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खेलने-कूदने की उम्र में तरुण सागर के मन में आया था ऐसा ख्याल, 13 साल की आयु में छोड़ दिया था घर

Sat, 01 Sep 2018 11:45 AM IST
फीचर टीम, अमर उजाला
फीचर टीम, अमर उजाला Updated Sat, 01 Sep 2018 11:45 AM IST
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Know about the story of jain muni tarun sagar
फाइल फोटो
'बचपन' में हर बच्चा खेलना-कूदना पसंद करता है। इस समय को बच्चे फुल मस्ती के साथ जीना चाहते हैं क्योंकि इसी में उन्हें जीवन का भरपूर आनंद मिलता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी शख्सियत की कहानी से रू-ब-रू कराएंगे जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान होंगे। जी हां, जिनकी बात हम करने जा रहे हैं उन्होंने अपने बाल्यकाल में ही यह तय कर लिया था कि वे बड़े होकर जैनमुनि बनेंगे।
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आप सोच सकते हैं कि छोटे बच्चे अपने बचपन में क्या-क्या बनने के सपना देखते हैं? पायलट, डॉक्टर, इंजीनियर आदि। लेकिन ये बालक साधारण सोच नहीं रखता था। इसने कुछ अलग बनने के बारे में सोचा। खेलने कूदने की उम्र में ही इस बालक ने सोच लिया था कि वह बड़ा होकर जैन मुनि बनेगा। और वास्तव में ऐसा हुआ भी। जी हां, हम बात कर रहे हैं प्रखर वक्ता, जन-जन की आस्था के केंद्र व अपने कड़वे प्रवचनों के लिए जाने जाने वाले जैन मुनि तरुण सागर की।  
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Tarun Sagar
जब तक वे इस दुनिया में रहे न केवल जैन समाज ने बल्कि सम्पूर्ण भारत के लोगों ने इनसे कुछ न कुछ सीख ली। बता दें 51 वर्ष की आयु में शनिवार सवेरे उनका निधन हो गया। उस वक्त वे पूर्वी दिल्ली के कृष्णानगर इलाके में स्थित राधापुरी जैन मंदिर में थे। तरुण सागर जी महाराज ने जैनमुनि बनने के लिए लंबा सफर तय किया। एकबार बचपन में वह जलेबी खाते-खाते संत बन गए थे। ये बात उस समय की है जब जैन मुनि तरुण सागर छठी कक्षा में पढ़ाई करते थे। इस दौरान जलेबी खाते-खाते वे संन्यासी बन गए थे।

इसकी प्रामाणिकता का सबूत उस वक्त मिला जब मीडिया के सामने उन्होंने इस बात को लेकर बयान दिया। स्वंय जैनमुनि ने कहा था 'मैं एक दिन स्कूल से घर जा रहा था। बचपन में मुझे जलेबियां बहुत पसंद थीं। स्कूल से वापस लौटते वक्त पास में ही एक होटल पड़ता था, जहां बैठकर मैं जलेबी खा रहा था। पास में आचार्य पुष्पधनसागरजी महाराज का प्रवचन चल रहा था। वह कह रहे थे कि तुम भी भगवान बन सकते हो, यह बात मेरे कानों में पड़ी और मैंने संत परंपरा अपना ली।' 

 

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विशाल डडलानी को लेकर जैन मुनि तरुण सागर का बयान - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि जैन मुनि तरुण सागर का जन्म 1967 में मध्य प्रदेश के दमोह जिले के एक गांव में हुआ था। उनका असली नाम पवन कुमार जैन था। जैन संत बनने के लिए उन्होंने 13 वर्ष की उम्र में 8 मार्च 1981 को घर छोड़ दिया था। मुनि तरुण सागर ने 20 साल की उम्र में दिगंबर मुनि दीक्षा ली। कड़वे प्रवचन नाम से उनकी पुस्तक भी प्रकाशित हुई थी। आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि हरियाणा के शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा द्वारा तरुण सागर को न्योता दिया गया था।

इसके बाद न्योते को स्वीकार कर सागर ने 26 अगस्त 2016 को हरियाणा विधानसभा को संबोधित किया था। अपनी परंपरा के मुताबिक, तरुण सागर इस मौके पर भी बिना कपड़ों के ही रहते थे। इसी पर डडलानी ने लिखा था, 'अगर आपने इन लोगों के लिए वोट दिया है तो आप आप इस बकवास के लिए जिम्मेदार हो। नो अच्छे दिन जस्ट नो कच्छे दिन।' इस ट्वीट के बाद म्यूजिक कंपोजर विशाल डडलानी को जमकर फजीहत का सामना करना पड़ा। हालांकि बाद में उन्होंने जैन मुनि तरुण सागर से कान पकड़कर क्षमा याचना करनी पड़ी थी। 
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