फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Automobiles News ›   SC resumes hearing on issue of LMV driving licence

Supreme Court: हल्के मोटर व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस मामले पर सुप्रीम कोर्ट जारी रखेगा सुनवाई, जानिए पूरा माजरा

Wed, 21 Aug 2024 01:34 PM IST
अमित कुमार ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Wed, 21 Aug 2024 01:34 PM IST
सार

हल्के मोटर व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस मामले में देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मामले की सुनवाई जारी रहेगी। इस मामले को संसद में विंटर सेशन से पहले पेश किया जा सकता है। जानें क्या है पूरा मामला। 
 

विज्ञापन
SC resumes hearing on issue of LMV driving licence
Supreme Court - फोटो : FREEPIK

विस्तार

देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह निर्धारित किया है कि हल्के मोटर वाहन वाले चालकों के पास जो ड्राइविंग लाइसेंस है, क्या उसी के जरिए ट्रांसपोर्ट वाहन जिनका वजन 7,500 किलोग्राम से कम है उनके लिए भी कानूनी तौर पर जारी रख सकते हैं। 

विज्ञापन

पांच जजों की संवैधानिक पीठ का नेतृत्व करते हुए प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने ऑटोर्नी जनरल आर वेंकटरमानी के रहते हुए निर्णय लिया। केंद्र की तरफ से आर वेंकटरमानी ने कहा कि संविधान में मोटर व्हीकल एक्ट 1988 को लगभग तैयार कर लिया है, मगर संशोधन को संसद की पटल पर जाना बाकी है। 

विज्ञापन

संसद में पेश किया जाएगा संशोधन

शीर्ष वकील ने कहा कि संशोधन बिल को संसद के शीतकालीन सत्र से पहले पेश किया जा सकता है। ऐसे में संविधान पीठ संसद द्वारा इसे स्पष्ट करने के इंतजार कर सकती है या फिर इस मामले को आगे लेकर जा सकती है। 
संविधान पीठ में पांच जजों में जस्टिस हरिकेष रॉय, पीएस नरसिम्हा, पंकज मिथल और मनोज मिश्रा ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में पहले ही काफी ही समय दिया जा चुका है। ऐसे में संसद द्वारा संशोधन का इंतजार किए बिना एमवी एक्ट (मोटर व्हीकल कानून) की सुनवाई को जारी रखा जाए। 

बीमा कंपनी ने नहीं दिया था क्लेम

इस मामले में मुख्य कानूनी सवाल यह है कि कई मामलों में बीमा कंपनी हादसों के क्लेम देने में अनाकानी करती है, क्योंकि हल्के मोटर व्हीकल के ड्राइविंग लाइसेंस के साथ ट्रांसपोर्ट व्हीकल चलाए जा रहे होते हैं। इससे पहले 16 अप्रैल को संविधान पीठ द्वारा मामले की सुनवाई के दौरान ऑटोर्नी जनरल ने एक नोट जमा करते हुए कहा था कि इस मामले में संशोधन को आगे लेकर जाने का काम सड़क और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित है। मगर इसे आम चुनावों के बाद नई लोकसभा द्वारा पेश किया जाएगा। 

विज्ञापन

जानिए क्या है मामला

अदालत में जारी इस मामले से लाखों लोगों को प्रभाव पड़ेगा। शीर्ष अदालत ने इस पर कहा कि इस मामले में सरकार को नए नजरिए के साथ पॉलिसी को देखने की जरूरत है। मुकुंद देवनगन और ओरियंटल इंश्योरेंस के मामला संविधान पीठ के पास पहुंचने के बाद केंद्रीय मंत्रालय ने इस कानून में संशोधन करने के लिए अदालत के फैसले के बाद मामले को स्वीकार किया। 
मुकुंद देवनगन मामले में शीर्ष अदालत की तीन जजों की पीठ ने ट्रांसपोर्ट व्हीकल जिनका वजन 7,500 किलोग्राम से ज्यादा नहीं है, उन्हें हल्के मोटर व्हीकल के तहत मान्य नहीं किया जाएगा। पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि मुकुंद के मामले की तरह ही देशभर के लाखों वाहन चालक काम कर रहे हैं। यह एक संवैधानिक समस्या नहीं, बल्कि स्टैशूचरी मामला है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें ऑटोमोबाइल समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। ऑटोमोबाइल जगत की अन्य खबरें जैसे लेटेस्ट कार न्यूज़, लेटेस्ट बाइक न्यूज़, सभी कार रिव्यू और बाइक रिव्यू आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed