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ऑटो सेक्टर का सबसे बुरा दौर, वित्तीय वर्ष 2022 में मिल सकती है कंपनियों को राहत
Fri, 24 Apr 2020 10:37 AM IST
अवधेश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Fri, 24 Apr 2020 10:37 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
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पहले से ही मंदी की मार झेल रहा ऑटो सेक्टर लॉकडाउन के बाद से और ज्यादा परेशानी का सामना कर रहा है। मौजूदा स्थिति के चलते कंपनियों का प्रोडक्शन ठप पड़ा हुआ है। जानकारों का मानना है कि आने वाला समय भी ऑटो सेक्टर के लिए मुश्किल भरा रह सकता है। न सिर्फ मार्च तिमाही बल्कि आगे भी कम से कम दो तिमाही तक कंपनियों पर दबाव रहने वाला है। फिलहाल मांग बिल्कुल भी नहीं है और शोरूम बंद हैं।
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ब्रोकरेज हाउस प्रभुदास लीलधर के मुताबिक ऑटो सेक्टर के लिए यह बहुत बुरा दौर है। उन्होंने कहा कि बीएस 6 ट्रांसमिशन के चलते भी बाजार में मांग की कमी आई है। आगे भी कुछ पता नहीं है कि काम ठीक से कब शुरू होगा। उम्मीद है कि ऑटो सेक्टर में वित्त वर्ष 2022 में ही रिकवरी शरू होगी और उसके बाद अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटेगी। ब्रोकरेज के अनुसार आगे स्टॉक स्पेसिफिक एक्शन देखने को मिल सकता है और मारुति, आयशर मोटर्स, मदरसन सूमी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और एस्कार्ट जैसे शेयर आगे लाभ दिखा सकते हैं।
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ब्रोकरेज ने मारुति सुजुकी, आयशर मोटर्स, मदरसन सूमी में निवेश करने की सलाह दी है। जबकि अशोक लेलैंड और सिएट टायर्स को एक्यूमुलेट करने की सलाह दी है। वहीं बजाज ऑटो से फिलहाल दूर रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी आम लोगों पर वित्तीय असर पड़ने से बॉइंग सेंटीमेंट कमजोर रहेगा। वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए ईपीएस में 10-35 फीसदी की कटौती की है। इस दौरान वॉल्यूम में 12-13 फीसदी कमी आ सकती है। कंपनियों का ईबीआईटी भी कम रहेगा।
ब्रोकरेज ने प्राइवेट व्हीकल, टू व्हीलर, कमर्शियल व्हीकल और ट्रैक्टर इंडस्ट्री की ग्रोथ 8 फीसदी, 10 फीसदी और 5 फीसदी निगेटिव रहने की आशंका जताई है। बता दें कि लॉकडाउन का सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ा है। जिसका असर अभी आने वाले समय में भी देखने को मिल सकता है।