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C-DEP रिपोर्ट: ऑटो पीएलआई स्कीम से बढ़ा प्रोडक्शन, लेकिन निर्यात में पिछड़ रहे भारतीय ई-टू-व्हीलर

Fri, 27 Feb 2026 11:57 PM IST
Suyash Pandey टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Fri, 27 Feb 2026 11:57 PM IST
सार

Auto PLI Scheme: C-DEP की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की 'ऑटो PLI योजना' का सीधा फायदा बड़ी कंपनियों को मिल रहा है। इसकी लागत में 13-16% की कमी आई है। हालांकि हैरान करने वाली बात यह है कि देश के 77% इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर एक्सपोर्ट को संभालने वाली और इनोवेशन (R&D) करने वाली 'नॉन-पीएलआई' कंपनियां इस रेस में पिछड़ रही हैं। रिपोर्ट में सख्त चेतावनी दी गई है कि अगर सरकार ने अपनी नीतियों और फंड वितरण में सुधार कर इनोवेशन को बढ़ावा नहीं दिया तो भारत का यह उभरता हुआ एक्सपोर्ट बाजार जल्द ही चीनी कंपनियों के कब्जे में जा सकता है।

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India’s Auto PLI Scheme Under Scrutiny as Report Flags Innovation Gap in EV Sector
Auto PLI Scheme - फोटो : X

विस्तार

आज सड़कों पर इलेक्ट्रिक स्कूटरों की भरमार है। भारत सरकार की ऑटो पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इनिशिएटिव) योजना ने इनका प्रोडक्शन तेजी से बढ़ाया है। लेकिन क्या इस स्कीम का फायदा सिर्फ बड़ी कंपनियों को मिल रहा है और नई तकनीक लाने वाले स्टार्टअप्स पीछे छूट रहे हैं? थिंक टैंक C-DEP (सेंटर फॉर डिजिटल इकोनॉमी पॉलिसी रिसर्च) की एक ताजा रिपोर्ट में कुछ ऐसे ही चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आइए इसे लेख के जरिए समझते हैं।

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क्या है पूरा मामला?

सरकार की पीएलआई स्कीम का मकसद कंपनियों को ज्यादा प्रोडक्शन करने पर इनाम देना है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन कंपनियों को पीएलआई की मंजूरी मिली है उनकी लागत में 13-16% तक की कमी आई है। इससे हुआ ये कि इन कंपनियों ने अपने स्कूटर्स के दाम आक्रामक तरीके से कम कर दिए और घरेलू बाजार (भारत) में अपना दबदबा बना लिया। लेकिन उम्मीद थी कि ये कंपनियां भारत से बाहर (एक्सपोर्ट) भी अपने वाहन बेचेंगी जो कि नहीं हो रहा है।

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नॉन-पीएलआई कंपनियों का बुरा हाल

शुरुआती दौर में जिन कंपनियों ने नई तकनीक (R&D) लगाकर भारत में ईवी बाजार खड़ा किया था, वे अब हाशिए पर जा रही हैं। बिना पीएलआई वाली कंपनियों की ग्रोथ का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है:

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  • FY22 में ग्रोथ: +407% (जबरदस्त तेजी)
  • FY24 में ग्रोथ: -33% (गिरावट)
  • FY25 में ग्रोथ: -11% (लगातार गिरावट)

एक्सपोर्ट (निर्यात) में चौंकाने वाला सच

सबसे बड़ी हैरानी की बात एक्सपोर्ट के आंकड़ों में है:
भारत से होने वाले कुल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर एक्सपोर्ट का 77% हिस्सा नॉन-पीएलआई कंपनियों (जिन्हें सब्सिडी नहीं मिल रही) से आता है। दूसरी तरफ, 13-16% लागत का फायदा उठाने के बावजूद, पीएलआई वाली कंपनियों का एक्सपोर्ट में योगदान 25% से भी कम है।

चीन से बढ़ता खतरा

अगर नई तकनीक और इनोवेशन करने वाली भारतीय कंपनियों को सपोर्ट नहीं मिला तो भारत अपने पुराने एक्सपोर्ट बाजार (जैसे नेपाल, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका) खो सकता है। इन जगहों पर याडिया और सुनरा जैसी चीनी कंपनियां तेजी से कब्जा जमा रही हैं। C-DEP के अध्यक्ष जैजित भट्टाचार्य ने साफ चेतावनी दी है कि, "पीएलआई स्कीम ने गाड़ियां तो ज्यादा बनवाईं, लेकिन जो कंपनियां नई तकनीकों में पैसा लगा रही हैं, उन्हें इससे नुकसान हो रहा है।"

फंड्स का वितरण भी धीमा

योजना के तहत फंड बांटने की रफ्तार भी काफी धीमी है। दिसंबर 2025 तक 3,754 करोड़ रुपये बांटने का लक्ष्य था, लेकिन सिर्फ 2,322 करोड़ रुपये ही दिए गए। यानी कुल बजट का सिर्फ 9% हिस्सा ही कंपनियों तक पहुंचा है।

रिपोर्ट में क्या सुझाव दिए गए हैं?

इस असंतुलन को ठीक करने के लिए C-DEP ने सरकार को कुछ अहम सुझाव दिए हैं:

  • इनोवेशन को बढ़ावा: नई तकनीक और R&D पर काम करने वाली कंपनियों के लिए एक अलग 'टार्गेटेड विंडो' खोली जाए।
  • लोकल को प्राथमिकता: जो कंपनियां भारत में ही बने पार्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं, उन्हें पहल मिले।
  • 'पहले आओ, पहले पाओ': यह नियम लागू हो ताकि जो कंपनियां काम नहीं कर रही हैं, वे बेवजह फंड्स और अप्रूवल रोक कर न बैठें।
  • लगातार रिव्यू: जो कंपनियां टारगेट पूरा नहीं कर रही हैं, उन्हें स्कीम से बाहर कर संसाधनों का सही इस्तेमाल हो।

 

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