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बजट इफेक्टः LTCG टैक्स से धड़ाम हुआ बाजार, सेंसेक्स में 840 अंकों की भारी गिरावट

Fri, 02 Feb 2018 05:23 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 02 Feb 2018 05:23 PM IST
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 aam budget 2018 sensex nifty share bazar Indian market 

बजट में घोषित दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर और म्यूचुअल फंडों से आय पर 10 फीसदी टैक्स के कारण शुक्रवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। रही-सही कसर रेटिंग एजेंसी फिच ने यह कहकर पूरी कर दी कि भारत सरकार पर कर्ज का बढ़ता बोझ उसकी रेटिंग में सुधार की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है।

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नतीजतन, सेंसेक्स में 839. 91 अंकों की गिरावट के साथ 35,066.75 अंकों पर जबकि निफ्टी 256 अंकों से ज्यादा का गोता लगाकर 10,760.60 अंकों पर बंद हुआ। 
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शेयर बाजार में कारोबार शुरू होते ही ट्रेडरों और निवेशकों ने लंबे समय के लिए रखे शेयरों को धड़ाधड़ बेचना शुरू कर दिया। ऐसे सभी निवेशक 1 अप्रैल, 2018 से दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर लागू होने से पहले अपनी पोजीशन मजबूत करना चाहेंगे।
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दीर्घलाकि पूंजीगत लाभ कर के अलावा शेयर बाजार पर राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को 3.2 फीसदी से बढ़ाकर 3.5 फीसदी किए जाने का भी असर दिखा। रेटिंग एजेंसी फिच ने इसका हवाला देते हुए कहा है कि घाटा बढ़ने के कारण ही भारत की रेटिंग में सुधार नहीं किया जा रहा है। 

गिरावट का आलम यह रहा कि बांबे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध 2504 शेयरों की कीमतों में कमी दर्ज की गई। सिर्फ 295 स्टॉक ऐसे रहे जिनमें तेजी दर्ज की गई। संवेदी सूचकांक में शामिल 30 शेयरों में से 29 के भाव नीचे रहे। सिर्फ टीसीएस के शेयर 0.34 फीसदी की मामूली तेजी के साथ बंद हुए। सबसे ज्यादा 24 फीसदी की गिरावट पीसी ज्वेलर्स से शेयरों में देखी गई।

फिच ने जारी की चेतावनी

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gdp

अमेरिकी रेटिंग एजेंसी फिच ने चेतावनी दी है कि सरकार पर कर्ज के बोझ के कारण उसकी रेटिंग में सुधार नहीं हो रहा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा बृहस्पतिवार को पेश किए गए आम बजट में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को 3.2 फीसदी से बढ़ाकर 3.5 फीसदी किए जाने का जिक्र करते हुए एजेंसी ने कहा है कि इसे तीन फीसदी पर रखने का लक्ष्य था, जो अब 2020-21 तक हासिल किया जाएगा। इससे पहले 2014 में भी सरकार ने तीन फीसदी के लक्ष्य के एक साल आगे खिसकाया था, जो अब और बढ़ता ही जा रहा है। 

जीडीपी पर 68 फीसदी कर्ज
फिच रेटिंग्स के निदेशक थॉमस रूकमाकर के अनुसार भारत सरकार पर जीडीपी का 68 फीसदी कर्ज चढ़ा हुआ है। अगर राज्यों के राजकोषीय घाटे को शामिल कर लिया जाए तो समेकित घाटा 6.5 फीसदी हो जाएगा, जो अत्यंत उच्च स्तर है।

मालूम हो कि फिच ने पिछले साल मई में भारत की रेटिंग में कोई बदलाव नहीं करते हुए उसे बीबीबी माइनस पर बरकरार रखा था। स्थिर आउटलुक के साथ यह निम्नतम निवेश ग्रेड की रेटिंग है।

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