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इस देश में महिलाओं को लेडी डाक्टर से मिलता है ड्राइविंग लाइसेंस, पीछे का सच चौंकाने वाला है

Mon, 16 Apr 2018 08:01 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 16 Apr 2018 08:01 AM IST
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In Lithuania for driving license women have to pass a gynecological exam
women driving
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए हमें तमाम तरह के टेस्ट पास करने होते हैं। हर देश में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने को लेकर अलग-अलग नियम होते हैं। जैसे कई जगह रिटन टेस्ट होता है तो कहीं ओरल टेस्ट होता है। साथ में ड्राइविंग एबिलिटी तो हर जगह टेस्ट की जाती है लेकिन अगर हम आपको बताएं कि एक देश ऐसा है जहां महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए गाइनेकोलॉजिस्ट से चेकअप कराना होता है? हैरान हो रहे हैं न आप यह सुनकर, पर यह बात एकदम सच है।
In Lithuania for driving license women have to pass a gynecological exam
women driving
यूरोपीय देश लूथियाना में महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए रिटन टेस्ट, ड्राइविंग एबिलिटी टेस्ट के बाद गाइनेकोलॉजिस्ट के पास जाना पड़ता था। यहां उन्हें अपना चेकअप कराना होता था और अगर गाइनो उन्हें क्लीन चिट देती थी तभी उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस इशू किया जाता था। 
In Lithuania for driving license women have to pass a gynecological exam
women driving
इस कानून को बनाने के पीछे की वजह यह थी कि जो महिलाएं बीमार हो उन्हें लाइसेंस न दिया जाए। ऐसा मानना था कि बीमार महिलाएं अच्छे से ड्राइव नहीं कर पाती हैं। हैरान करने वाली बात ये है कि पुरुषों के लिए ऐसा कोई नियम नहीं था।
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In Lithuania for driving license women have to pass a gynecological exam
women driving
साल 2002 में इस विवादित कानून को लेकर लूथियाना में एक 24 वर्षीय महिला ने इस नियम के खिलाफ आवाज उठाई थी। महिला ने इस नियम को गलत बताते हुए कहा था कि लाइसेंस लेने के लिए जब पुरुषों की किसी तरह की कोई यूरोलॉजिकल टेस्ट या चिकित्सा जांच नहीं होती तो महिलाओं की जांच की क्या आवश्यकता है।
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In Lithuania for driving license women have to pass a gynecological exam
women driving
महिला ने शिकायत की थी कि नियम अनुचित था क्योंकि लाइसेंस प्राप्त करने से पहले पुरुषों को उनकी चिकित्सा जांच के भाग के रूप में यूरोलॉजिकल परीक्षा की आवश्यकता नहीं होती है। इस पर कुछ लिथुआनियाई डाक्टर्स ने तर्क दिया था कि महिलाओं के लिए जांच कराना इसलिए जरूरी है क्योंकि कुछ स्त्री रोग अचानक दर्द पैदा करते हैं कई बार तो बेहोश होने जैसी स्थिती बन जाती है।

लंबे समय तक इस विवादित कानून पर बहुत बहस चली। महिलाओं ने इसका बहुत विरोध किया, उनका मानना था कि ये स्त्री-पुरुष में भेदभाव करता है, जिसके बाद इस कानून को हटा दिया गया।
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