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नई कार खरीदना बेहतर होगा या लीज पर लेना, जानें क्या है पूरा गणित

Sat, 06 Jul 2019 03:35 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 06 Jul 2019 03:35 PM IST
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should you buy the new car on loan or take on lease subscription or rent
Car Buying Vs Lease - फोटो : AmarUjala

आजकल लोग घर, घरेलू उपकरण यहां तक कि कार लेने से पहले पूछते हैं कि किराये पर लें या खरीदें। बदलती लाइफस्टाइल और ट्रांसफरेबल जॉब्स के चलते लोग अब कारें खरीदने में परहेज कर रहे हैं। ऐसे लोगों की बढ़ती तादाद को देखते हुए ह्यूंदै, मर्सिडीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, फिएट और स्कोडा जैसे ऑटोमोबाइल कंपनियां आजकल ‘किराये’ पर अपनी कारें दे रही हैं। लेकिन बड़ा सवाल फिर वही है कि क्या किराये पर गाड़ी लेना बेहतर है या खरीदना...

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क्या है लीज स्कीम

आईए सबसे पहले जानते हैं कि ये लीज स्कीम कैसे काम करती है। इस स्कीम के तहत सीधे कार निर्माता से गाड़ी ले सकेंगे। वहीं इसमें गाड़ी की रीसेल वेल्यू की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। साथ ही डाउनपेमेंट और ईएमआई चुकाने की भी टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। हालांकि इसमें व्हीकल का रजिस्ट्रेशन कानूनी तौर पर कार कंपनी के नाम ही रहता है।

वहीं, अगर हर दो-तीन साल में आपकी जॉब लोकेशन बदल जाती है, और आप किसी दूसरे शहर में शिफ्ट हो जाते हैं, और रोज ऑफिस जाने के लिये व्हीकल की जरूरत पड़ती है, तो आप लीज पर कार ले सकते हैं। लीज प्लान में आपको कार मॉडल, सबस्क्रिप्शन प्लान और माइलेज वगैरहा सलेक्ट करना होगा। इस प्लान में इंश्योरेंस कवर, रेंटल, कार स्विचिंग और मैंटेनेंस शामिल है। लीज पर कारें 12 महीने से लेकर 48 महीने के लिए मिलती हैं। जिसके लिए पहले महीने में पूरे साल का इंश्योरेंस देना पड़ता है। वहीं लीज खत्म होने के बाद आप दूसरा व्हीकल चुन सकते हैं, या फिर लीज प्लान को आगे बढ़ा सकते हैं।
 

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क्या कार रेंट पर लेनी चाहिये

कार रेंट पर लेना तभी ठीक है जब आपको कार लंबे वक्त के लिए नहीं रखनी है। कार रेंट पर लेने से पहले यह कर लें कि कार आपको केवल दो या तीन साल के लिए ही लेनी है। अन्यथा कार रेंट पर लेना आपको मंहगा पड़ सकता है। ऊपर दिये उदाहरण में Hyundai Creta E+ 1.4 CRDi अगर आप 48 महीने की लीज पर लेते हैं, तो आपको हर महीने 42,700 रुपये चुकाने होंगे। इस तरह से आप 48 माह में 13.04 लाख रुपये देते हैं।  

वहीं अगर आप इतनी ही अवधि के लिये कार लोन पर लेते हैं, तो इसकी डाउनपेमेंट आपको 3.85 लाख रुपये पड़ेगी। साथ ही, 48 महीने की ईएमआई के तौर पर 15,521 रुपये देने पड़ते हैं। इस तरह से आप कंपनी को 11.31 लाख रुपये दे देते हैं। कार खरीदने का फायदा तभी है जब आप कार को लंबे वक्त के लिये खरीदते हैं। इसलिये कार खरीदने या रेंट पर लेने से पहले गुणा-भाग जरूर कर लें।
 

कार खरीदना पड़ता है सस्ता या महंगा, Hyundai Creta E+ CRDi का गणित

लीज VS कार खरीदना

लीज

36 महीने

48 महीने

खरीदना

36 महीने

48 महीने

अपफ्रंट पेमेंट

42,700 रुपये

42,700 रुपये

कार की
एक्स-शोरूम कीमत

9,99,990 रुपये

9,99,990 रुपये

मैंटेनेंस के साथ पहले साल मंथली फीस

28,100 रुपये

28,100 रुपये

डाउनपेमेंट

3,85,697 रुपये

3,85,697 रुपये

12 महीने बाद मंथली फीस

22,900 रुपये

22,900 रुपये

लोन अमाउंट

6,14,293 रुपये

6,14,293 रुपये

औसत जीएसटी प्रति माह

2,956 रुपये

2,904 रुपये

ब्याजदर

9.80 प्रतिशत

9.80 प्रतिशत

इंश्योरेंस रिन्यू

85,400 रुपये

1,28,100 रुपये

ईएमआई

19,763.88 रुपये

15,521.12 रुपये

डाउनपेमेंट और रोड टैक्स पर ब्याज

-1,19,425 रुपये

-1,67,847 रुपये

अदा करने वाली राशि

7,11,499.68 रुपये

7,45,013.76 रुपये

कुल राशि

10,01,891 रुपये

13,03,945 रुपये

कुल राशि (डाउनपेमेंट समेत)

10,97,196.68 रुपये

11,30,710.76 रुपये

 

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थोड़ा और समझें

अगर किसी कार की ऑन-रोड कीमत तकरीबन 50 लाख रुपये है, तो आपको हर महीने ईएमआई के तौर पर 1.19 लाख रुपये चुकाने पड़ते हैं। इस हिसाब से आप डाउनपेमेंट, इंश्योरेस और मैंटेनेंस मिलाकर तीन साल में तकरीबन 60 लाख रुपये चुका देते हैं। वहीं अगर आप लीज पर कार लेते हैं, तो आपको हर महीने 1.05 लाख रुपये चुकाने पड़ते हैं और तीन साल में आप 37 लाख रुपये चुका देते हैं, साथ ही आपको कार भी वापस करनी पड़ेगी।

मिलेगी कमर्शियल नंबरप्लेट

कार लीज पर लेने से पहले एक बात जरूर जान लें कि मंथली सबस्क्रिप्शन पर मिलने वाली कारों पर कमर्शियल नंबरप्लेट मिलती है। यानी कि इन पर आपको सफेद बैकग्राउंड पर काले अक्षरों से लिखी नंबर प्लेट नहीं मिलेगी, जो प्राइवेट कारों पर मिलती है। अगर आप रोज दिल्ली से नोएडा या गुरुग्राम जाते हैं, तो आपको स्टेट टैक्स चुकाना पड़ता है।
 

नहीं करा सकते मॉडिफिकेशन

ज्यादातर लोगों का सपना होता है कि वे अपनी कार को अपनी च्वाइस से मॉडिफाई कराते हैं, तो लीज व्हीकल में यह संभव नहीं है। इसकी वजह है कि ज्यादातर लीज कॉन्ट्रैक्ट्स के चलते कार में स्टीरियो सिस्टम या अपनी मर्जी के स्पीकर्स तक नहीं लगवा पाएंगे। ऐसे में कार खरीदना ही बेहतर ऑप्शन है। जिसमें आप अपनी मर्जी की लाइट्स, सीट फैब्रिक, अलॉय व्हील्स भी लगवा पाएंगे।
 

मैंटेनेंस की टेंशन नहीं

वहीं अगर आप अपनी प्राइवेट कार ड्राइवर को देना पसंद नहीं करते हैं, तो लीज पर कार ले सकते हैं। क्योंकि ज्यादातर ड्राइवर रफ ड्राइविंग करते हैं, ऐसे में प्राइवेट कार की मैंटेनेंस काफी महंगी पड़ती है। वहीं अगर आप लीज वाली कार ड्राइवर को देते हैं, तो मैंटेनेंस की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। क्योंकि लीज की कारों में मैंटेनेंस की जिम्मेदारी कंपनी की होती है। कार कंपनियां मैंटेनेंस का खर्च खुद वहन करती हैं। वहीं अगर आप ऑफिस जाने के लिये रोजाना लंबी दूरी तय करते हैं, तो उनके लिए भी लीज पर कार लेना फायदेमंद रहेगा।
 

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