Ethanol Blending: पेट्रोल में 21% तक एथेनॉल मिलाने की तैयारी, आपकी कार, माइलेज और इंजन पर क्या होगा असर
केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि वाहनों की सहनशीलता के स्तर और मौजूदा मानकों के अनुरूप, पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत से थोड़ा बढ़ाकर 21प्रतिशत तक किया जा सकता है।
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विस्तार
केंद्र सरकार ने हाल ही में संकेत दिया है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 21 प्रतिशत तक किया जा सकता है। यह बढ़ोतरी वाहनों की सहन क्षमता और मौजूदा मानकों के अनुरूप होगी।
यह कदम भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और बायोफ्यूल के उपयोग को बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।
सरकार ने क्या कहा है?
सवाल के जवाब में भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी ने कहा कि सरकार बायोफ्यूल के उपयोग को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्डर्स (BIS) एथेनॉल मिश्रण में ±1 प्रतिशत की छूट देता है, जिससे इसे 21 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “E20 पहले ही लागू हो चुका है और निर्धारित सीमा के भीतर थोड़ी बढ़ोतरी संभव है।”
इथेनॉल ब्लेडेड पेट्रोल कार्यक्रम से क्या फायदा हुआ?
इथेनॉल ब्लेडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम से अब तक बड़े आर्थिक फायदे हुए हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इससे हर साल करीब 4.5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की बचत हुई है। और लगभग 1.65 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई गई है।
क्या सभी वाहनों के लिए ज्यादा एथेनॉल सही है?
विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा एथेनॉल मिश्रण सभी वाहनों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता।
अप्रैल 2023 के बाद बने वाहन E20 के अनुकूल हैं, लेकिन पुराने वाहनों में इसके कारण दिक्कतें आ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से पहले इंजनों को इसके अनुरूप डिजाइन किया जाना जरूरी है।
क्या एथेनॉल इंडस्ट्री इस बदलाव के पक्ष में है?
एथेनॉल उद्योग इस सीमा को बढ़ाने की मांग कर रहा है, क्योंकि उसके पास उत्पादन की अतिरिक्त क्षमता है।
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने हाल ही में कहा कि नवंबर से शुरू होने वाले अगले एथेनॉल आपूर्ति वर्ष से पहले इस पर फैसला लिया जा सकता है।
क्या सरकार ने इस पर कोई समिति बनाई है?
सरकार ने इस दिशा में रोडमैप तय करने के लिए पेट्रोलियम, खाद्य, भारी उद्योग और सड़क परिवहन मंत्रालयों के प्रतिनिधियों के साथ एक अंतर-मंत्रालयी पैनल का गठन किया है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन क्या हैं और उनका क्या महत्व है?
हनीफ कुरैशी ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFV) की संभावनाओं पर भी जोर दिया। ये वाहन 85 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चल सकते हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसे टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर विकसित किए जा रहे हैं, जो भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता को और कम कर सकते हैं।
E20 क्या है और यह कैसे काम करता है?
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है।
एथेनॉल गन्ना और मक्का जैसी फसलों से बनाया जाता है और इसका ऑक्टेन स्तर (लगभग 95 RON) अधिक होता है, जिससे इंजन का दहन बेहतर और स्मूद होता है।
1 अप्रैल 2025 से पेट्रोल पंपों पर 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है।
E20 का वाहनों पर क्या असर पड़ता है?
E20 का असर वाहन के प्रकार पर निर्भर करता है।
नए वाहन इसे आसानी से संभाल सकते हैं, लेकिन पुराने वाहनों में माइलेज थोड़ा कम हो सकता है और लंबे समय में इंजन के कुछ हिस्सों पर असर पड़ सकता है।
E20 और E10 में क्या अंतर है?
E10 (10 प्रतिशत एथेनॉल) की तुलना में E20 बेहतर दहन और उच्च ऑक्टेन देता है। हालांकि ऊर्जा दक्षता में हल्का अंतर हो सकता है।
क्या एथेनॉल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है?
एथेनॉल पौधों से बनने वाला ईंधन है, इसलिए यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकता है।
हालांकि इसके फायदे उत्पादन प्रक्रिया पर निर्भर करते हैं।
कुल मिलाकर, यह बदलाव संभावनाओं से भरा है, लेकिन वाहन संगतता और दक्षता जैसी चुनौतियों के कारण इसे धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है।