IEA Report: आईईए की चेतावनी, 2050 तक बढ़ती रहेगी तेल-गैस की मांग, जलवायु लक्ष्य अब खतरे में
IEA: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अपनी ताजा वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक रिपोर्ट में वैश्विक तेल और गैस की मांग 2050 तक बढ़ने का अनुमान लगाया है।
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अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने बुधवार को कहा कि वैश्विक तेल और गैस की मांग वर्ष 2050 तक बढ़ सकती है। यह एजेंसी के पहले के अनुमान से अलग है। पुराने अनुमानों में एजेंसी ने उम्मीद जताई थी कि दुनिया तेजी से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ेगी। आईइए का कहना है कि मौजूदा रुझानों को देखते हुए दुनिया जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम रह सकती है।
पश्चिमी देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर नजर रखने वाली यह संस्था हाल के वर्षों में अमेरिका के दबाव में आई है, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कंपनियों से तेल और गैस उत्पादन को और बढ़ाने की अपील की थी। जो बाइडन प्रशासन के दौरान आईईए ने भविष्यवाणी की थी कि वैश्विक तेल की मांग इस दशक के भीतर ही चरम पर पहुंच जाएगी और अगर दुनिया जलवायु लक्ष्य हासिल करना चाहती है, तो तेल और गैस में और निवेश की जरूरत नहीं होगी।
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ट्रंप प्रशासन में ऊर्जा सचिव रहे क्रिस राइट ने आईईए के इस अनुमान को निरर्थक बताया था। बताते चलें कि आईईए को सदस्य देशों में फंडिंग मिलती है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान अमेरिका का है। इस विश्लेषण और आंकड़े दुनिया भर की सरकारों व कंपनियों की ऊर्जा नीतियों की नींव बनते हैं।
ऊर्जा खपत में तेज़ बढ़ोतरी
बुधवार को जारी अपनी वार्षिक वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक रिपोर्ट में आईईए ने बताया कि मौजूदा नीतियों के आधार पर वर्ष 2050 तक तेल की मांग 11.3 करोड़ बैरल प्रति दिन तक पहुंच सकती है, जो 2024 की खपत से करीब 13 प्रतिशत अधिक है। एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि 2035 तक वैश्विक ऊर्जा की मांग 90 एक्साजूल बढ़ेगी, जो वर्तमान स्तर से करीब 15 प्रतिशत अधिक होगी।
इस अनुमान में केवल मौजूदा सरकारी नीतियों को ध्यान में रखा गया है न कि जलवायु लक्ष्यों को पाने की महत्वाकांक्षाओं को। आईईए ने आखिरी बार 2019 में मौजूदा नीतियों पर आधारित परिदृश्य अपनाया था, लेकिन 2020 से उसने अपने आकलन को स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और नेट ज़ीरो उत्सर्जन के अनुरूप किया था। इस वर्ष की रिपोर्ट में उसने जलवायु प्रतिज्ञाओं वाले परिदृश्य को शामिल नहीं किया है।
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आईईए का कहना है कि उसने 2031-2035 की अवधि के लिए देशों के नए जलवायु लक्ष्यों का मूल्यांकन करने की योजना बनाई थी, लेकिन पर्याप्त देशों ने अपने लक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए, इसलिए स्पष्ट तस्वीर बनाना संभव नहीं हो सका। एजेंसी के घोषित नीतियों वाले परिदृश्य में, जिसमें केवल प्रस्तावित नीतियों को शामिल किया गया है, तेल की मांग लगभग 2030 के आसपास चरम पर पहुंच सकती है। हालांकि आईईए का कहना है कि उसके परिदृश्य पूर्वानुमान नहीं हैं, बल्कि संभावित परिणामों की एक श्रृंखला को दर्शाते हैं।
एलएनजी क्षमता में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 में नए एलएनजी प्रोजेक्ट्स के लिए निवेश निर्णयों में तेजी आई है। 2030 तक लगभग 300 अरब घन मीटर नई एलएनजी क्षमता शुरू होने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक आपूर्ति में 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी। मौजूदा नीतियों के अनुसार वैश्विक एलएनजी बाजार 2024 के 560 अरब घन मीटर से बढ़कर 2035 तक 880 अरब घन मीटर और 2050 तक 1,020 अरब घन मीटर तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि ऊर्जा की बढ़ती मांग से प्रेरित होगी। खासकर डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में।
जलवायु पर बढ़ता खतरा
आईईए ने कहा कि 2025 में डेटा सेंटरों में वैश्विक निवेश 580 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो तेल आपूर्ति पर खर्च होने वाले वार्षिक 540 अरब डॉलर से अधिक होगा। हालांकि रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मौजूदा परिदृश्यों के अनुसार वैश्विक तापमान में वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाएगी। यह लक्ष्य 2015 के पैरिस समझौते में तय किया गया था। जहां 190 से अधिक देशों ने यह वादा किया था कि वे धरती के तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं बढ़ने देंगे। आईईए की रिपोर्ट का कहना है कि केवल नेट जीरो परिदृश्य में ही तापमान दोबारा नीचे आ सकता है। वह भी तब जब कार्बन डाइऑक्साइड को वातावरण से हटाने वाली तकनीक बड़े पैमाने पर लागू की जाए।