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मिल गया माइक्रो मेंढक, इसका साइज देख हैरत में पड़ जाएंगे

Wed, 22 Feb 2017 04:40 PM IST
हेलेन ब्रिग्स, बीबीसी
हेलेन ब्रिग्स, बीबीसी Updated Wed, 22 Feb 2017 04:40 PM IST
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Scientist Found A New Species Of Frog In India
भारत में केरल और तमिलनाडु के जंगलों में चार नए और छोटे मेंढक पाए गए हैं। ये इतने छोटे हैं कि आपके अंगूठे के नाखून पर बैठ जाएंगे। दुनिया के सबसे छोटे मेंढकों की श्रेणी में आने वाले ये मेंढक जमीन पर रहते हैं और रात में कीट-पतंगों जैसी आवाजें निकालते हैं। पश्चिमी घाट के जंगलों में इनके अलावा तीन बड़ी प्रजातियों के मेंढक भी मिले हैं। इस तरह रात को पाए जाने वाले मेंढकों की संख्या सात हो गई है।
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भारत के पश्चिमी तट के समानांतर चलने वाली पर्वत श्रृंखलाओं में सैंकड़ों की तादाद में ऐसे दुर्लभ प्रजाति के पौधों और जन्तुओं की भरमार है। लेकिन इनका जीवन खतरे में है।
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कई सालों की खोज के बाद ये नई प्रजातियां मिली हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की सोनाली ग्रेग बताती हैं, "ये नन्हें मेंढक सिक्के या अंगूठे के नाखून पर भी बैठ सकते हैं।"
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एकांतप्रिय मेंढक
सोनाली नए जीवों को तलाश रही वैज्ञानिकों की खोजी टीम का हिस्सा हैं। वे बताती हैं, "ये नन्हें मेंढक इतनी अधिक तादाद में हमें मिले हैं कि हम हैरान हैं। लगता है आकार में बहुत छोटे होने, एकांतप्रिय और कीटों की तरह आवाज करने के कारण शोधकर्ता इन्हें अब तक नजरअंदाज करते आ रहे थे।"

7-8 करोड़ पुरानी है ये प्रजाति

Scientist Found A New Species Of Frog In India
रात में पाए जाने वाले मेंढकों का समूह निक्टीबाट्रेचस नाम से जाना जाता है। इस समूह में पहले से 28 मान्यता प्राप्त प्रजातियां हैं। इनमें से तीन का आकार 18 मिमी से भी कम है। यह समूह भारत के पश्चिमी घाटों पर पाया जाता है। माना गया है कि ये प्रजाति 7-8 करोड़ साल पुरानी है। इनमें से अधिकांश नए मेंढक मानव बस्ती से सटे सुरक्षित इलाकों में रहते है।

शोध का नेतृत्व करने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एसडी बीजू ने भारत में उभयचरों की 80 से अधिक नए नस्लों की खोज की है। वे बताते हैं, "पश्चिमी घाट पर पाए जाने वाले मेंढकों में से एक तिहाई, यानी लगभग 32 फीसदी से अधिक मेंढक पहले से खतरे में हैं। नई मिली सात प्रजातियों में से पांच पर गंभीर खतरा है। उन्हें तुरंत संरक्षण देने की जरूरत है।"
यूके चैरिटी में संरक्षण प्रमुख डॉक्टर लॉरेंस के अनुसार मेंढकों की जो नई प्रजातियां मिली हैं उनका वैश्विक रूप से काफी महत्व है।
उनका कहना है कि "इस इलाके में उभयचरों की खास प्रजातियां मौजूद है। ये जैविक रूप से काफी विविधता लिए हुए हैं लेकिन साथ ही इस इलाके पर इंसानी हस्तक्षेप का खतरा बढ़ता जा रहा है।"

लॉरेंस के मुताबिक, "इन नई प्रजातियों की खोज होने के बाद अब इस इलाके में उभयचरों को संरक्षण देने में हमारी क्या प्राथमिकताएं होनी चाहिए, उसे समझने में आसानी मिलेगी।"
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