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Zero Fatality Corridor: मुंबई-पुणे ई-वे पर 2016 के बाद से दुर्घटना से होने वाली मौतों में 58.3% की आई कमी
Wed, 28 Feb 2024 05:47 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 28 Feb 2024 05:47 PM IST
सार
"जीरो फेटलिटी कॉरिडोर" पहल के कारण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 2016 से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 58.3 प्रतिशत की कमी आई है और 2022 से 32 प्रतिशत की कमी आई है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
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मुंबई -पुणे एक्सप्रेसवे
- फोटो : Social Media
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विस्तार
"जीरो फेटलिटी कॉरिडोर" पहल के कारण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 2016 से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 58.3 प्रतिशत की कमी आई है और 2022 से 32 प्रतिशत की कमी आई है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
इस कमी को "अभूतपूर्व" बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि यह "सड़क को ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम" है।
रिपोर्ट में कहा गया, "2016 में 151 मौतों को दर्ज करने के लिए कुख्यात होने के बाद, 2016 के राष्ट्रीय औसत एक मौत प्रति 2 किमी की तुलना में, लगभग हर 2 किमी पर तीन मौतें, एक्सप्रेसवे को देश के सबसे घातक एक्सप्रेसवे में से एक होने के लिए जाना गया।"
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इस कमी को "अभूतपूर्व" बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि यह "सड़क को ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम" है।
रिपोर्ट में कहा गया, "2016 में 151 मौतों को दर्ज करने के लिए कुख्यात होने के बाद, 2016 के राष्ट्रीय औसत एक मौत प्रति 2 किमी की तुलना में, लगभग हर 2 किमी पर तीन मौतें, एक्सप्रेसवे को देश के सबसे घातक एक्सप्रेसवे में से एक होने के लिए जाना गया।"
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मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर हुआ हादसा।
- फोटो : Social Media
महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC), महाराष्ट्र राजमार्ग पुलिस (HSP), महाराष्ट्र मोटर वाहन विभाग और सेवलाइफ फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे (MPEW) के लिए "जीरो फेटलिटी कॉरिडोर" पहल की शुरुआत के बाद से, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
जैसा कि बताया गया है, यह पहल सड़क सुरक्षा के 5E - अधिनियमन, इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, आपातकालीन देखभाल और जुड़ाव पर केंद्रित व्यापक हस्तक्षेपों पर केंद्रित थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि "इन हस्तक्षेपों की वजह से, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे ने 2016 में 151 मौतों से 31 दिसंबर, 2023 तक 63 मौतों (56 घातक दुर्घटनाओं से) तक सड़क दुर्घटनाओं में 58.3 प्रतिशत की गिरावट देखी।"
जैसा कि बताया गया है, यह पहल सड़क सुरक्षा के 5E - अधिनियमन, इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, आपातकालीन देखभाल और जुड़ाव पर केंद्रित व्यापक हस्तक्षेपों पर केंद्रित थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि "इन हस्तक्षेपों की वजह से, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे ने 2016 में 151 मौतों से 31 दिसंबर, 2023 तक 63 मौतों (56 घातक दुर्घटनाओं से) तक सड़क दुर्घटनाओं में 58.3 प्रतिशत की गिरावट देखी।"
मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर हुआ हादसा।
- फोटो : ANI (File)
MSRDC के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. अनिल कुमार गायकवाड ने कहा, "एक्सप्रेसवे पर होने वाली हर मौत MSRDC के लिए गंभीर चिंता का विषय है। हम यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे कि मुंबई और पुणे के बीच इस महत्वपूर्ण कड़ी पर हम शून्य मौतें हासिल करें। MSRDC ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर विभिन्न सुरक्षा उपायों को लागू किया है और इसकी वजह से रन-ऑफ क्रैश, ऑब्जेक्ट इम्पैक्ट क्रैश, हेड-ऑन क्रैश और खराब दृश्यता से संबंधित दुर्घटनाओं जैसे विभिन्न प्रकार के क्रैश समाप्त हो गए हैं।"
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, एक्सप्रेसवे पर शून्य मौतों को हासिल करने का प्रयास जारी है और MSRDC इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, एक्सप्रेसवे पर शून्य मौतों को हासिल करने का प्रयास जारी है और MSRDC इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर हुआ हादसा।
- फोटो : ANI (File)
सेवलाइफ फाउंडेशन द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि इस पहल के तहत, सड़क इंजीनियरिंग, यातायात प्रवर्तन, आघात देखभाल और सड़क उपयोगकर्ता जुड़ाव के लिए "सैकड़ों हस्तक्षेप" किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, 3,500 से ज्यादा इंजीनियरिंग मुद्दों का समाधान किया गया, यातायात प्रवर्तन सुधार के मुद्दों को बढ़ाया गया, और एक्सप्रेसवे पर आपातकालीन देखभाल और चिकित्सा सहायता को मजबूत किया गया। जिसमें एंबुलेंसों की संख्या बढ़ाना, एंबुलेंस को अपग्रेड करना और कर्मियों को बुनियादी ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट की ट्रेनिंग शामिल है।
इसके अलावा, सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं को संबोधित किया गया और जागरूकता अभियानों के माध्यम से सड़क उपयोगकर्ताओं को जोड़ा गया।
रिपोर्ट के अनुसार, 3,500 से ज्यादा इंजीनियरिंग मुद्दों का समाधान किया गया, यातायात प्रवर्तन सुधार के मुद्दों को बढ़ाया गया, और एक्सप्रेसवे पर आपातकालीन देखभाल और चिकित्सा सहायता को मजबूत किया गया। जिसमें एंबुलेंसों की संख्या बढ़ाना, एंबुलेंस को अपग्रेड करना और कर्मियों को बुनियादी ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट की ट्रेनिंग शामिल है।
इसके अलावा, सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं को संबोधित किया गया और जागरूकता अभियानों के माध्यम से सड़क उपयोगकर्ताओं को जोड़ा गया।