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EV Chargers: भारत में पिछले दो वर्षों में ईवी चार्जर की संख्या में नौ गुना का इजाफा, लेकिन यह पर्याप्त नहीं!

Sat, 10 Aug 2024 06:13 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Sat, 10 Aug 2024 06:13 PM IST
सार

भारत में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर फरवरी 2022 के 1,800 स्टेशनों से बढ़कर मार्च 2024 तक लगभग नौ गुना बढ़कर 16,347 हो गया है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक यह नाकाफी है। जानें कैसे। 

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electric vehicle charging station in india expands ninefold in last two years claims report
Electric Vehicle Charger Plug with Digital Display - फोटो : Freepik

विस्तार

भारत में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर फरवरी 2022 के 1,800 स्टेशनों से बढ़कर मार्च 2024 तक लगभग नौ गुना बढ़कर 16,347 हो गया है। हालांकि, फॉरविस माजर्स की एक हालिया रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यह बढ़ोतरी अभी भी भविष्य की जरूरतों से कम है। 
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रिपोर्ट का अनुमान है कि 2030 तक भारत की सड़कों पर लगभग 50 मिलियन (5 करोड़) ईवी हो सकते हैं। जिसके लिए लगभग 1.32 मिलियन (13.2 लाख) चार्जिंग स्टेशनों की जरूरत होगी। इस मांग को पूरा करने के लिए देश को सालाना लगभग 400,000 (4 लाख) चार्जर स्थापित करने की आवश्यकता होगी।

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय ने पहले ही विभिन्न राज्यों में 2,877 ईवी चार्जिंग स्टेशन और 16 राजमार्गों और 9 एक्सप्रेसवे पर 1,576 स्टेशन को मंजूरी दे दी है।
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भारत का ईवी बाजार 2030 तक बढ़कर 48.6 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। जो विशेष रूप से दोपहिया (2W) और तीन पहिया (3W) सेगमेंट में बढ़ती मांग से प्रेरित है। चार पहिया (4W) बाजार भी नए मॉडल लॉन्च के साथ मजबूत क्षमता दिखाता है। कुल स्वामित्व की कम लागत, सुविधा, स्थिरता, बढ़ता आपूर्तिकर्ता नेटवर्क, उत्पाद अनुकूलन और FAME-II योजना जैसी सरकारी प्रोत्साहन जैसे कारक इस तेजी से अपनाने में योगदान दे रहे हैं।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने की तात्कालिकता पर जोर देते हुए, फॉरविस माजर्स इंडिया में पार्टनर और ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स सेक्टर के मुखिया रोहित चतुर्वेदी ने कहा, "भारत को बढ़ती मांग को पूरा करने और रेंज चिंता को कम करने के लिए सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने की जरूरत है। 2030 तक, इलेक्ट्रिक वाहन भारत के यात्री वाहन बाजार का लगभग एक तिहाई हिस्सा बनने का अनुमान है। जो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं को उजागर करता है।" 

भारत के चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को 2W और 3W के प्रभुत्व के कारण अनूठी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो मुख्य रूप से एसी धीमी चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग पर निर्भर हैं। इसके उलट, 4W और बसों को एसी और डीसी चार्जिंग समाधानों के मिश्रण की जरूरत होती है। निजी 2W और 4W के लिए घर और कार्यस्थल चार्जिंग का प्रभुत्व रहने की उम्मीद है। जबकि वाणिज्यिक बेड़े निजी डिपो या सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क पर निर्भर होंगे। 

फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (FAME) योजना ईवी अपनाने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का समर्थन करना जारी रखती है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अर्ध-सार्वजनिक (सेमी-पब्लिक) चार्जिंग सुविधाएं सभी वाहन-धारण क्षमताओं का 20 प्रतिशत हैं। जिसके लिए इन परिसरों के लिए अतिरिक्त बिजली लोड की जरूरत होगी। 
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