फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bizarre News ›   Science Wonders ›   this ship drilling into antarcticas warm and balmy past

इस जहाज ने समुद्र की गहराई से वो राज ढूंढ निकाला, जिसे जानने के बाद वैज्ञानिकों के छूटने लगे पसीने

Wed, 03 Oct 2018 10:29 AM IST
विवियन कमिंग और क्रिस्टियन डेलफ़िना, बीबीसी
विवियन कमिंग और क्रिस्टियन डेलफ़िना, बीबीसी Updated Wed, 03 Oct 2018 10:29 AM IST
विज्ञापन
this ship drilling into antarcticas warm and balmy past
अंटार्टिका - फोटो : BBC

अंटार्कटिका महाद्वीप पूरी तरह से बर्फ से ढका हुआ है। सिवाए बर्फ के दूर-दूर तक कुछ नहीं दिखता। इसे बर्फीला रेगिस्तान कहा जाता है। मगर, अंटार्कटिका पर हमेशा से ही बर्फ रही हो ऐसा नहीं है। आज से 12 करोड़ साल पहले अंटार्कटिका बाकी महाद्वीपों की तरह ही हरा-भरा और जिंदगी से लबरेज था।

विज्ञापन


उस युग को जीवाश्म वैज्ञानिक क्रिटेशियस महायुग कहते हैं। उस महायुग में अंटार्कटिक की आबो-हवा आज के सर्द माहौल से बिल्कुल अलग थी। भारत, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका एक दूसरे से जुडे हुए थे। यही तीनों जमीनी विस्तार मिल कर दक्षिणी ध्रुव का इलाका बनाते थे।
विज्ञापन


जीवाश्म वैज्ञानिक ब्रायन ह्यूबर कहते हैं कि आज अंटार्कटिका पर पुराने दौर के सुबूत तलाशना बहुत बड़ी चुनौती है। इसकी वजह ये है कि पूरा महाद्वीप बर्फ की मोटी परत से ढका हुआ है। मगर इसका एक फायदा ये भी है कि करोडों साल पहले के जीवाश्म, बर्फ में सुरक्षित दबे हुए हैं। ऐसे में अंटार्कटिका के गुजरे हुए कल के बहुत से राज समंदर अपनी बांहों में समेटे हुए है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अंटार्कटिका के आस-पास के समुद्री इलाकों में बडी गहराई में छुपे हुए ये राज, अंटार्कटिका के करोडों साल के इतिहास को बयां करते हैं।

समुद्र में गहरी खुदाई

this ship drilling into antarcticas warm and balmy past
अंटार्टिका में जहाज - फोटो : BBC

ब्रायन ह्यूबर कहते हैं कि साठ के दशक से ही गहरे समुद्र में खुदाई करके चट्टान की परतों में छिपे धरती के इतिहास को खंगाला जा रहा है। वैज्ञानिक मिशन पर निकला क्रूज शिप जोडीज रिजॉल्यूशन दुनिया भर के समुद्रों में गहरे छुपी चट्टानों से ये राज निकालने का काम करता है।

समुद्री भूवैज्ञानिक कारा बोगस बताती हैं कि ये जहाज हमेशा कुछ सीधे सवालों के जवाब तलाशता फिरता है। समुद्र के भीतर स्थित चट्टानों से ये पता लगाता है कि टेक्टोनिक प्लेट्स यानी धरती के गर्भ में छिपी चट्टानों की परतें किस तरह हिलती-डुलती हैं। उनसे धरती पर क्या बदलाव आते हैं। कहां तबाही मचती है और कहां ये बदलाव फायदे का सौदा होते हैं।

इस जहाज का मिशन नंबर 369 ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका में क्रिटेशियस कल्प के दौरान के हालात पता लगाने के लिए था। ये वो युग था, जब धरती पर डायनासोर पाए जाते थे। भूवैज्ञानिक रिचर्ज हॉब्स, जोडीस रिजॉल्यूशन पर सवार होकर तमाम वैज्ञानिक सवालों के जवाब तलाशते हैं। वो कहते हैं कि हमें धरती के इतिहास के बारे में गहरी जानकारी नहीं है। धरती के करोड़ों साल पुराने ज्यादातर राज समंदर में छिपे हैं।

समंदर, धरती के दो तिहाई हिस्से में फैले हुए हैं। रिचर्ड कहते हैं कि इंसान ने अब तक समंदर का महज पांच फीसद हिस्सा ही खंगाला है। रिचर्ड बताते हैं कि ये जहाज समुद्र की गहराई और तलहटी से आंकडे जमा करने के लिए खास तौर से डिजाइन किया गया है।

जोडीस रिजॉल्यूशन में ऐसी मशीनें लगी हैं, जो समुद्र में करीब चार किलोमीटर तक गहराई में जाकर चट्टानों की खुदाई कर सकती हैं। वहां से नमूने इकट्ठे कर सकती हैं। ऐसी क्षमता वाला ये दुनिया का इकलौता जहाज है। रिचर्ड हॉब्स बडे तजुर्बेकार भूवैज्ञानिक हैं। वो बताते हैं कि आज धरती की जो आबो-हवा है, वो आज से 12 करोड साल पहले हुई भूवैज्ञानिक घटना का नतीजा है। उस दौर में भारतीय उपमहाद्वीप का पूर्वी हिस्सा अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया से जुडा हुआ था। लेकिन, धरती के भीतर टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल से ये विशाल भूखंड एक-दूसरे से अलग हो गए।

ऑस्ट्रेलिया के अलग होने से निकली धारा

this ship drilling into antarcticas warm and balmy past
ब्रायन ह्यूबर - फोटो : BBC

अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया के अलग होने का नतीजा ये हुआ कि समुद्र में एक ठंडी धारा बह चली। इसे हम ध्रुवीय समुद्री धारा या सर्कमपोलर करेंट के नाम से जानते हैं। इस सर्द समुद्री धारा से ही आज दुनिया का मौसम निर्धारित होता है। ये अंटार्कटिका महाद्वीप के इर्द-गिर्द बहती है।

समुद्र की गहराई से जो चट्टानें निकाली जाती हैं, उनमें के कीटाणुओं के जीवाश्म मिलते हैं। इनसे चट्टानों की उम्र का पता चल जाता है। यानी ये जानकारी हो जाती है कि वो धरती के किस युग से ताल्लुक रखती हैं।

इन चट्टानों से ये भी पता चलता है कि उस वक्त धरती पर कैसा माहौल था। किस्सा मुख्तसर ये कि करोडों साल पुरानी ये चट्टानें एक खुफिया जासूस का काम करती हैं, जो धरती पर करोडों साल पुराने दौर के राज फाश करती हैं।

ब्रायन ह्यूबर कहते हैं कि अलग-अलग दौर की ये चट्टानें किसी पहेली के अलग-अलग जवाब हैं। जब इन सब को जोडा जाता है, तो बहुत सारे सवालों का उत्तर मिलता है। पता चलता है कि धरती का तापमान क्यों बदला।



 

आबो-हवा से समुद्र में पहुंची कार्बन डाई ऑक्साइड

this ship drilling into antarcticas warm and balmy past
अंटार्टिका - फोटो : BBC

चट्टानों की परतों से पता चलता है कि ज्वालामुखी विस्फोटों ने धरती के विकास में क्या रोल निभाया। उस दौर में चट्टानों के हिलने-डुलने से धरती पर क्या बदलाव आए। पर्यावरण कैसे बदलता गया। समुद्र की ये चट्टानें जब एक तरतीब से रखी जाती हैं, तो ऐसे सवालों के जवाब एक-दूसरे से पिरोए जाते हैं। और हमारी धरती के विकास के उपन्यास के अध्याय तैयार होते हैं।

क्रिटेशियस युग की चट्टानों से जुटाए गए आंकडे बताते हैं कि उस वक्त समुद्र में कार्बन डाई ऑक्साइड की तादाद बहुत ज्यादा थी। आबो-हवा से कार्बन डाई ऑक्साइड लगातार समुद्र के पानी में घुल रही थी। इससे उस दौर के जीवों का दम घुट रहा था। जीवों की बहुत सारी नस्लें ऐसे ही हमेशा के लिए खत्म हो गईं।

ब्रायन ह्यूबर कहते हैं कि उस युग के सुबूत आज के माहौल से मेल खाते हैं। हम धीरे-धीरे उसी तरह के दौर की तरफ बढ रहे हैं। आज इंसान धरती के पर्यावरण में भारी तादाद में कार्बन डाई ऑक्साइड छोडता है। ये ठीक उसी तरह है, जैसे क्रिटेशियस युग में ज्वालामुखी से निकली कार्बन डाई ऑक्साइड हवा में घुल रही थी। मगर इसकी रफ्तार उस दौर से कई गुना ज्यादा है।

अगर, हम ने अपनी करतूतों पर लगाम न लगाई, तो हम ऐसी आबो-हवा की तरफ बढ रहे हैं, जैसा माहौल क्रिटेशियस युग में था, जब डायनासोर आखिरी सांसें गिन रहे थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Bizarre News in Hindi related to Weird News - Bizarre, Strange Stories, Odd and funny stories in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Bizarre and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed