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Car Modifications: अगर आपने कार में कराए ये बदलाव, तो रद्द हो सकता है इंश्योरेंस, जानें ये जरूरी बातें
Fri, 19 Apr 2024 01:26 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 19 Apr 2024 01:26 PM IST
सार
कार में बदलाव करवाना भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आपकी कार में मूल रूप से बड़े बदलाव करना न सिर्फ गैरकानूनी है। बल्कि ऐसा करना आपकी बीमा पॉलिसी को भी रद्द कर सकता है।
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Car Modification
- फोटो : iStock
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विस्तार
कार में बदलाव करवाना भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। क्योंकि अब वाहन मालिक अपने वाहनों में अपनी पर्सनल फीलिंग जोड़ना चाहते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि आपकी कार में मूल रूप से बड़े बदलाव करना न सिर्फ गैरकानूनी है। बल्कि ऐसा करना आपकी बीमा पॉलिसी को भी रद्द कर सकता है। आम तौर पर, दो तरह के कार बीमा होते हैं - थर्ड-पार्टी और कॉम्प्रिहेंसिव बीमा पॉलिसी। कॉम्प्रिहेंसिव बीमा पॉलिसी आपके वाहन को हुए नुकसान को भी कवर करता है। यहां हम आपको बता रहे हैं कि वाहन में किस तरह के बदलाव (मॉडिफिकेशन) आपके बीमा कवरेज को खतरे में डाल सकते हैं।
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एक्सटीरियर अपडेट
पेंट का नया कोट (जैसा कि आरसी पर जिक्र किया गया है) या स्टिकर (संयमित मात्रा में) जैसे मामूली बदलावों में आम तौर पर कोई समस्या नहीं होती है। लेकिन फ्लेयर्ड फेंडर, कस्टम हुड और चौड़े टायर जैसे व्यापक बॉडी वर्क मॉडिफिकेशन बीमा कंपनी के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं। क्योंकि ये बदलाव वाहन की संरचनात्मक अखंडता (स्ट्रक्चरल इंटीग्रीटि) और हैंडलिंग से समझौता कर सकते हैं। जिससे बीमाकर्ताओं की नजर में जोखिम बढ़ जाता है।
पेंट का नया कोट (जैसा कि आरसी पर जिक्र किया गया है) या स्टिकर (संयमित मात्रा में) जैसे मामूली बदलावों में आम तौर पर कोई समस्या नहीं होती है। लेकिन फ्लेयर्ड फेंडर, कस्टम हुड और चौड़े टायर जैसे व्यापक बॉडी वर्क मॉडिफिकेशन बीमा कंपनी के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं। क्योंकि ये बदलाव वाहन की संरचनात्मक अखंडता (स्ट्रक्चरल इंटीग्रीटि) और हैंडलिंग से समझौता कर सकते हैं। जिससे बीमाकर्ताओं की नजर में जोखिम बढ़ जाता है।
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इसके अलावा, आफ्टर-मार्केट लाइट्स (अलग रंग और तीव्रता की) जैसे बदलाव वाहन की विजिबिलीटी पर असर डाल सकते हैं। अगर वाहन में कराए जाने वाले इन बदलावों के लिए पहले से अप्रूवल नहीं लिया गया है, तो बीमा क्लेम को खारिज हो सकता है।
परफॉर्मेंस मॉडिफिकेशन
टर्बोचार्जर या नाइट्रस ऑक्साइड सिस्टम का इस्तेमाल करके इंजन के परफॉर्मेंस को बढ़ाने जैसे बदलाव बीमा कंपनियों के लिए खास तौर पर चिंता का विषय होते हैं। ये बदलाव वाहन के पावर और स्पीड को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
टर्बोचार्जर या नाइट्रस ऑक्साइड सिस्टम का इस्तेमाल करके इंजन के परफॉर्मेंस को बढ़ाने जैसे बदलाव बीमा कंपनियों के लिए खास तौर पर चिंता का विषय होते हैं। ये बदलाव वाहन के पावर और स्पीड को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
इसी तरह, कार की ऊंचाई को कम करने या बढ़ाने के लिए सस्पेंशन सिस्टम में किए गए बदलाव, कार को एक कस्टम रूप दे सकते हैं। लेकिन यह कार की हैंडलिंग और ग्राउंड क्लियरेंस पर बुरा असर डाल सकते हैं। ऐसे मामलों में भी, बीमा कवरेज संबंधी चिंताओं का खतरा होता है।
मॉडिफिकेशन के समय बीमाकर्ता को क्यों बताना चाहिए?
जब आप बीमा करा रहे होते हैं, तो वे आपकी कार का डिटेल्स नोट करेंगे और पॉलिसी लागत की गणना करेंगे। यदि आप अपनी कार में बदलाव करते हैं और उसका मूल्य बढ़ जाता है, तो आपको बीमा कंपनी को इन बदलावों के बारे में बताना होगा।
यदि आप उन्हें सूचित नहीं करते हैं और आपकी कार प्राकृतिक आपदा जैसी घटना में क्षतिग्रस्त हो जाती है। तो बीमाकर्ता आपके दावे को अस्वीकार कर सकता है या सिर्फ पॉलिसी में शामिल ओरिजिनल पार्ट्स के लिए भुगतान कर सकता है। इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए बीमाकर्ता को अपडेट रखना जरूरी हो जाता है।
जब आप बीमा करा रहे होते हैं, तो वे आपकी कार का डिटेल्स नोट करेंगे और पॉलिसी लागत की गणना करेंगे। यदि आप अपनी कार में बदलाव करते हैं और उसका मूल्य बढ़ जाता है, तो आपको बीमा कंपनी को इन बदलावों के बारे में बताना होगा।
यदि आप उन्हें सूचित नहीं करते हैं और आपकी कार प्राकृतिक आपदा जैसी घटना में क्षतिग्रस्त हो जाती है। तो बीमाकर्ता आपके दावे को अस्वीकार कर सकता है या सिर्फ पॉलिसी में शामिल ओरिजिनल पार्ट्स के लिए भुगतान कर सकता है। इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए बीमाकर्ता को अपडेट रखना जरूरी हो जाता है।