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भारत का वो केंद्र शासित प्रदेश, जहां जाने में थोड़ी देर हो जाती तो पाकिस्तान कर लेता कब्जा

Sun, 22 Mar 2020 05:35 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sun, 22 Mar 2020 05:35 PM IST
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Union territory of India Lakshadweep Story know how Pakistan Lost this Island
लक्षद्वीप - फोटो : Social media

ये तो आप सभी जानते होंगे कि जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा हट जाने और 'दादर और नागर हवेली' और 'दमन और दीव' के मिल जाने से अब भारत में केंद्र शासित प्रदेशों की कुल संख्या आठ हो गई है। आज हम आपको इन्हीं आठ में से एक केंद्र शासित प्रदेश के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में कहा जाता है कि वहां भारतीय अधिकारी और पुलिस के पहुंचने में थोड़ी सी भी देरी हो जाती हो उसपर पाकिस्तान का कब्जा हो जाता और शायद वह कभी भारत का अंग नहीं बन पाता। 

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लक्षद्वीप - फोटो : Social media

इस केंद्र शासित प्रदेश का नाम है लक्षद्वीप। मलयालम और संस्कृत में लक्षद्वीप का अर्थ है 'एक सौ हजार द्वीप' यानी एक लाख द्वीप। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, लक्षद्वीप द्वीप-समूह में कुल 36 द्वीप हैं, लेकिन सिर्फ 10 द्वीपों पर ही लोग रहते हैं। भारतीय पयर्टकों को सिर्फ छह द्वीपों पर ही जाने की अनुमति है, जबकि विदेशी पयर्टक सिर्फ दो द्वीपों (अगाती व बंगाराम) पर ही जा सकते हैं। 

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लियाकत अली खान - फोटो : Social media

1947 में जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था, उस समय लक्षद्वीप पर दोनों देशों में से किसी का भी अधिकार नहीं था। कहते हैं कि अगस्त 1947 के आखिर में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने सोचा कि लक्षद्वीप मुस्लिम बहुल इलाका है और अब तक भारत ने इसपर अपना दावा भी नहीं किया है तो क्यों न इसे अपने अधिकार में ले लिया जाए। 

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सरदार वल्लभभाई पटेल - फोटो : Social media

कहा जाता है कि ठीक उसी समय भारत के तत्कालीन गृहमंत्री और उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल भी वहीं सोच रहे थे, जैसा लियाकत अली खान सोच रहे थे। हालांकि उस समय तक दोनों ही देश असमंजस की स्थिति में थे, क्योंकि दोनों में से किसी को भी यह नहीं पता था कि किसी ने उसपर कब्जा कर लिया है या नहीं। इसी असमंजस की स्थिति में पाकिस्तान ने अपना एक युद्धपोत लक्षद्वीप के लिए भेजा। 

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तिरंगा झंडा - फोटो : Social media

इधर, वल्लभभाई पटेल भी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि लक्षद्वीप को किसी भी हालत में पाकिस्तान के कब्जे में जाने नहीं देंगे। इसलिए उन्होंने त्रावणकोर में राजस्व कलेक्टर को निर्देश दिया कि वो तुरंत पुलिस टीम के साथ जाएं और लक्षद्वीप पर भारतीय तिरंगा लहराएं, ताकि पता चले कि वह इलाका भारत का है। राजस्व कलेक्टर भी इस बात को लेकर काफी गंभीर थे, इसलिए वो तुरंत लक्षद्वीप पहुंचे। वहां उन्होंने आव देखा न ताव तुरंत भारतीय झंडा जमीन में गाड़कर लहरा दिया। कहते हैं कि इसके कुछ ही देर बाद पाकिस्तानी युद्धपोत भी वहां पहुंचा, लेकिन भारतीय झंडा देख कर वो दबे पांव फिर वापस लौट गए। तब से लेकर आज तक यह द्वीप भारत का ही अभिन्न अंग है। 

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