95 फीसदी घरेलू उपकरण मेड इन इंडिया, 70 फीसदी कलपुर्जों के लिए चीन पर निर्भर है भारत
देश में बिकने वाले 95 फीसदी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स एवं उपकरण का निर्माण घरेलू स्तर पर ही होता है। हालांकि, इनके कलपुर्जों के लिए अब भी हम 25-70 फीसदी चीन पर निर्भर हैं। इसे रातों-रात खत्म करना मुश्किल है। उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स एवं उपकरण निर्माता संघ (सीईएएमए) के अध्यक्ष कमल नंदी ने कहा, चीनी उत्पादों के बहिष्कार के आह्वान से पहले ही चीन में कोरोना फैलने के दौरान आपूर्ति बाधित होने से ‘चीन प्लस वन’ की रणनीति तैयार हो गई थी।
वैकल्पिक स्रोतों की तलाश के रूप में थाईलैंड, वियतनाम और कोरिया जैसे देशों पर विचार हुआ। उन्होंने कहा, एक उद्योग के रूप में (सभी ब्रांड) हमने दो-तीन वर्षों में क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत काम किए हैं। अब हम तैयार उत्पादों की सभी श्रेणियों में अच्छी स्थिति में हैं।
नंदी के मुताबिक, जब तक हम कलपुर्जों के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित नहीं करते हैं, तब तक चीन पर निर्भरता कम करना संभव नहीं है। पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में दो साल लगेंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (पीएमपी) जैसी योजनाओं के साथ विनिर्माण को प्रोत्साहित कर रही है।
केवल उत्पादकता वृद्धि के माध्यम से खुद को बदल सकता है भारत
भारत सरकार के राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की बैठक में विशेषज्ञों का कहना है कि भारत केवल उत्पादकता वृद्धि के माध्यम से ही खुद को बदल सकता है। इस दौरान कृषि और लोजिस्टिक्स क्षेत्रों में एनपीसी द्वारा विशिष्ट कार्ययोजना तैयार करना, शिक्षा और उद्योग जगत का आपसी समन्वय, एमएसएमई का समर्थन करने के लिए विशिष्ट उत्पादों के वित्त पोषण इत्यादि पर सुझाव भी दिए गए।
सोमवार को हुई इस 49वीं संचालन परिषद की ऑनलाइन बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा किसी भी संस्थान के परिवर्तन में उत्पादकता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। बंकिम चंद्र चटर्जी की 182 वीं जयंती और एमएसएमई उद्यम दिवस का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, जैसा हम बार-बार करते हैं, हम वैसे ही हो जाते हैं।
गोयल ने सुझाव दिया कि प्रौद्योगिकी और डिजिटल अर्थव्यवस्था भविष्य में न केवल व्यावसायिक उद्यमों को बदलने बल्कि पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस दौरान एनपीसी के महानिदेशक अरुण कुमार झा ने बताया कि बैठक में लगभग 180 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें सरकारी अधिकारी, उद्योग संघ, श्रमिक संघ सहित तमाम विशेषज्ञ मौजूद थे।