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Detroit: 2026 में मजबूती के साथ एंट्री कर रही हैं Ford-GM, लेकिन बदलती ऑटो इंडस्ट्री बन सकती है सबसे बड़ा खतरा

Wed, 24 Dec 2025 06:25 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 24 Dec 2025 06:25 PM IST
सार

डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों और ईवी-विरोधी रुख ने डेट्रॉइट की कंपनियों को अप्रत्याशित राहत दी। शुरुआती झटकों के बाद टैरिफ में ढील और ईंधन दक्षता नियमों में नरमी ने फोर्ड और जीएम को संभलने का मौका दिया।

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Ford and GM Enter 2026 Strong, but Detroit Auto Industry Disruption Poses Biggest Risk Yet
Car Plant - फोटो : Freepik

विस्तार

साल 2025 अमेरिकी ऑटो इंडस्ट्री के लिए राजनीति और कारोबार के असामान्य मेल का गवाह बना। व्हाइट हाउस की नीतियों का असर इतना गहरा रहा कि कार कंपनियों के शीर्ष अधिकारी खुले तौर पर राजनीतिक संकेत देते दिखे। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क की लाल टोपी से लेकर जापान में एक रेस इवेंट में टोयोटा चेयरमैन अकीओ टोयोडा की राजनीतिक मौजूदगी तक, यह साफ हो गया कि ऑटो उद्योग का मूड काफी हद तक सत्ता के केंद्र से तय हो रहा है। ऐसे माहौल में फोर्ड और जनरल मोटर्स जैसी दिग्गज कंपनियां 2026 में मजबूत स्थिति के साथ प्रवेश कर रही हैं। लेकिन यही मजबूती उनके लिए सबसे बड़ा खतरा भी बन सकती है।
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ट्रंप युग में राहत और उछाल
डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों और ईवी-विरोधी रुख ने डेट्रॉइट की कंपनियों को अप्रत्याशित राहत दी। शुरुआती झटकों के बाद टैरिफ में ढील और ईंधन दक्षता नियमों में नरमी ने फोर्ड और जीएम को संभलने का मौका दिया। नतीजा यह रहा कि दोनों कंपनियों के शेयर बाजार में प्रदर्शन ने चार साल बाद पहली बार एसएंडपी 500 को पीछे छोड़ दिया। 2026 में अमेरिकी वाहन बिक्री के स्थिर रहने और पेट्रोल-डीजल इंजनों पर बढ़ते भरोसे ने इनके मुनाफे की उम्मीदें और बढ़ा दी हैं।

गौरतलब है कि डेट्रॉइट अमेरिका के मिशिगन राज्य का एक प्रमुख शहर है। जो अपनी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए मशहूर है। 

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Ford and GM Enter 2026 Strong, but Detroit Auto Industry Disruption Poses Biggest Risk Yet
Car Plant - फोटो : Freepik
निवेशकों की ठंडी प्रतिक्रिया
हालांकि बाहरी हालात अनुकूल दिख रहे हैं, लेकिन निवेशकों का नजरिया अब भी सतर्क है। फोर्ड और जीएम के शेयर सस्ते मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे हैं, जो यह संकेत देता है कि बाजार इस अच्छे दौर को अस्थायी मान रहा है। वजह साफ है कि इन कंपनियों की मौजूदा सफलता नीतिगत सुरक्षा पर टिकी है, न कि दीर्घकालिक तकनीकी बढ़त पर।

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असली खतरा: बदलाव की आहट
ऑटो उद्योग में असली चुनौती बाहर से आ रही है। चीन की कार कंपनियां न सिर्फ अपने घरेलू बाजार में विदेशी ब्रांड्स को पीछे छोड़ रही हैं। बल्कि उन देशों में भी तेजी से फैल रही हैं जहां व्यापारिक बाधाएं कम हैं। इलेक्ट्रिक वाहन लगातार सस्ते और बेहतर हो रहे हैं और अमेरिका से बाहर कई बाजारों में उनकी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। साथ ही बैटरी, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोनॉमस ड्राइविंग जैसी तकनीकें वाहन निर्माण और उपयोग के तरीके को बदल रही हैं।

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Car Plant - फोटो : Freepik
पूंजी और नवाचार की दौड़
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बदलाव में सबसे अहम हथियार पूंजी है। नए खिलाड़ी बैटरी, चिप्स और सॉफ्टवेयर जैसी भविष्य की तकनीकों में उतना ही, बल्कि कई बार उससे ज्यादा निवेश कर रहे हैं जितना पारंपरिक दिग्गज कर पा रहे हैं। टेस्ला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसका बाजार मूल्य फोर्ड और जीएम दोनों को मिलाकर भी कई गुना ज्यादा है। यह असंतुलन डेट्रॉइट की कंपनियों के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन रहा है।

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नवाचार में पिछड़ता डेट्रॉइट
हाल के वर्षों में फोर्ड और जीएम ने कई बार नवाचार के मोर्चे पर संघर्ष किया है। जीएम का रोबोटैक्सी प्रोजेक्ट क्रूज अरबों डॉलर के नुकसान के बाद ठप पड़ा। जबकि फोर्ड ने भी स्वचालित ड्राइविंग और ईवी विकास में भारी नुकसान झेला। अब फोर्ड का कम लागत वाले इलेक्ट्रिक ट्रक का नया प्रयास दिलचस्प जरूर है। लेकिन यह भी दिखाता है कि कंपनी को अपने पारंपरिक ढांचे से बाहर प्रयोग करने की जरूरत महसूस हो रही है।

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Car Plant - फोटो : Volkswagen
2026: मौका या चूक?
आने वाले वर्षों में फोर्ड और जीएम को व्हाइट हाउस का समर्थन मिल सकता है। लेकिन असली सवाल यह है कि वे इस समय का इस्तेमाल कैसे करते हैं। अगर यह दौर सिर्फ आराम का मौका बना, तो वैश्विक बदलाव उन्हें पीछे छोड़ सकता है। लेकिन अगर वे इसी समय में भविष्य की तकनीकों में निर्णायक बढ़त बना पाए, तो यह जोखिम भरा दौर उनके लिए नई शुरुआत भी साबित हो सकता है।

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