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काबुकी: पूरे दिन चलता है जश्न, विचित्र कला से जुड़ते हैं कलाकार
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 12 Aug 2018 11:24 AM IST
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काबुकी एक शास्त्रीय जापानी नृत्य-नाटक है
जापान की खूबसूरती जितनी अद्भुत है, उतनी ही अद्भुत है वहां की संस्कृति, जो लोगों का मन मोह लेती है। नृत्य हो या मार्शल आर्ट्स। संगीत हो या पारंपरिक खानपान, सभी एकदम अलग और विशिष्ट होता है। काबुकी एक शास्त्रीय जापानी नृत्य-नाटक है। यह अपनी अनोखी शैली, नृत्य और कलाकारों द्वारा किए गए विस्तृत मेकअप के लिए जाना जाता है।
शब्द काबुकी, कबाबू से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'दुबला होना' या 'सामान्य से बाहर होना'। इसी तर्ज पर काबुकी को 'विशिष्ट' या 'विचित्र' कला से जोड़ा जाता है। इस कला से जुड़े कलाकारों के लिए 'काबुकीमोनो' शब्द का प्रयोग होता है। इस अद्भुत नृत्य नाटक का इतिहास वर्षों पुराना है। वर्ष 1603 में काबुकी का इतिहास तब शुरू हुआ, जब इजुमो नो ओकुनी नामक एक महिला ने क्योटो की नदी के किनारे एक नृत्य नाटक की नई शैली का प्रदर्शन किया था।
जीवन की कठिनाइयों को दर्शाने के लिए यह नृत्य नाटक शुरू हुआ। यह शैली लोगों के बीच एकदम लोकप्रिय हो गई और एक दिन ओकुनी को इंपीरियल कोर्ट के सामने इसका प्रदर्शन करने के लिए कहा गया। वहां भी देखने-सुनने वालों को यह बेहद पसंद आया और जल्द ही यह बड़े स्तर पर किया जाने लगा। उस समय तक इसे सिर्फ महिलाओं तक ही सीमित समझा जाता था, लेकिन बदलते समय में इसमें पुरुष भी शामिल होने लगे।
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जापान की अन्य पारंपरिक संस्कृतियों में शामिल काबुकी, पूरे दिन का कार्यक्रम होता है। वहां के लोग मानते हैं कि जश्न के लिए कुछ घंटे नहीं, बल्कि पूरा दिन समर्पित होना चाहिए। आज, काबुकी जापानी नाटक की पारंपरिक शैलियों में सबसे लोकप्रिय है। जापान के बाहर के देशों में भी काबुकी ट्रूप्स स्थापित हैं।
वर्ष 2002 में काबुकी की संस्थापक ओकुनी के सम्मान और इस शैली के 400 वर्षों के अस्तित्व का जश्न मनाने के लिए उनकी एक प्रतिमा भी बनाई गई थी। वहीं, वर्ष 2005 में यूनेस्को ने अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में काबुकी को शामिल किया है।
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शब्द काबुकी, कबाबू से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'दुबला होना' या 'सामान्य से बाहर होना'। इसी तर्ज पर काबुकी को 'विशिष्ट' या 'विचित्र' कला से जोड़ा जाता है। इस कला से जुड़े कलाकारों के लिए 'काबुकीमोनो' शब्द का प्रयोग होता है। इस अद्भुत नृत्य नाटक का इतिहास वर्षों पुराना है। वर्ष 1603 में काबुकी का इतिहास तब शुरू हुआ, जब इजुमो नो ओकुनी नामक एक महिला ने क्योटो की नदी के किनारे एक नृत्य नाटक की नई शैली का प्रदर्शन किया था।
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जीवन की कठिनाइयों को दर्शाने के लिए यह नृत्य नाटक शुरू हुआ। यह शैली लोगों के बीच एकदम लोकप्रिय हो गई और एक दिन ओकुनी को इंपीरियल कोर्ट के सामने इसका प्रदर्शन करने के लिए कहा गया। वहां भी देखने-सुनने वालों को यह बेहद पसंद आया और जल्द ही यह बड़े स्तर पर किया जाने लगा। उस समय तक इसे सिर्फ महिलाओं तक ही सीमित समझा जाता था, लेकिन बदलते समय में इसमें पुरुष भी शामिल होने लगे।
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जापान की अन्य पारंपरिक संस्कृतियों में शामिल काबुकी, पूरे दिन का कार्यक्रम होता है। वहां के लोग मानते हैं कि जश्न के लिए कुछ घंटे नहीं, बल्कि पूरा दिन समर्पित होना चाहिए। आज, काबुकी जापानी नाटक की पारंपरिक शैलियों में सबसे लोकप्रिय है। जापान के बाहर के देशों में भी काबुकी ट्रूप्स स्थापित हैं।
वर्ष 2002 में काबुकी की संस्थापक ओकुनी के सम्मान और इस शैली के 400 वर्षों के अस्तित्व का जश्न मनाने के लिए उनकी एक प्रतिमा भी बनाई गई थी। वहीं, वर्ष 2005 में यूनेस्को ने अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में काबुकी को शामिल किया है।