सरकार ने बजट पेश होने से एक दिन पहले वित्त वर्ष 2018-19 के लिए विकास दर 6.8 फीसदी से घटाकर 6.1 फीसदी कर दी है। संशोधित अनुमानों में खनन, विनिर्माण और कृषि क्षेत्रों की वृद्धि में गिरावट के कारण विकास दर घटाई गई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के शुक्रवार को जारी संशोधित आंकड़ों के मुताबिक, वास्तविक जीडीपी या स्थिर कीमत (आधार वर्ष 2011-12) पर जीडीपी 2018-19 और 2017-18 में क्रमश: 139.81 लाख करोड़ और 131.75 लाख करोड़ रुपये रहा था।
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वो 11 खास बातें जो बढ़ाएंगी बजट और अर्थव्यवस्था से जुड़ी आपकी समझ
Sat, 01 Feb 2020 03:07 AM IST
योगेश साहू
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: योगेश साहू
Updated Sat, 01 Feb 2020 03:07 AM IST
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भारतीय बजट का रोचक इतिहास
- फोटो : Amar Ujala
- पूंजी निर्माण, कारोबार अनुकूल नीतियों को प्रोत्साहन, अर्थव्यवस्था में भरोसा बढ़ाना रहा केंद्र में।
- बाजार में सरकार के अत्यधिक दखल से आर्थिक स्वतंत्रता पर बढ़ता है दबाव।
भारतीय बजट का रोचक इतिहास
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- वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही में एफडीआई प्रवाह, मांग, जीडीपी राजस्व में बढ़ोतरी रहेगी अहम।
- अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए सुधार तेज करे सरकार।
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भारतीय बजट का रोचक इतिहास
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- 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के लिए सही तरीके से पूंजी निर्माण होगा अहम।
- 2017-18 तक छह साल में कुल नौकरियों में संगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी 17.9 फीसदी से बढ़कर 22.8 फीसदी हो गई।
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- छह साल में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पैदा हुए कुल 2.62 करोड़ नए रोजगार। महिलाओं के नियमित रोजगार में 8% बढ़ोतरी।
- कर्जमाफी से बाधित हुई कर्ज देने की व्यवस्था, किसानों को औपचारिक कर्ज दिए जाने में आई कमी।