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इस देश में महिलाओं को लेडी डाक्टर से मिलता है ड्राइविंग लाइसेंस, पीछे का सच चौंकाने वाला है
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 16 Apr 2018 08:01 AM IST
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ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए हमें तमाम तरह के टेस्ट पास करने होते हैं। हर देश में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने को लेकर अलग-अलग नियम होते हैं। जैसे कई जगह रिटन टेस्ट होता है तो कहीं ओरल टेस्ट होता है। साथ में ड्राइविंग एबिलिटी तो हर जगह टेस्ट की जाती है लेकिन अगर हम आपको बताएं कि एक देश ऐसा है जहां महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए गाइनेकोलॉजिस्ट से चेकअप कराना होता है? हैरान हो रहे हैं न आप यह सुनकर, पर यह बात एकदम सच है।
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यूरोपीय देश लूथियाना में महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए रिटन टेस्ट, ड्राइविंग एबिलिटी टेस्ट के बाद गाइनेकोलॉजिस्ट के पास जाना पड़ता था। यहां उन्हें अपना चेकअप कराना होता था और अगर गाइनो उन्हें क्लीन चिट देती थी तभी उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस इशू किया जाता था।
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इस कानून को बनाने के पीछे की वजह यह थी कि जो महिलाएं बीमार हो उन्हें लाइसेंस न दिया जाए। ऐसा मानना था कि बीमार महिलाएं अच्छे से ड्राइव नहीं कर पाती हैं। हैरान करने वाली बात ये है कि पुरुषों के लिए ऐसा कोई नियम नहीं था।
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साल 2002 में इस विवादित कानून को लेकर लूथियाना में एक 24 वर्षीय महिला ने इस नियम के खिलाफ आवाज उठाई थी। महिला ने इस नियम को गलत बताते हुए कहा था कि लाइसेंस लेने के लिए जब पुरुषों की किसी तरह की कोई यूरोलॉजिकल टेस्ट या चिकित्सा जांच नहीं होती तो महिलाओं की जांच की क्या आवश्यकता है।
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महिला ने शिकायत की थी कि नियम अनुचित था क्योंकि लाइसेंस प्राप्त करने से पहले पुरुषों को उनकी चिकित्सा जांच के भाग के रूप में यूरोलॉजिकल परीक्षा की आवश्यकता नहीं होती है। इस पर कुछ लिथुआनियाई डाक्टर्स ने तर्क दिया था कि महिलाओं के लिए जांच कराना इसलिए जरूरी है क्योंकि कुछ स्त्री रोग अचानक दर्द पैदा करते हैं कई बार तो बेहोश होने जैसी स्थिती बन जाती है।
लंबे समय तक इस विवादित कानून पर बहुत बहस चली। महिलाओं ने इसका बहुत विरोध किया, उनका मानना था कि ये स्त्री-पुरुष में भेदभाव करता है, जिसके बाद इस कानून को हटा दिया गया।
लंबे समय तक इस विवादित कानून पर बहुत बहस चली। महिलाओं ने इसका बहुत विरोध किया, उनका मानना था कि ये स्त्री-पुरुष में भेदभाव करता है, जिसके बाद इस कानून को हटा दिया गया।