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आखिर किसकी है ये परछाई? 75 साल से बना हुआ है रहस्य

Wed, 11 Mar 2020 03:07 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Wed, 11 Mar 2020 03:07 PM IST
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The shadows of Hiroshima Haunting imprints of people killed by Nuclear blast
आखिर किसकी है ये परछाई? - फोटो : Social media

जापान का हिरोशिमा दुनिया का पहला ऐसा शहर है, जहां परमाणु बम गिराया गया था। यह विध्वंसक घटना छह अगस्त, 1945 को हुई थी और बम अमेरिका ने गिराया था। इसी शहर में एक जगह पर इंसान जैसी दिखने वाली एक ऐसी परछाई है, जो 75 सालों से सबके लिए रहस्य ही बनी हुई है। 

The shadows of Hiroshima Haunting imprints of people killed by Nuclear blast
परमाणु बम विस्फोट के बाद हिरोशिमा - फोटो : Social media

इस परछाई को 'द हिरोशिमा स्टेप्स शैडो' या 'शैडोज ऑफ हिरोशिमा' के नाम से जाना जाता है। दरअसल, द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब हिरोशिमा पर परमाणु हमला हुआ था, तो लाखों लोग एक झटके में मौत के मुंह में समा गए थे। परछाई वाली ये तस्वीर भी धमाके वाली जगह से 850 फीट की दूरी पर खींची गई थी, जहां कोई व्यक्ति बैठा हुआ था। 

The shadows of Hiroshima Haunting imprints of people killed by Nuclear blast
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

कहते हैं कि परमाणु बम की अथाह ताकत ने उस व्यक्ति को तो पूरी तरह से मिटा दिया, लेकिन उसकी परछाई को वो नहीं मिटा सका। इस छाया की वास्तविकता की कभी पहचान नहीं हो पाई कि वो व्यक्ति कौन था, जो वहां पर बैठा हुआ था। यह अब तक रहस्य ही बना हुआ है। 

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The shadows of Hiroshima Haunting imprints of people killed by Nuclear blast
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

एक अनुमान के मुताबिक, हिरोशिमा परमाणु विस्फोट में लगभग एक लाख 40 हजार लोगों की मौत हुई थी। जब विस्फोट हुआ था तो उसमें से भयंकर ऊर्जा निकली थी और कहते हैं कि उसकी गर्मी की वजह से ही करीब 60 हजार से 80 हजार लोग मारे गए थे, जबकि बाद में परमाणु विकिरण संबंधी बीमारियों के चलते भी हजारों लोगों की मौत हो गई थी। 

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The shadows of Hiroshima Haunting imprints of people killed by Nuclear blast
परमाणु बम विस्फोट - फोटो : सोशल मीडिया

हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम का नाम 'लिटल ब्वॉय' था, जिसका वजन करीब 4400 किलोग्राम था। कहते हैं कि इस बम के फटने से जमीनी स्तर पर लगभग 4,000 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी पैदा हुई थी। जहां इंसान 50-55 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाता, ऐसे में जाहिर है 4,000 डिग्री सेल्सियस की गर्मी किसी भी इंसान को पलभर में जलाकर राख बनाने के लिए काफी थी। 

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