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PUC 2.0: दिल्ली सरकार का बड़ा कदम, पीयूसी सिस्टम में रोबोटिक्स और सेंसर टेक्नोलॉजी लाने की तैयारी

Wed, 28 Jan 2026 04:22 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 28 Jan 2026 04:22 PM IST
सार

दिल्ली सरकार अपने पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सिस्टम में बड़े बदलाव की योजना बना रही है। जिसमें छोटे बूथ के मौजूदा मॉडल से बड़े, सेंट्रलाइज्ड सेंटर्स पर शिफ्ट किया जाएगा, जो ज्यादातर सेंसर-आधारित टेक्नोलॉजी पर काम करेंगे।

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From Booths to Tech Hubs: Delhi Govt to Revamp PUC System with Sensors and Robotics
PUC सेंटर - फोटो : AI

विस्तार

दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) (पीयूसी) व्यवस्था में बड़े बदलाव की योजना बना रही है। मौजूदा छोटे-छोटे पीयूसी बूथ की जगह अब बड़े, केंद्रीकृत और आधुनिक केंद्र बनाए जाने का प्रस्ताव है। जहां उत्सर्जन जांच का काम मुख्य रूप से सेंसर-आधारित तकनीक से किया जाएगा।
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दिल्ली सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक
पीयूसी 2.0 मॉडल को लेकर मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में एक अहम बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की। इसमें पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, परिवहन मंत्री पंकज सिंह और दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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अधिकारियों के अनुसार, इस बैठक में मौजूदा पीयूसी सिस्टम की कमियों की समीक्षा की गई और तकनीक आधारित नए मॉडल पर चर्चा हुई।

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मानवीय दखल कम करने पर सरकार का फोकस
हालांकि अभी अंतिम योजना को मंजूरी नहीं मिली है। लेकिन सरकार मौजूदा व्यवस्था से हटकर ऐसे विकल्प तलाश रही है, जिनमें मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम हो।

एक अधिकारी के मुताबिक, लक्ष्य यह है कि रोबोटिक्स और सेंसर आधारित तकनीक के जरिए रियल-टाइम में वाहनों के उत्सर्जन की जांच की जा सके। साथ ही नए पीयूसी केंद्रों के लिए जगह, एंट्री-एग्जिट व्यवस्था और बुनियादी ढांचे की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी बन सके।

निजी वाहनों तक बढ़ेगा ऑटोमेटेड टेस्टिंग सिस्टम
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि फिलहाल ऑटोमेटेड उत्सर्जन जांच प्रणाली वाणिज्यिक वाहनों के लिए मौजूद है। सरकार की दीर्घकालिक योजना है कि इसी तरह की तकनीक को निजी यानी नॉन-कमर्शियल वाहनों तक भी विस्तार दिया जाए। रिमोट सेंसिंग और रोबोटिक्स के इस्तेमाल से फर्जीवाड़े की गुंजाइश कम होगी।

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CAG रिपोर्ट के बाद तेज हुई सुधार की प्रक्रिया
पिछले कई महीनों से सरकार पीयूसी सिस्टम में सुधार को लेकर सक्रिय है। इसकी एक बड़ी वजह अप्रैल 2025 में जारी नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट रही। जिसमें उत्सर्जन जांच और सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आई थीं।

खराब उपकरणों वाले PUC केंद्रों पर कार्रवाई
दिसंबर में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने घोषणा की थी कि खराब उपकरणों के इस्तेमाल के चलते 12 पीयूसी केंद्रों को निलंबित किया गया है। सरकार ने साफ किया था कि उत्सर्जन जांच में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

ऑडिट रिपोर्ट में सामने आईं चौंकाने वाली गड़बड़ियां
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2020 के बीच जांचे गए 22.1 लाख डीजल वाहनों में से करीब 24 प्रतिशत के उत्सर्जन आंकड़े दर्ज ही नहीं किए गए थे। 4,000 से अधिक मामलों में तय सीमा से ज्यादा प्रदूषण करने वाले वाहनों को भी 'पास' घोषित कर दिया गया।

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि लगभग 7,700 मामलों में एक ही केंद्र पर एक साथ कई वाहनों की जांच दिखाई गई, जिससे फर्जी सर्टिफिकेशन की आशंका बढ़ी। इसके अलावा 76,865 मामलों में एक मिनट से भी कम समय में पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है।

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आधुनिक तकनीक अपनाने में देरी पर सवाल
सीएजी ने यह भी बताया कि रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया नहीं गया, जबकि इस पर 2009 से विचार चल रहा था। और सुप्रीम कोर्ट भी इसे बार-बार लागू करने पर जोर दे चुका है।

क्यों है यह जरूरी
पीयूसी 2.0 के जरिए दिल्ली सरकार का लक्ष्य प्रदूषण जांच व्यवस्था को पारदर्शी, भरोसेमंद और तकनीक आधारित बनाना है। अगर यह मॉडल लागू होता है, तो न सिर्फ फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी, बल्कि राजधानी में वाहनों से होने वाले प्रदूषण की सटीक निगरानी भी संभव हो सकेगी। 

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