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ये हैं असली जिंदगी की जलपरी! देखें और पढ़ें दंग करने वाली ये खबर

Mon, 29 Sep 2014 10:15 AM IST
Updated Mon, 29 Sep 2014 10:15 AM IST
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mystery of mermaids solved

जलपरी के बारे में पढ़ना, उन्हें देखना और जानना हममें से कई लोगों को काफी पसंद हैं। जलपरी के बारे में जानने की एक वजह उनका अजीबोगरीब लेकिन फिर भी मादक रूप है।

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डेली मेल के मुताबिक उनके अस्तित्व को लेकर अब तक कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई थी। लेकिन, हाल ही में डॉक्टरों ने उनसे जुड़ी एक बात का खुलासा किया है।
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पेशे से एक मेडिकल हिस्टोरियन लिंडसे फिट्सहैरिस ने बताया कि ऐसा संभव है कि जलपरी का पूरी अवधारणा एक इंसानों को होने वाली एक मेडिकल कंडिशन से जुड़ी है।

ऑक्सफॉर्ड युनिवर्सिटी पासआउट लिंडसे बताती हैं कि इस मेडिकल कंडिशन को साइरनोमेलिया कहते हैं। इसे आम भाषा में मरमेड सिंड्रोम नाम से भी जाना जाता है। ये बीमारी एक लाख बच्चे में किसी एक को होती है।

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मरमेड जैसे बच्चों का जन्म

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मरमेड सिंड्रोम नाम की इस बीमारी में किसी नवजात के पैर नीचे से चिपके होते हैं। इसके पीछे की वजह लिंडसे ने बताई कि जब गर्भ में विकास के दौरान मां की गर्भनाल दो धमनियां बनाने में असफल हो जाती है, तो बच्चे के पैर अलग नहीं हो पाते हैं।

वो शरीर के किसी और अंग की ही तरह चिपके हुए बढ़ते हैं। देखकर ऐसा आभास होता है कि जैसे उनके पैर किसी जलपरी की तरह हों, लेकिन वो एक मेडिकल कंडिशन होता है।

अब तक इस बीमारी के ज्यादा मामले नहीं आए हैं। जुड़े पैर वाले बच्चे जल्दी खत्म हो जाते हैं। वो जन्म के कुछ ही दिनों तक जिंदा रहते हैं। लेकिन, बहुत कम मामले ऐसे भी हैं जिसमें मरमेड सिंड्रोम के ग्रसित बच्चे किशोरावस्‍था तक जिंदा रहें हैं।

संजोए गए है ऐसे बच्चे

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लिंडने ने बताया कि मरमेड सिंड्रोम होने की एक वजह पैरो का मुड़ जाना भी है। गलती से अगर विकसित हो रहे बच्चे के पैर गलत दिशा में घूम जाएं तो भी इस सिंड्रोम के होने का खतरा रहता है।

वहीं वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे देखे गए मामलों को संरक्षित किया है। अगर आप कभी एम्‍स्टरडैम के रॉलिक म्यूजियम जाएं तो वहां शीशे में पड़े एक ऐसे ही मरे हुए बच्चे को जरूर देखें। मरमेड की पूरी कल्पना आपके जहन में फिर से जग उठेगी।

वहीं साल 2006 में इस बीमारी से पीड़ित एक बच्ची ने पेरूविया में जन्म लिया था। जन्म के एक साल बाद डॉक्टरों ने मेलाग्रॉस सेरॉन के चिपके पैर अलग करने के लिए सर्जरी की। ये बहुत रिस्की कहा जा सकने वाला ऑपरेशन था। पैर से प्राइवेट पार्ट और  किडनी जुड़े होने की वजह से इस बच्ची का ऑपरेशन सालों तक कई चरणों में चला।

सर्जरी ठीक से हुई और फिर मेलाग्रोस आम लड़की की तरह ठीक हो पाई।

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