इंसान और इंसान के बीच की लड़ाई को आपने कई बार देखी या सुनी होगी. लेकिन क्या कभी आपने पक्षियों और इंसानों के बीच युद्ध हुआ हो, ऐसा देखा या सुना है? जी हां, पक्षियों और इंसानों के बीच युद्ध। ये रोचक घटना साल 1932 की है, जिसके बारे में जो भी सुनता है, वो हैरान हुए बिना नहीं रहता। दरअसल, प्रथम विश्वयुद्ध के बाद सेवानिवृत हुए कुछ सैनिकों को ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा पुनर्वास के लिए जमीनें दी गई थीं। ये जमीनें ज्यादातर पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में थीं। अब सैनिक यहां किसान बन गए और अपनी-अपनी जमीनों पर खेती करने लगे, लेकिन कुछ ही समय बाद उनके फसलों पर विशालकाय जंगली पक्षी एमू का हमला हो गया। यहां सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि इन पक्षियों की संख्या 2-4 नहीं बल्कि 20 हजार के करीब थी।
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एमू (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
एमू का झुंड आता और किसानों की फसलों को बर्बाद करके चला जाता। सिर्फ यहीं यहीं, उन्होंने खेतों की रक्षा के लिए जो फेंसिंग लगाई थी, उसे भी उन पक्षियों ने तोड़ दिया था। जब ऐसा अक्सर होने लगा तो किसान बने सैनिकों का एक प्रतिनिधिमंडल सरकार के पास अपनी गुहार लेकर पहुंचा। अब समस्या की गंभीरता को देखते हुए किसानों की मदद के लिए ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन रक्षामंत्री ने मशीन गन से लैस सेना की एक टुकड़ी भेजी।
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एमू (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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वह दो नवंबर, 1932 का दिन था। सरकार द्वारा भेजी गई सेना ने एमूओं को भगाने वाला ऑपरेशन शुरू किया। उन्हें एक जगह पर 50 एमूओं का झुंड दिखा, लेकिन जब तक वो मशीन गन से उनपर निशाना लगाते, तब तक उन पक्षियों का झुंड यह समझ गया कि उनपर हमला होने वाला है और वो वहां तेजी से भाग निकले और मशीन गन की रेंज से दूर हो गए।
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एमू (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
चार नवंबर, 1932 को भी कुछ ऐसा ही हुआ। सैनिकों ने करीब 1000 एमूओं का एक झुंड देखा और वो उनपर अभी फायर करने ही वाले थे कि मशीन गन जाम हो गई। जब तक मशीन गन ठीक हो पाती, तब तक अधिकतर एमू वहां से भाग गए थे। हालांकि फिर भी सैनिकों ने करीब 12 एमूओं को मार गिराया था, लेकिन इस घटना के बाद से एमू काफी सतर्क हो गए।
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एमू (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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कहा जाता है कि एमूओं ने अब सैनिकों के हमलों से बचने के लिए खुद को छोटे-छोटे समूहों में बांट लिया था और हर समूह में एक एमू निगरानी के काम में लगा रहता था, ताकि उनपर हमला न हो या हमला होने से पहले ही वो बाकियों को सतर्क कर दे, जिससे सभी वहां से भाग निकलें। इस दौरान वो फसलों को खूब बर्बाद करते रहे, लेकिन जैसे ही उन्हें लगता कि उनपर हमला होने वाला है तो वो वहां से भाग निकलते।