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Nurses Day 2020: आखिर कौन थी दुनिया की पहली नर्स, जिसके जन्मदिन पर मनाया जाता है नर्सेज डे

Tue, 12 May 2020 11:08 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Tue, 12 May 2020 11:08 AM IST
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Nurses Day 2020 Story of worlds first Nurse Florence Nightingale
दुनिया की पहली नर्स फ्लोरेंस नाइटिंगेल - फोटो : Social media

आपने फ्लोरेंस नाइटिंगेल या 'द लेडी विद द लैंप' के बारे में किताबों में जरूर पढ़ा होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि फ्लोरेंस नाइटिंगेल को ही दुनिया की पहली नर्स माना जाता है और उन्हीं के जन्मदिन को अंतरराष्ट्रीय नर्सेज डे यानी नर्स दिवस के रूप में मनाया जाता है। फ्लोरेंस नाइटिंगेल की ऐसी कई खास बातें हैं, जो उन्हें महान बनाती हैं। तो चलिए जानते हैं दुनिया की इस पहली नर्स के बारे में और आखिर अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस का इतिहास क्या है। 

Nurses Day 2020 Story of worlds first Nurse Florence Nightingale
फ्लोरेंस नाइटिंगेल - फोटो : Social Media

12 मई 1820 को इटली के फ्लोरेंस में जन्मीं फ्लोरेंस नाइटिंगेल को एक नर्स से ज्यादा घायलों की जान बचाने वाली 'देवदूत' के रूप में जाना जाता है। उन्होंने जंग में घायल हजारों लोगों की जान बचाई थी। नाइटिंगेल का बचपन से ही ये शौक था कि वो लोगों की सेवा करें, लेकिन वर्ष 1844 में उन्होंने पूरी तरह से ये तय कर लिया कि उन्हें नर्सिंग के पेशे में ही जाना है और लोगों की सेवा करनी है। 

Nurses Day 2020 Story of worlds first Nurse Florence Nightingale
फ्लोरेंस नाइटिंगेल - फोटो : Social media

कहते हैं कि फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने जब अपने माता-पिता से ये कहा कि वो नर्सिंग की ट्रेनिंग के लिए इंग्लैंड के सैलिसबरी शहर जाना चाहती हैं तो उन्होंने इसके लिए साफ इनकार कर दिया, क्योंकि वो चाहते थे कि उनकी बेटी शादी कर ले और अपना घर बसाए। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नाइटिंगेल का एक युवक के साथ प्रेम प्रसंग भी चला था, लेकिन 1849 में उन्होंने उससे शादी करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा है। इसके एक साल बाद ही जब घरवालों को ये अहसास हो गया कि नाइटिंगेल शादी नहीं करेंगी तो हारकर उन्होंने नर्सिंग की ट्रेनिंग लेने के लिए उन्हें जर्मनी जाने की इजाजत दे दी। 

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Nurses Day 2020 Story of worlds first Nurse Florence Nightingale
फ्लोरेंस नाइटिंगेल - फोटो : Social media

फ्लोरेंस का सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्रीमिया के युद्ध में रहा, जब 1854 में उन्हें 38 नर्सों के साथ घायलों की सेवा के लिए तुर्की भेजा गया। इसी समय किए गए उनके सेवा कार्यो के लिए उन्हें 'द लेडी विद द लैंप' की उपाधि से सम्मानित किया गया था। दरअसल, वो रात को भी हाथ में मशाल लिए घायल मरीजों की सेवा करने चली जाती थीं। 

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Nurses Day 2020 Story of worlds first Nurse Florence Nightingale
फ्लोरेंस नाइटिंगेल - फोटो : Social media

फ्लोरेंस को ब्रिटेन की सरकार ने 'ऑर्डर ऑफ मेरिट' के सम्मान से नवाजा गया था। ये सम्मान पाने वाली वो पहली महिला थीं। फ्लोरेंस नाइटिंगेल लोगों की सेवा में इस कदर व्यस्त थीं कि उन्हें अपनी उम्र का भी पता नहीं चला। हालांकि लंबी उम्र और सेवा के लंबे करियर के बाद वर्ष 1910 में 90 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया। 

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