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Old Vehicle Ban: दिल्ली में अब लोगों को प्रदूषण से ज्यादा सुरक्षा की चिंता, सर्वे में सामने आई लोगों की नई सोच
Thu, 24 Jul 2025 05:21 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 24 Jul 2025 05:21 PM IST
सार
दिल्ली में पुराने वाहनों पर सख्त पाबंदियों की तैयारी हो रही है। लेकिन एक नया रुख लोगों के नजरिए में देखने को मिला है। दिल्ली-एनसीआर के लोग अब गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से ज्यादा, उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
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दिल्ली में पुराने वाहन
- फोटो : AI
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विस्तार
दिल्ली में पुराने वाहनों पर सख्त पाबंदियों की तैयारी हो रही है। लेकिन एक नया रुख लोगों के नजरिए में देखने को मिला है। पार्क प्लस रिसर्च लैब्स द्वारा कराए गए एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि दिल्ली-एनसीआर के लोग अब गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से ज्यादा, उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। यह बदलाव सिर्फ सोच में नहीं, बल्कि लोगों की निजी फिक्र में भी झलकता है।
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प्रदूषण के साथ ही सुरक्षा की चिंता
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस सर्वे में 10,000 कार मालिकों से बातचीत की गई। नतीजे बताते हैं कि 54 प्रतिशत लोग यह मानते हैं कि 15 साल पुरानी गाड़ियां चलाना खतरनाक है। सिर्फ इसलिए नहीं कि वे प्रदूषण फैलाती हैं, बल्कि इसलिए कि उनमें एयरबैग, ABS ब्रेक और ADAS जैसी जरूरी सेफ्टी टेक्नोलॉजी नहीं होती। वहीं, 46 प्रतिशत लोग अब भी पुरानी गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को बड़ा खतरा मानते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लोगों के सोच में यह बदलाव आ रहा है कि पुरानी गाड़ियां सिर्फ पर्यावरण नहीं, इंसानों के लिए भी जोखिम हैं।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस सर्वे में 10,000 कार मालिकों से बातचीत की गई। नतीजे बताते हैं कि 54 प्रतिशत लोग यह मानते हैं कि 15 साल पुरानी गाड़ियां चलाना खतरनाक है। सिर्फ इसलिए नहीं कि वे प्रदूषण फैलाती हैं, बल्कि इसलिए कि उनमें एयरबैग, ABS ब्रेक और ADAS जैसी जरूरी सेफ्टी टेक्नोलॉजी नहीं होती। वहीं, 46 प्रतिशत लोग अब भी पुरानी गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को बड़ा खतरा मानते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लोगों के सोच में यह बदलाव आ रहा है कि पुरानी गाड़ियां सिर्फ पर्यावरण नहीं, इंसानों के लिए भी जोखिम हैं।
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सड़क पर जोखिम बढ़ा रहे हैं पुराने वाहन
सर्वे में ऐसे कई अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों का भी जिक्र किया गया है जो बताते हैं कि पुरानी गाड़ियां दुर्घटना और मौतों के मामले में ज्यादा खतरनाक होती हैं। उदाहरण के लिए:
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सर्वे में ऐसे कई अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों का भी जिक्र किया गया है जो बताते हैं कि पुरानी गाड़ियां दुर्घटना और मौतों के मामले में ज्यादा खतरनाक होती हैं। उदाहरण के लिए:
- 15 साल से ज्यादा पुरानी गाड़ी चलाने वाले युवाओं की क्रैश में जान जाने का खतरा 31 प्रतिशत ज्यादा होता है।
- 6 से 15 साल पुरानी गाड़ियों में यह खतरा 19 प्रतिशत ज्यादा होता है।
- कुल मिलाकर, पुरानी गाड़ियां 30 प्रतिशत मामलों में हादसों में शामिल होती हैं, जबकि नई गाड़ियां 25 प्रतिशत।
- इन पुरानी गाड़ियों में अक्सर ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग, और लेन असिस्ट जैसे फीचर नहीं होते। ये फीचर्स अब दुर्घटनाओं से बचने में काफी मददगार साबित होते हैं।
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बैन लगनी चाहिए या नहीं
दिल्ली में मौजूदा नियमों के तहत 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों और 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों को फ्यूल सप्लाई नहीं दी जाती। हालांकि, इस नियम पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक इस सर्वे में इस नियम को लेकर जनता की राय बटी हुई है।
50 प्रतिशत लोग इसे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए जरूरी मानते हैं। जबकि बाकी 50 प्रतिशत का कहना है कि यह नियम बहुत कठोर है और असली समस्या यानी सुरक्षा को नजरअंदाज करता है।
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दिल्ली में मौजूदा नियमों के तहत 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों और 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों को फ्यूल सप्लाई नहीं दी जाती। हालांकि, इस नियम पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक इस सर्वे में इस नियम को लेकर जनता की राय बटी हुई है।
50 प्रतिशत लोग इसे पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए जरूरी मानते हैं। जबकि बाकी 50 प्रतिशत का कहना है कि यह नियम बहुत कठोर है और असली समस्या यानी सुरक्षा को नजरअंदाज करता है।
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सिर्फ बैन समाधान नहीं, बेहतर विकल्पों की मांग
लोगों ने सर्वे में यह भी सुझाव दिए कि सीधे बैन लगाने के बजाय कुछ संतुलित और व्यावहारिक उपाय अपनाए जा सकते हैं। जैसे -
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लोगों ने सर्वे में यह भी सुझाव दिए कि सीधे बैन लगाने के बजाय कुछ संतुलित और व्यावहारिक उपाय अपनाए जा सकते हैं। जैसे -
- 29% लोग हर साल पुरानी गाड़ियों की सेफ्टी चेकिंग अनिवार्य करने के पक्ष में हैं।
- 28% चाहते हैं कि PUCC (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट) के नियम और कड़े हों।
- 27% ने कहा कि अगर पब्लिक ट्रांसपोर्ट बेहतर हो जाए, तो लोग खुद ही प्राइवेट गाड़ियां कम इस्तेमाल करेंगे।
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प्रदूषण के लिए अब गाड़ियों को नहीं मानते सबसे बड़ा दोषी
सर्वे में एक और दिलचस्प बात सामने आई है। अब लोग प्रदूषण के लिए सिर्फ गाड़ियों को जिम्मेदार नहीं मानते। सिर्फ 25 प्रतिशत लोगों ने वाहनों को दिल्ली की जहरीली हवा का मुख्य कारण माना। जबकि:
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सर्वे में एक और दिलचस्प बात सामने आई है। अब लोग प्रदूषण के लिए सिर्फ गाड़ियों को जिम्मेदार नहीं मानते। सिर्फ 25 प्रतिशत लोगों ने वाहनों को दिल्ली की जहरीली हवा का मुख्य कारण माना। जबकि:
- 33% लोगों ने अवैध उद्योगों को दोषी ठहराया
- 26% ने पराली जलाने को मुख्य कारण बताया
- और 15% ने अधिकृत निर्माण कार्यों को जिम्मेदार माना।
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