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EV: जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने कहा- ICE पुरानी टेक्नोलॉजी है, भारतीय निर्माता वैश्विक ईवी बाजार पर करें कब्जा
Sat, 06 Apr 2024 03:24 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 06 Apr 2024 03:24 PM IST
सार
G20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत का कहना है कि इंटरनल कंब्शन इंजन (ICE) एक "पुरानी टेक्नोलॉजी" है और भविष्य इलेक्ट्रिक वाहनों का है।
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अमिताभ कांत
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विस्तार
G20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत का कहना है कि इंटरनल कंब्शन इंजन (ICE) एक "पुरानी टेक्नोलॉजी" है और भविष्य इलेक्ट्रिक वाहनों का है। उन्होंने भारत को इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माताओं को ईवी का सबसे बड़ा निर्माता और निर्यातक बनाने के लिए प्रेरित किया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कांत ने 6 अप्रैल को बंगलूरू में आयोजित एक कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान कहा, "हम दुनिया में दोपहिया वाहनों के सबसे बड़े निर्यातक हैं, ICE मेरे अनुसार एक पुरानी टेक्नोलॉजी है और बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों का दबदबा है। और इसलिए ईवी कंपनियों को सिर्फ भारत के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए भी निर्माण करना चाहिए।"
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कांत ने 6 अप्रैल को बंगलूरू में आयोजित एक कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान कहा, "हम दुनिया में दोपहिया वाहनों के सबसे बड़े निर्यातक हैं, ICE मेरे अनुसार एक पुरानी टेक्नोलॉजी है और बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों का दबदबा है। और इसलिए ईवी कंपनियों को सिर्फ भारत के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए भी निर्माण करना चाहिए।"
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Electric Scooter
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कांत ने भारतीय ईवी कंपनियों को वैश्विक बाजार के लिए इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बनाने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा, "यह उद्यमियों की मानसिकता है। भारत एक बड़ा बाजार है, लेकिन हमें यह एहसास नहीं है कि निर्यात बाजार भारत में आपको मिलने वाले से 5 गुना ज्यादा देता है। हर बार भारत का विकास निर्यात के कारण हुआ है।" उन्होंने कहा कि 2030 तक पूरी दुनिया सिर्फ इलेक्ट्रिक की तरफ जाएगी और भारत को इस मौके का फायदा जरूर उठाना चाहिए।
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कांत के ये शब्द ऐसे समय में आए हैं, जब केंद्र सरकार ने फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ (हाइब्रिड एंड) इलेक्ट्रिक वाहन (फेम) योजना के लिए बजट आवंटन को लगभग 44 प्रतिशत घटाकर वित्त वर्ष 2025 के लिए 2,671 करोड़ रुपये कर दिया है। जिसकी वजह से भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में कमी आ सकती है।
सरकार द्वारा 1 फरवरी, 2024 को प्रकाशित बजट आवंटन दस्तावेज के मुताबिक, वित्त वर्ष 24 में सरकार ने फेम योजनाओं के लिए लगभग 4,807 करोड़ रुपये का संशोधित अनुमान आवंटित किया था।
सरकार द्वारा 1 फरवरी, 2024 को प्रकाशित बजट आवंटन दस्तावेज के मुताबिक, वित्त वर्ष 24 में सरकार ने फेम योजनाओं के लिए लगभग 4,807 करोड़ रुपये का संशोधित अनुमान आवंटित किया था।
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ईवी केंद्रित पाठ्यक्रम बनाएं
ईवी उद्योग में कौशल विकास की बात करते हुए, कांत ने कहा कि केंद्र ने संस्थानों के भीतर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पाठ्यक्रमों पर लगभग 20 आईआईटी और आईआईआईटी के साथ काम किया है। उन्होंने कहा, "हमें डेटा वैज्ञानिकों, प्रॉडक्ट डेवलपर्स, प्रॉम्प्ट इंजीनियरों की जरूरत है और कई संस्थानों को इसके आधार पर अपना पाठ्यक्रम बदलना चाहिए।"
ईवी उद्योग में कौशल विकास की बात करते हुए, कांत ने कहा कि केंद्र ने संस्थानों के भीतर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पाठ्यक्रमों पर लगभग 20 आईआईटी और आईआईआईटी के साथ काम किया है। उन्होंने कहा, "हमें डेटा वैज्ञानिकों, प्रॉडक्ट डेवलपर्स, प्रॉम्प्ट इंजीनियरों की जरूरत है और कई संस्थानों को इसके आधार पर अपना पाठ्यक्रम बदलना चाहिए।"
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ईवी निर्माताओं को कुछ सलाह देते हुए, कांत ने कहा कि निर्माताओं को कम गुणवत्ता वाले उत्पादों को कम लागत पर बेचकर 'नकदी बर्बाद नहीं करनी चाहिए।' उन्होंने कहा, "गुणवत्ता से समझौता करके अपने वाहनों को बेचकर कभी भी नकदी बर्बाद न करें... महत्वाकांक्षी मध्यमवर्गीय भारतीय के लिए एक ब्रांड बनाएं।"