ता है। इससे कंपनियों पर 2 हजार करोड़ का हर साल अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इससे कई सारी एयरलाइंस कंपनियों के इंजन कस्टम के पास पड़े हुए हैं।
जीएसटी के चलते ऐसे पड़ेगा बोझ
रिपेयर हुए एयरक्राफ्ट के इंजन को रि-इंपोर्ट करने पर 2000 करोड़, एक राज्य से दूसरे राज्य में एयरक्राफ्ट को ट्रांसफर करने पर 2000 करोड़, एयरक्राफ्ट के बाहर से पार्ट मंगाने पर 500 करोड़, सर्विस करने के लिए दिए पार्ट को इंपोर्ट करने पर 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त जीएसटी हर साल देना होगा।
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देश की तीन बड़ी लिस्टेड एयरलाइंस कंपनियां इंडिगो, जेट एयरवेज और स्पाइसजेट ने कुल मिलाकर इस साल मार्च तक 2479 करोड़ का प्रॉफिट कमाया था। नॉन लिस्टेड कंपनियों में केवल गो एयर ने लाभ कमाया है, जबकि एयर इंडिया, विस्तारा और एयर एशिया इंडिया भी नॉन लिस्टेड कंपनियों में शामिल हैं।
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इंजन की सर्विस पर लगाया है जीएसटी
जीएसटी लागू होने के बाद एयरक्राफ्ट इंजन के बाहर से रिपेयर और सर्विस कराने पर टैक्स काफी बढ़ गया है। भारत में कहीं भी एयरलाइंस के इंजन को रिपेयर करने की शॉप नहीं है, जिसकी वजह से कंपनियों को अपना एयरक्राफ्ट विदेश भेजना पड़ता है। इससे कंपनियों पर 2 हजार करोड़ का हर साल अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इससे कई सारी एयरलाइंस कंपनियों के इंजन कस्टम के पास पड़े हुए हैं।
जीएसटी के चलते ऐसे पड़ेगा बोझ
रिपेयर हुए एयरक्राफ्ट के इंजन को रि-इंपोर्ट करने पर 2000 करोड़, एक राज्य से दूसरे राज्य में एयरक्राफ्ट को ट्रांसफर करने पर 2000 करोड़, एयरक्राफ्ट के बाहर से पार्ट मंगाने पर 500 करोड़, सर्विस करने के लिए दिए पार्ट को इंपोर्ट करने पर 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त जीएसटी हर साल देना होगा।