ये कुत्ते करते हैं बाघ का शिकार, पलभर में ले सकते हैं किसी की भी जान
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एक तरफ जहां कुत्ते सबसे वफादार माने जाते हैं और कुत्तों का इस्तेमाल पुलिस भी खुफिया जानकारी या तहकीकात करने में करती है। वहीं आपको हम बता रहे हैं कुछ खास नस्ल के कुत्तों के बारे में जो बाघ का शिकार करते हैं। साथ ही कुछ ऐसे देश भी हैं जहां कुछ खूंखार कुत्ते पालने पर बैन है।
महाराष्ट्र का यवतमाल जिला और इस जिले का पांढरकावड़ा इलाका। ये क्षेत्र इन दिनों एक बाघिन (मादा टाइगर) की वजह से परेशान है। इसका नाम है टी1, जो बीते कई दिनों से इस इलाके के लोगों और जानवरों के लिए मौत बनकर घूम रही है।
हैरानी की बात है कि पिछले कई दिनों से वन विभाग इस बाघिन को पकड़ने के लिए दिन-रात एक किए हुए है, लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही। फॉरेस्ट रेंजर गश्त लगा रहे हैं, बंदूकों के साये में पहरेदारी चल रही है, लेकिन बाघिन चकमा दे रही है।
प्रशासन ने अपनी कोशिशों के सिलसिले में सोमवार को एक और कड़ी जोड़ी है। इस बाघिन के शिकार के लिए केन कोरसो प्रजाति के दो कुत्तों को लगाया गया है। ये कुत्ते शिकारी माने जाते हैं। ऐसा एक कुत्ता छह लाख रुपए का आता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक ये दोनों कुत्ते हैदराबाद के शार्पशूटर नवाब शफत अली खान के हैं, जो उनके पैलेस के बाड़े में रहते हैं।
कुत्ते क्यों उतारे मैदान में?
प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (वाइल्डलाइफ) ए के मिश्रा ने बताया कि काफी विचार-विमर्श के बाद केन कोरसो कुत्तों को फील्ड में लगाया गया है। गोल्फर और डॉग ट्रेनर ज्योति रंधावा इन कुत्तों को संभाल रहे हैं। नवाब के बेटे असगर समेत कुछ और लोग भी इस ऑपरेशन में शामिल हैं।
अधिकारियों का कहना है कि बाघिन दो घोड़ों को मार चुकी है, लेकिन वो 'चारे' के करीब नहीं गई। इसके अलावा कैमरा ट्रैप में भी उसकी तस्वीरें नहीं आ रहीं। उसे बेहोश करने के लिए पहले बाघिन की लोकेशन का पता करना जरूरी है और कुत्ते उसे खोज निकालने में काफी मदद दे सकते हैं।
लेकिन वो कुत्ता कौन-सा है, जिसे बाघिन या बाघ के सामने उतारा जा रहा है। क्या कुत्तों की सारी प्रजातियां इतनी दमदार हैं कि उन्हें टाइगर से भिड़ाया जा सकता है। ये केन कोरसो कहां से आए हैं और इतने बहादुर कैसे हैं?
केन कोरसो का नाम कहां से आया?
दरअसल केन का मतलब है कुत्ता और लातिन भाषा में कोरसो के मायने हैं सुरक्षा करने वाला या प्रोटेक्टर। इसे इटैलियन मास्टिफ भी कहा जाता है। इटली में ये कई साल से गार्ड डॉग की भूमिका निभा रहा है।
ये कुत्ते क्यों खास हैं?
केन कोरसो को संपत्ति, पशुओं और परिवारों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है और आज भी कई इलाकों में ये जारी है। इतिहास को देखें तो ये नाइट वॉचमेन की भूमिका निभाते रहे हैं।अमेरिकन केनेल क्लब के मुताबिक इन कुत्तों का कद 25 से 28 इंच होता है और जीवनकाल 9-12 साल। इन कुत्तों का वजन 45-50 किलोग्राम तक होता है।
इन कुत्तों को स्मार्ट, ट्रेनिंग देने के योग्य, दबंग और आत्मविश्वास से भरा हुआ बताया जाता है। केन कोरसो का इतिहास रोमन दौर से जुड़ा है। इसका सिर काफी बड़ा होता है। 20वीं सदी में दक्षिणी इटली के ग्रामीण फार्म में जब जीवन में बदलाव हुआ तो कोरसो दुर्लभ होने लगे। 1970 के दशक के अंतिम दिनों में कुछ समूहों ने मिलकर इस कुत्ते की प्रजाति को बचाने का जिम्मा संभाला।
प्रजाति कहां थी, कहां आ गई?
साल 1994 में इस प्रजाति को इटैलियन केनल क्लब ने इतालवी कुत्तों की 14वीं प्रजाति के रूप में मान्यता दे दी है। साल 1997 में वर्ल्ड केनाइन ऑर्गेनाइजेशन ने इसे आंशिक रूप से स्वीकार किया था और दस साल बाद इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह मान्यता दे दी गई।
अमरीका में अमरीकन केनेल क्लब ने पहले साल 2010 में केन कोरसो को मान्यता दी थी। इस प्रजाति की शोहरत लगातार बढ़ रही है और दुनिया के कई देशों में इसे पुलिस डॉग के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।