क्या कोई अंधा होने की भी ख्वाहिश करता है? इस महिला ने की और गंवा दी आंखें
नॉर्थ कैरोलिना की 30 वर्षीय महिला ज्वैल शपिंग ने अपनी एक अजीब ख्वाहिश के चलते खुद को अंधा कर लिया।
एलीट डेली में प्रकाशित खबर के मुताबिक इस काम में शपिंग की मदद एक मनोचिकित्सक ने की। उसने शपिंग की आखों में ड्रेन क्लीनर डाल दिया। जिसकी वजह से शपिंग की एक आंख पूरी तरह डैमेज हो गई और दूसरी आंख में मोतियाबिंद हो गया।
शपिंग के मुताबिक उसे बचपन से ही दृष्टिहीन होना पसंद था। इसलिए उसकी ये ख्वाहिश थी कि वो अंधी हो जाए। अंधा होने के लिए उसने कई कोशिशें कीं लेकिन असफल हुई। कई दफा वो घंटों सूरज की ओर निहारती रहती थी। कभी-कभी अंधेरे में चहलकदमी करती थी तो कभी अंधे लोगों वाले चश्मे पहनती थी।
लेकिन जब एक मनोचिकित्सक ने उसकी आंखों में ड्रेन क्लीनर का इस्तेमाल किया तो उसकी बचपन की ख्वाहिश पूरी हो गई। अच्छी-खासी शपिंग अंधी हो गई।
बॉडी इंटेग्रिटी आइडेंटिटी डिसऑर्डर के चलते पाली अंधा होने की इच्छा
शपिंग के मुताबिक जब वह 20 साल की हुई तब तक उसने ब्रेल लिपि पढ़ना भी सीख लिया था। ब्रेल लिपि में भाषा को उभरा हुई लिखा जाता है, जिसको छूकर दृष्टिहीन लोह पढ़ते हैं।
शपिंग के मुताबिक उसे अंधे होने की इच्छा तो थी लेकिन जब वो 20 साल की हुई तो उसकी अंधे होने की ईच्छा में लगातार इजाफा होता गया।
दरअसल, शपिंग को बॉडी इंटेग्रिटी आइडेंटिटी डिसऑर्डर है। ये एक मानसिक बीमारी है। इस अवस्था में मरीज को ये आभास होता है कि उसके शरीर का कोई एक अंग विकलांग है।
आंखों में डाला ड्रेन क्लीनर और हो गई अंधी
शपिंग ने अपनी ख्वाहिश पूरी करने के लिए एक डॉक्टर को भी ढूंढ़ लिया जो उसकी मदद कर सकता था। साल 2006 में इस मनोचिकित्सक ने शपिंग की आंखों में कुछ आईड्रॉप्स और ड्रेन क्लीनर का इस्तेमाल किया, जिसकी वजह से उसको आंखें गंवानी पड़ गईं।
लेकिन शपिंग की मानें तो उसे अपनी आंखें गंवा देने का कोई मलाल नहीं है। क्योंकि वो चाहती थी के वो अंधी हो जाए। शपिंग कहती है कि अगर कोई ये कहे कि उसने स्वार्थवश ऐसा काम किया है तो ये गलत होगा, क्योंकि ये उसकी बीमारी की जरूरत थीं। बीमारी की जरूरत के हिसाब काम को अंजाम न देना स्वार्थ हो सकता है।
लेकिन शपिंग उन लोगों को सलाह देती है कि जो लोग उसकी तरह इस डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं, उन्हें किसी अच्छे चिकित्सक के पास इलाज के लिए जाना चाहिए, न कि उसकी तरह खुद को नुकसान पहुंचाना चाहिए। उस मनोचिकित्सक के बारे में पता नहीं चल सका है जिसने शपिंग को अंधा करने में उसकी मदद की थी।