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Sentinel Island: दुनिया से क्यों डरती है भारत के सेंटिनल द्वीप की रहस्यमयी जनजाति? जानिए आखिर क्या है रहस्य
Wed, 24 Apr 2024 03:21 PM IST
धर्मेंद्र सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र सिंह
Updated Wed, 24 Apr 2024 03:21 PM IST
सार
धरती पर आज भी कई जगहों पर इंसान नहीं जा सकते हैं। भारत में भी एक ऐसी जगह है, जहां जाना किसी खतरे से कम नहीं है। देश के अंडमान द्वीप समूह में नॉर्थ सेंटिनल आईलैंड स्थित है।
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दुनिया से क्यों डरती है भारत के सेंटिनल द्वीप की रहस्यमयी जनजाति?
- फोटो : Istock
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विस्तार
Mysterious North Sentinel Island: धरती पर आज भी कई जगहों पर इंसान नहीं जा सकते हैं। भारत में भी एक ऐसी जगह है, जहां जाना किसी खतरे से कम नहीं है। देश के अंडमान द्वीप समूह में नॉर्थ सेंटिनल आईलैंड स्थित है। यहां पर सेंटिनली जनजाति के लोग रहते हैं, जिनका दुनिया से कोई संपर्क नहीं है। साल 2018 में इस आईलैंड की अचानक चर्चा शुरू हो गई थी। दरअसल, यहां पर 26 साल के ईसाई धर्म प्रचारक जॉन एलन चाऊ ने जाने की कोशिश की थी, जिसे द्वीप के लोगों ने मार दिया था।
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बताया जाता है कि उसने द्वीप पर अवैध रूप से जाने का प्रयास किया था। आदिवासियों को उसने ईसाई धर्म में बदलने की कोशिश की, लेकिन चाऊ की मौत अकेली नहीं थी। साल 2006 में यहां पर मछली पकड़ने गए दो मछुआरों की भी हत्या कर दी गई थी। ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास में यहां के आदिवासियों के बाहरी दुनिया के प्रति शत्रुतापूर्ण व्यवहार रखने की असली वजह हो सकती है।
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इसमें बीमारी, यौन शोषण और अपहरण शामिल हो सकता है।
द्वीप पर गए थे अंग्रेज
साल 1879 में ब्रिटिश नौसेना अधिकारी मौरिस विडाल पोर्टमैन को अंडमान का प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया था। पोर्टमैंन दो दशकों से अधिक समय तक इलाके में जनजातियों को दबाने से जुड़े दस्तावेजीकरण के लिए जिम्मेदार थे। इलाके में उनकी समुदायों को सभ्य बनाने की भूमिका थी, भले ही क्यों न उसके लिए बल का इस्तेमाल किया जाए। वह साल 1880 में उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर गए थे। अधिकारी के लोगों ने द्वीप के छह लोगों, एक बुजुर्ग पुरुष, महिला और चार बच्चों को पकड़ लिया। उनको कथित तौर पर विज्ञान प्रयोग के लिए पोर्ट ब्लेयर लाया गया।
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एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अपने कार्यों का दस्तावेजीकरण करते हुए जानकारी दी कि द्वीप से लाए गए लोग जल्द ही एक रहस्यमयी बीमारी से पीड़ित हो गए और वह सभी तेजी से बीमार पड़ने लगे। महिला और पुरुष दोनों की मौत हो गई, तो वहीं बच्चों को द्वीप पर वापस पहुंचा दिया गया। द्वीप पर पहुंचाए गए सभी बच्चे संक्रमित थे।
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बच्चों के माध्यम से फैला संक्रमण वहां के लिए जानलेवा साबित हो गया। मानव अधिकार संगठन सर्वाइवल इंटरनेशनल ने कहा कि जनजातियों में अधिकांश शत्रुता और नए लोगों के प्रति डर के लिए पोर्टमैन की यात्राएं जिम्मेदार हो सकती हैं।