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पश्चिम बंगाल: सर्दी हो या गर्मी, 20 साल से रोजाना 14 घंटे पानी में रहती है एक महिला
Sat, 22 Dec 2018 09:38 AM IST
अजय सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पश्चिम बंगाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पश्चिम बंगाल
Published by: अजय सिंह
Updated Sat, 22 Dec 2018 09:38 AM IST
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lady in pond (Demo pic)
- फोटो : social media
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कहते हैं कि जल ही जीवन है। नहाने से लेकर खाना बनाने तक हर चीज के लिए हमें पानी की जरूरत पड़ती है। लेकिन पश्चिम बंगाल के कटवा में एक महिला आंख खुलते ही पहले तालाब का रूख करती है। वह भी नहाने के लिए नहीं बल्कि अपनी बीमारी की वजह से ऐसा करने को मजबूर है।
कटवा जिले के गोवई गांव में रहने वाली एक महिला की उम्र करीब 60 साल है। महिला की मानें तो वह बीस साल से रोज सुबह उठते ही तालाब की ओर निकल पड़ती है। हर रोज बारह से 14 घंटे तालाब में ही रहती है और फिर शाम ढलते ही घर लौट आती है। महिला लगभग अपना पूरा दिन गले तक पानी में रहकर ही बिताती है। वह वर्ष 1998 से ऐसा कर रही हैं।
बीमारी से लड़ने को खोजा उपाय
घर वालों के मुताबिक महिला एक बिमारी की वजह से ऐसा करती है। उसकी त्वचा में काफी जलन होती है इसलिए वह अपना दिन का ज्यादातर हिस्सा तालाब में ही गुजारती है। आलम ये है कि वह खाना भी तालाब में ही खाती है।
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महिला के बेटे का कहना है कि 20 साल पहले मम्मी की तबीयत खराब होने के कारण धूप में आते ही उनकी त्वचा जलने लगती थी और पानी में राहत मिल जाती थी। इस बीमारी की वजह से ही उन्होंने अपनी जिंदगी जीने का ये रास्ता खोज लिया और तालाब ही उनका अस्थाई आशियाना बन गया।
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कटवा जिले के गोवई गांव में रहने वाली एक महिला की उम्र करीब 60 साल है। महिला की मानें तो वह बीस साल से रोज सुबह उठते ही तालाब की ओर निकल पड़ती है। हर रोज बारह से 14 घंटे तालाब में ही रहती है और फिर शाम ढलते ही घर लौट आती है। महिला लगभग अपना पूरा दिन गले तक पानी में रहकर ही बिताती है। वह वर्ष 1998 से ऐसा कर रही हैं।
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बीमारी से लड़ने को खोजा उपाय
घर वालों के मुताबिक महिला एक बिमारी की वजह से ऐसा करती है। उसकी त्वचा में काफी जलन होती है इसलिए वह अपना दिन का ज्यादातर हिस्सा तालाब में ही गुजारती है। आलम ये है कि वह खाना भी तालाब में ही खाती है।
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महिला के बेटे का कहना है कि 20 साल पहले मम्मी की तबीयत खराब होने के कारण धूप में आते ही उनकी त्वचा जलने लगती थी और पानी में राहत मिल जाती थी। इस बीमारी की वजह से ही उन्होंने अपनी जिंदगी जीने का ये रास्ता खोज लिया और तालाब ही उनका अस्थाई आशियाना बन गया।