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यहां Toilet में होती है पढ़ाई, बकरियों की भी लगती है हाजिरी!
amarujala.com- Presented by: हर्षिता
Updated Sat, 05 Aug 2017 11:41 AM IST
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कमाल है! यहां एक साथ चल रहा है 'सर्व शिक्षा अभियान' और 'स्वच्छता अभियान'
- फोटो : HT
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मॉनसून में बकरियां में ले लेती हैं एडमिशन
हैरान कर देने वाली यह तस्वीर मध्य प्रदेश के नीमच जिले के एक प्रारंभिक स्कूल में ली गई है। यहां बिल्डिंग न होने की वजह से टॉयलेट में बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता है। बारिश होती है तो बकरियां भी पनाह लेने इसी छत के नीचे आ जाती हैं।
पढ़ें: टारगेट नहीं हुआ पूरा, तो इस ऑफिस के कर्मियों को पीना पड़ता है Toilet का पानी
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सांपों ने छीना बच्चों का स्कूल
पहले यह स्कूल एक किराए के कच्चे मकान में चलता था। लेकिन जब सांपों ने वहां बिल बना लिया तो बच्चों की हिफाजत के लिए पढ़ाई पेड़ के नीचे होने लगी। बारिश के मौसम में मजबूरन मास्टरसाहब को टॉयलेट में क्लास लेनी पड़ती है।
पढ़ें: बीच रास्ते कार हुई बेकार, दूल्हे राजा को खुद मारना पड़ा धक्का, अब लोटपोट हो रहा है संसार...
गौरतलब है कि इस स्कूल में 17 छात्र पढ़ते हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए सिर्फ एक टीचर है। इनका नाम कैलाश चंद्र राठौर है। जिस टॉयलेट में पढ़ाई होती है वह 'सरकारी इमारत' है। इस तरह से यहां 'स्वच्छता अभियान' और 'सर्व शिक्षा अभियान' एक साथ एक छत के नीचे चलाया जा रहा है।
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मॉनसून में बकरियां में ले लेती हैं एडमिशन
हैरान कर देने वाली यह तस्वीर मध्य प्रदेश के नीमच जिले के एक प्रारंभिक स्कूल में ली गई है। यहां बिल्डिंग न होने की वजह से टॉयलेट में बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता है। बारिश होती है तो बकरियां भी पनाह लेने इसी छत के नीचे आ जाती हैं।
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सांपों ने छीना बच्चों का स्कूल
पहले यह स्कूल एक किराए के कच्चे मकान में चलता था। लेकिन जब सांपों ने वहां बिल बना लिया तो बच्चों की हिफाजत के लिए पढ़ाई पेड़ के नीचे होने लगी। बारिश के मौसम में मजबूरन मास्टरसाहब को टॉयलेट में क्लास लेनी पड़ती है।
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गौरतलब है कि इस स्कूल में 17 छात्र पढ़ते हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए सिर्फ एक टीचर है। इनका नाम कैलाश चंद्र राठौर है। जिस टॉयलेट में पढ़ाई होती है वह 'सरकारी इमारत' है। इस तरह से यहां 'स्वच्छता अभियान' और 'सर्व शिक्षा अभियान' एक साथ एक छत के नीचे चलाया जा रहा है।