देश के ऑटो सेक्टर में सबसे बड़ा बदलाव 1983 में आया जब देश की पहली छोटी कार मारुति 800 सड़कों पर उतरी। उसके बाद कई गाड़ियां लॉन्च हुईं और वक्त के साथ बंद हो गईं। इनमें कुछ गाड़ियों को ग्राहकों ने नकार दिया, तो कुछ समय के साथ कदमताल न कर सकीं। आज हम आपको उन 'बदनसीब' कारों के बारे में बताने जा रही हैं, जो लॉन्च तो हुईं बेहद शोरशराबे के साथ, लेकिन ग्राहकों का दुलार न पा सकीं...
जनाब, कारें भी होती हैं बदनसीब! तरस गईं ये गाड़ियां ग्राहकों का दुलार पाने के लिए
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Mahindra Quanto
Mahindra Quanto (Xylo) एक असफल प्रोडक्ट था। हालांकि महिंद्रा की क्वांटों में एक बड़ा इंजन था, लेकिन अच्छा नहीं था। कार को लुक के मामले में भी लोगों ने नकार दिया। महिंद्रा कंपनी ने इसे स्टाइलिश के लिए कुछ अपडेट भी किए लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। आज इस कार की गिनती असफल कारों में होती है।
DC Avanti
प्रसिद्ध कार डिजाइनर दिलीप छाबड़िया भारत के लिए एक शानदार कार बनाना चाहते थे। लेकिन कार का लुक लोगों को बिल्कुल भी नहीं लुभा सका। इसका वजन 1600 किलोग्राम था। ग्राहकों को लगा कि कार का निर्माण ही बिना सोचे समझे कर दिया। इंटीरियर डिजाइन भी बेहद खराब था। गाड़ी में एयरबैग तक नहीं लगा था।
Premier Rio
यह कार कंपनी को बर्बाद करने के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार थी। कंपनी ने सोचा कि वो सस्ती कार को लॉन्च कर ग्राहकों को लुभा लेगी। हालांकि ग्राहकों ने इस कार को बिल्कुल भी भाव नहीं दिया। कार पूरी तरह से पीवीसी की बनी हुई थी, कार को देखने में लगता था कि इसे बनाने कोई मेहनत नहीं की गई है। कार का इंटीरियर भी बेहद निराशाजनक था। जिस तरह उस कार का शोर मचा उस तरह से यह धमाल नहीं मचा सकी। प्रीमियर की रियो में 1.3 लीटर मल्टीजेट इंजन था।
Datsun Go / Go+
Datsun Go/Go+ कार को कंपनी ने बहुत ही उत्साह के साथ बाजार में उतारा था। कंपनी को उम्मीद थी कि कार सस्ती होने के कारण ग्राहक इस पर टूट पड़ेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और कार बाजार में बुरी तरह धड़ाम हो गई। हालांकि रेनॉल्ट ने इसे ट्राइबर के साथ ठीक कर दिया है। इस कार की गिनती आज भी असफल कारों में ही होती है।