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Hindi News ›   Automobiles News ›   These Electric Two Wheeer OEMs miss out on New EV subsidy Electric Mobility Promotion Scheme EMPS 2024

Electric Two-Wheeler: ये इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियां नई सब्सिडी व्यवस्था से चूक गईं, जानिए क्यों

Sat, 11 May 2024 11:12 AM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Sat, 11 May 2024 11:12 AM IST
सार

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम (ईएमपीएस) 2024 शुरू की। इस पहल के लिए 500 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

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These Electric Two Wheeer OEMs miss out on New EV subsidy Electric Mobility Promotion Scheme EMPS 2024
Electric Scooter - फोटो : Freepik

विस्तार

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण और इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम (ईएमपीएस) 2024 की शुरुआत की।
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यह एक 500 करोड़ रुपये की योजना है जो देश में इलेक्ट्रिक दो-पहिया और तीन-पहिया वाहन खरीदने वाले उपभोक्ताओं को वित्तीय प्रोत्साहन (फाइनेंशियल इंसेंटिव) प्रदान करती है।

यह योजना 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक चालू है। यह इलेक्ट्रिक वाहन के खरीदार को वाहन की कीमत में कमी के रूप में दिया जाने वाला लाभ है। हालांकि सब्सिडी योजना शुरू हुए एक महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। लेकिन कुछ दोपहिया इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता अपनी सब्सिडी के दावों को हासिल करने में कामयाब नहीं हो पाए हैं।
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यह मुख्य रूप से इसलिए है क्योंकि ये कंपनियां पहले की योजना, फेम II के तहत सब्सिडी के कथित दुरुपयोग को लेकर सरकार की रडार पर थीं।

यह पाया गया है कि हीरो इलेक्ट्रिक, ओकिनावा ऑटोटेक, ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रिवॉल्ट मोटर्स ने अभी तक नई इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रमोशन स्कीम (ईएमपीएस) 2024 के तहत पंजीकरण नहीं कराया है।

 
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फेम II के तहत, इन कंपनियों को सब्सिडी और खरीद प्रोत्साहन की पेशकश की गई थी। हालांकि, 2022 में, मंत्रालय ने 13 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर OEM (ओरिजिनल इक्यूप्मेंट मैन्युफेक्चरर) के खिलाफ सब्सिडी के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। और इनमें से सात निर्माताओं से कथित उल्लंघन के कारण पहले से भुगतान की गई सब्सिडी राशि की वापसी की मांग की थी।

ओकिनावा को 116 करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए कहा गया था, जबकि ग्रीव्स इलेक्ट्रिक को 124 करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए कहा गया था। जबकि कई कंपनियों ने सब्सिडी वापस कर दी, ओकिनावा और हीरो ने मंत्रालय की मांग को चुनौती देने के लिए अदालत का रुख किया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों के कई अधिकारियों ने खुलासा किया कि पहले, भारी उद्योग मंत्रालय ने एक आंतरिक पैनल आयोजित करने के बाद उन्हें किसी भी तरह के गलत कार्य से मुक्त कर दिया था। हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इनमें से किसी भी कंपनी को क्लीन चिट नहीं दी है और कहा है, "मंजूरी नहीं दी गई। यह समाचारों में एक झूठी रिपोर्ट है।"

इन कंपनियों में से एक के प्रमोटर ने कहा है कि वे ईएमपीएस पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं और इस सब्सिडी के बिना रहने वाले हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि यह सब्सिडी व्यवस्था जल्द या बाद में खत्म हो जाएगी।
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